हरियाणा में हाई-रिस्क इमारतों के लिए नया नियम, अब सरकारी जांच के साथ थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन से मिलेगा ओसी

Edited By Harman, Updated: 24 Jul, 2026 08:23 AM

haryana introduces new rules for high risk buildings

हरियाणा सरकार ने ऊंची और हाई-रिस्क इमारतों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब केवल सरकारी निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन मॉडल लागू किया जाएगा। टाउन एंड कंट्री...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार ने ऊंची और हाई-रिस्क इमारतों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) जारी करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब केवल सरकारी निरीक्षण पर निर्भर रहने के बजाय थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन मॉडल लागू किया जाएगा। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने इसके लिए अनुभवी और सूचीबद्ध आर्किटेक्ट्स के माध्यम से भवनों का तकनीकी सत्यापन कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनके प्रमाणन के आधार पर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी करने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था से मंजूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और पेशेवर बनेगी। यह पहल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और रेगुलेटरी रिफॉर्म्स के तहत लागू की जा रही है, ताकि निर्माण क्षेत्र में अनावश्यक औपचारिकताएं कम हों और सेवाएं तय समयसीमा में उपलब्ध कराई जा सकें।

अनुभवी आर्किटेक्ट्स का तैयार होगा पैनल

थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग पात्र आर्किटेक्ट्स का पैनल तैयार करेगा। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। इसके लिए पांच सदस्यीय चयन समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य नगर योजनाकार (हरियाणा) करेंगे। समिति पात्रता की जांच के बाद योग्य आर्किटेक्ट्स को सूचीबद्ध करेगी।

सख्त पात्रता मानकों के बाद ही मिलेगा अधिकार

हर आर्किटेक्ट को थर्ड पार्टी सर्टिफायर बनने की अनुमति नहीं होगी। इसके लिए काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (सीओए) में वैध पंजीकरण अनिवार्य रहेगा। साथ ही हाई-रिस्क भवनों के डिजाइन और निर्माण का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव तथा हरियाणा में पांच हाई-रिस्क परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी करने का रिकॉर्ड भी जरूरी होगा। केवल इन सभी शर्तों को पूरा करने वाले विशेषज्ञों को ही पैनल में शामिल किया जाएगा।

तेज होगी ओसी जारी करने की प्रक्रिया

अब तक हाई-रिस्क भवनों के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट के लिए विभागीय तकनीकी निरीक्षण और परीक्षण ही प्रमुख आधार होते थे। नई व्यवस्था में अधिकृत आर्किटेक्ट्स का तकनीकी प्रमाणन भी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगा। इससे विभाग पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बिल्डरों को समय पर ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने की संभावना बढ़ेगी और तकनीकी जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय हो सकेगी।

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