Edited By Isha, Updated: 05 Aug, 2026 09:32 AM

भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' अब उस चरण में पहुंच चुका है, जहां से देश की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियां अंतिम दौर में दिखाई दे रही हैं। वर्षों के अनुसंधान, सैकड़ों तकनीकी परीक्षणों और
चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): भारत का बहुप्रतीक्षित मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' अब उस चरण में पहुंच चुका है, जहां से देश की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारियां अंतिम दौर में दिखाई दे रही हैं। वर्षों के अनुसंधान, सैकड़ों तकनीकी परीक्षणों और स्वदेशी तकनीकों के विकास के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) मिशन के सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। अब वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चुनौती पहले मानवरहित मिशन 'जी-1' को सफल बनाना है, क्योंकि इसी के परिणाम पर भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान का भविष्य काफी हद तक निर्भर करेगा।
लोकसभा में सांसद श्यामकुमार दौलत बारवे के प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय राज्य मंत्री (प्रधानमंत्री कार्यालय) डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक लगभग सभी प्रमुख तकनीकी प्रणालियों का विकास पूरा हो चुका है और कार्यक्रम निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
मानव मिशन के लिए जरूरी तकनीक तैयार
सरकार के अनुसार गगनयान मिशन के लिए विकसित की गई अधिकांश महत्वपूर्ण प्रणालियों का सफल परीक्षण किया जा चुका है। इनमें मानव-रेटेड एलवीएम-3 (एचएलवीएम-3) प्रक्षेपण यान, क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल, क्रू एस्केप सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम, डिसेलेरेशन एवं रिकवरी सिस्टम, एवियोनिक्स तथा मिशन कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।
इन सभी प्रणालियों की विश्वसनीयता मानव मिशन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह इन्हीं तकनीकों पर निर्भर करेगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन प्रणालियों के सफल परीक्षण के बाद मिशन ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल कर ली है।
'जी-1' मिशन करेगा अंतिम तकनीकी परीक्षा
मानवयुक्त उड़ान से पहले इसरो पहला मानवरहित मिशन 'जी-1' लॉन्च करेगा। इस मिशन में ऑर्बिटल मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल, लॉन्च व्हीकल, री-एंट्री प्रक्रिया, रिकवरी सिस्टम और अन्य सुरक्षा तंत्रों का वास्तविक अंतरिक्ष परिस्थितियों में परीक्षण किया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार यह मिशन पूरे गगनयान कार्यक्रम की सबसे अहम कड़ी होगा। यदि 'जी-1' सफल रहता है तो मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए सबसे बड़ी तकनीकी बाधा दूर हो जाएगी और इसके बाद मानवयुक्त मिशन का रास्ता काफी आसान हो जाएगा।
चारों भारतीय गगनयात्री अंतिम प्रशिक्षण में
गगनयान मिशन के लिए चयनित भारतीय वायुसेना के चार अधिकारियों का रूस में प्रारंभिक प्रशिक्षण पहले ही पूरा हो चुका है। वर्तमान में वे बेंगलुरु स्थित इसरो के एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग फैसिलिटी में मिशन-विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान अंतरिक्ष यान संचालन, माइक्रोग्रैविटी में कार्य करना, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटना, अंतरिक्ष में जीवनरक्षक प्रणालियों का उपयोग और वास्तविक मिशन जैसी परिस्थितियों में अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि अंतरिक्ष उड़ान के दौरान किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके।
श्रीहरिकोटा में तैयार हुआ मानव मिशन का विशेष ढांचा
मानव अंतरिक्ष उड़ान को ध्यान में रखते हुए श्रीहरिकोटा स्थित प्रक्षेपण केंद्र में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। यहां अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष क्रू एक्सेस आर्म, आपातकालीन निकासी प्रणाली, आधुनिक चेकआउट सुविधाएं तथा ऑर्बिटल मॉड्यूल की तैयारी के लिए अलग बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है।
इसके साथ ही एनवायरनमेंट कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ईसीएलएसएस) जैसी अत्याधुनिक स्वदेशी प्रणाली का परीक्षण भी अंतिम चरण में है। यह प्रणाली अंतरिक्ष यान के भीतर ऑक्सीजन, तापमान, वायुदाब और अन्य जीवनरक्षक व्यवस्थाओं को नियंत्रित करेगी।
भारत के अंतरिक्ष भविष्य की मजबूत नींव बनेगा गगनयान
गगनयान केवल एक मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारत के दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशनों की आधारशिला भी माना जा रहा है। इस मिशन से प्राप्त अनुभव के आधार पर भारत भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना, लंबी अवधि के मानव अंतरिक्ष अभियान तथा चंद्रमा तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं को आगे बढ़ाएगा।
लोकसभा में सरकार द्वारा साझा की गई ताजा प्रगति रिपोर्ट से स्पष्ट है कि गगनयान मिशन अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है। अब पूरे देश और वैज्ञानिक समुदाय की निगाहें पहले मानवरहित मिशन 'जी-1' पर टिकी हैं, क्योंकि इसकी सफलता भारत के अंतरिक्ष इतिहास में पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान का मार्ग प्रशस्त करेगी।