Edited By Isha, Updated: 05 Aug, 2026 10:36 AM

हरियाणा के राइस मिलर्स के लिए केंद्र सरकार का राहत भरा फैसला ही नई परेशानी बन गया। 30 जून तक कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) जमा नहीं होने पर मिलर्स ने समय बढ़ाने की मांग की थी।
कैथल: हरियाणा के राइस मिलर्स के लिए केंद्र सरकार का राहत भरा फैसला ही नई परेशानी बन गया। 30 जून तक कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) जमा नहीं होने पर मिलर्स ने समय बढ़ाने की मांग की थी। इस पर केंद्र सरकार ने 29 जुलाई को सीएमआर जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी। मिलर्स को उम्मीद थी कि अब उनका बचा हुआ पूरा चावल एफसीआई में जमा हो जाएगा। लेकिन अब एफसीआई के नए आदेश ने पूरा समीकरण बदल दिया।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) हरियाणा ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि समयसीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि एफसीआई उतना ही अतिरिक्त चावल भी लेगी। हरियाणा के लिए तय 36 लाख मीट्रिक टन सीएमआर लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है।
हालांकि, प्रदेश में कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) की 7.26 लाख मीट्रिक टन डिलीवरी अभी पेंडिंग है। इनमें से एफसीआई ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा खरीद लक्ष्य के तहत वह सिर्फ 57,918 मीट्रिक टन चावल ही स्वीकार कर सकती है। ऐसे में करीब 6.69 लाख मीट्रिक टन चावल के उठान पर संकट खड़ा हो गया है। प्रति क्विंटल औसत कीमत 3,800 रुपए के हिसाब से देखें तो करीब 2,541 करोड़ रुपए मूल्य का चावल लेने से एफसीआई ने मना कर दिया है। अब इस स्टॉक के उठान के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त खरीद लक्ष्य की मंजूरी जरूरी होगी।
ऐसे समझें- राज्य सरकार को क्यों घाटा
जब मंडियों से सरकारी एजेंसियां किसानों का धान खरीदकर मिलर्स को देती है तो इसकी पेमेंट राज्य सरकार करती है। इसके बाद जब चावल कुटाई हो जाता है तो एफसीआई को जितना चावल जमा होता है उसकी पेमेंट केंद्र सरकार राज्य सरकार को करती है। ऐसे में यदि मिलों में करोड़ों का चावल पड़ा रहता है तो मिलर्स के साथ-साथ सरकार को भी मोटा नुकसान होगा।
समय बढ़ा, लेकिन लक्ष्य वहीं... इसलिए फंसा पूरा खेल
हरियाणा के लिए सीएमआर का लक्ष्य 36 लाख एमटी निर्धारित है। 30 जून तक 35.29 लाख एमटी चावल प्राप्त हो चुका है। उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश से अभी कुछ मात्रा आना बाकी है। उसे समायोजित करने के बाद हरियाणा के हिस्से में केवल 57,918 एमटी की ही गुंजाइश बचती है। इसके बाद यदि और चावल लेना है तो केंद्र सरकार से अलग मंजूरी लेनी होगी। एफसीआई ने कहा है कि कई मिलों में चावल तैयार है या प्रक्रिया में है। ऐसे में अतिरिक्त लक्ष्य स्वीकृत नहीं हुआ तो तैयार स्टॉक उठाना मुश्किल हो जाएगा।
- मिलों में पड़ा करोड़ों का चावल, डिलीवरी नहीं हुई तो होगा करोड़ों का नुकसान: छाबड़ा
राइस मिलर्स एंड डिलर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा का कहना है कि केंद्र सरकार ने सीएमआर जमा कराने की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाकर राहत तो दे दी, लेकिन खरीद लक्ष्य नहीं बढ़ाने से यह राहत बेअसर हो गई। प्रदेश की मिलों में लाखों टन चावल तैयार है या मिलिंग की प्रक्रिया में है। यदि एफसीआई अतिरिक्त खरीद लक्ष्य मंजूर नहीं करती तो यह चावल मिलों में ही फंस जाएगा और मिलर्स को हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। एसोसिएशन ने मांग की है कि हरियाणा के लिए तत्काल अतिरिक्त सीएमआर खरीद लक्ष्य मंजूर किया जाए, ताकि 30 सितंबर तक तैयार होने वाले पूरे चावल की एफसीआई में डिलीवरी हो सके और मिलर्स को नुकसान से बचाया जा सके।
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सबसे ज्यादा करनाल, फतेहबाद व यमुनानगर में चावल डिलीवरी पेंडिंग
जिला पेंडिंग चावल (एमटी)
- करनाल 2,61,994.44
- फतेहाबाद 1,55,625.03
- यमुनानगर 69,450.21
- कैथल 62,933.04
- कुरुक्षेत्र 49,867.56
- सिरसा 37,581.57
- जींद 21,492.98
- हिसार 17,156.45
- अंबाला 13,901.95
- पानीपत 12,869.60
- कुल: 7,26,695.83
इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा और इसका समाधान निकाला जाएगा। जो चावल तैयार है, उसकी डिलीवरी हर हाल में कराई जाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के माध्यम से केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अतिरिक्त खरीद लक्ष्य मंजूर करने का आग्रह किया जाएगा। राइस मिलर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का जल्द समाधान कराया जाएगा।
राजेश नागर, मंत्री खाद्य एवं आपूर्ति विभाग हरियाणा