Haryana में लंपी वायरस का प्रकोप, 9480 गोवंश आए चपेट में, अब तक 70 पशुओं की मौत... 950 का इलाज जारी

Edited By Isha, Updated: 18 Sep, 2026 02:30 PM

lumpy virus outbreak in haryana 9 480 cattle affected

हरियाणा में एक बार फिर लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे बड़ी संख्या में गोवंश इसकी चपेट में आ रहे हैं। पशुपालन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक करीब 9480

चंडीगढ़: हरियाणा में एक बार फिर लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे बड़ी संख्या में गोवंश इसकी चपेट में आ रहे हैं। पशुपालन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब तक करीब 9480 गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित हो चुके हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इनमें से 8530 गोवंश पूरी तरह ठीक भी हो चुके हैं, जबकि वर्तमान में 950 गोवंशों का उपचार जारी है। इस खतरनाक संक्रमण के चलते राज्य में अब तक 70 गोवंशों की मौत हो चुकी है।

किन पशुओं को हुआ ज्यादा नुकसान?
हरियाणा पशुपालन व डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिन गोवंशों की मौत हुई है, वे या तो पहले से बीमार थे, दुर्घटना का शिकार हुए थे या फिर चार महीने से कम आयु के थे। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) द्वारा लिए गए करीब 300 सैंपल की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। इसके अलावा, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 17 संदिग्ध नमूने भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (निशाद) में भेजे गए हैं, जिनकी आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। निदेशक ने अपील की है कि जिन गोवंशों की आयु वैक्सीनेशन के समय चार महीने से कम थी और अब वे इससे अधिक आयु के हो गए हैं, उन्हें तुरंत टीका लगवाया जाए।

पशुपालकों और गोशाला संचालकों के लिए निर्देश व सावधानियां
संक्रमण को रोकने के लिए राज्य के 1000 पशु चिकित्सालयों और 1800 औषधालयों के पशु चिकित्सक व सहायक फील्ड में तैनात किए गए हैं। विभाग ने पशुपालकों के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरतना अनिवार्य किया है। लंपी एक विषाणु जनित संक्रामक रोग है, इसलिए गोवंश को मच्छर, मक्खी और चिचड़ी जैसे परजीवियों से बचाएं। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से पूरी तरह अलग बांधें और उन्हें मेलों या हाट-बाजारों में न ले जाएं। मृत पशुओं को खुले में फेंकने के बजाय गहरा गड्ढा खोदकर चूना डालकर दफनाएं।

 बीमार पशु के बर्तन, सांकल और चारा-पानी अलग रखें। स्वस्थ व टीकाकृत पशुओं का दूध पीने में कोई खतरा नहीं है, फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से दूध को अच्छी तरह उबालकर ही उपयोग करें। पशुओं में तेज बुखार, शरीर पर गांठें, आंख-नाक से पानी बहना या दूध घटने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। किसी भी सहायता या सूचना के लिए किसान टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1962 पर संपर्क कर सकते हैं।

 

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