कुत्तों के हमले में बुरी तरह जख्मी 5 वर्षीय बच्ची की हुई सर्जरी, मिली नई जिंदगी

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 26 Mar, 2026 07:15 PM

5 year old girl seriously injured in dog attack undergoes surgery gets a new le

आवारा कुत्तों के हमले में बुरी तरह से घायल पांच वर्षीय बच्ची को नई जिंदगी मिली है। कुत्तों ने उसकी पीठ, जांघ और पैरों को बुरी तरह से नोचा था। हमला इतना भयावह था कि कुत्तों ने उसकी बायीं जांघ का बड़ा हिस्सा काटकर अलग कर दिया था।

गुड़गांव ब्यूरो : आवारा कुत्तों के हमले में बुरी तरह से घायल पांच वर्षीय बच्ची को नई जिंदगी मिली है। कुत्तों ने उसकी पीठ, जांघ और पैरों को बुरी तरह से नोचा था। हमला इतना भयावह था कि कुत्तों ने उसकी बायीं जांघ का बड़ा हिस्सा काटकर अलग कर दिया था। इससे पैरों में खून की आपूर्ति करने वाली धमनी  भी कट गई थी। इस कारण से पैर में गैंग्रीन होने की आशंका थी। समय पर अगर धमनी को रीकंस्ट्रक्ट नहीं किया जाता, तो पैर को काटना पड़ सकता था। आर्टेमिस हॉस्पिटल में पीडियाट्रिक कार्डियोथोरेसिक और वस्कुलर सर्जरी टीम ने इस जटिल मामले में तुरंत कदम उठाया और धमनी को रीकंस्ट्रक्ट किया। क्षतिग्रस्त हुई धमनी को एक आर्टिफिशियल वस्कुलर ग्राफ्ट से रिप्लेस किया गया, जिससे पैर में खून की आपूर्ति शुरू हो गई। सही समय पर सर्जरी होने से बच्ची का पैर अब सुरक्षित है। घाव भरने के बाद वह फिर से चल-फिर सकेगी।

 

आर्टेमिस हॉस्पिटल्स की एम.डी. डॉ. देवलीना चक्रवर्ती ने कहा, ‘यह बहुत गंभीर और मुश्किल मामला था, जहां हर सेकेंड कीमती था। घाव के कारण बच्ची के पैर को खतरा था। पीडियाट्रिक वस्कुलर रिपेयर में व्यापक अनुभव, समय पर सर्जरी और आर्टेमिस हॉस्पिटल के डॉक्टरों व नर्सों के टीमवर्क ने बच्ची को स्थायी तौर पर अपंग होने से बचा लिया।’ यह मामला दिखाता है कि हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के मानकों को बेहतर करने, आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने, शहरों को सुरक्षित बनाने और लोगों को इस बारे में ज्यादा सतर्क बनाने की जरूरत है। हमें साथ मिलकर काम करने, समझदारी से फैसले लेने और ऐसी जानलेवा स्थितियों से बचने के लिए बच्चों एवं बुजुर्गों को ज्यादा सुरक्षित रखने की जरूरत है। छोटे बच्चों एवं बुजुर्गों को ज्यादा खतरा रहता है।

 

पीडियाट्रिक कार्डियो-वस्कुलर सर्जरी के प्रमुख डॉ. असीम आर. श्रीवास्तव ने बताया, ‘ब्लड वेसल्स का जख्म जटिल होता है और इसका इलाज मुश्किल होता है। विशेषरूप से बच्चों में ज्यादा मुश्किल होती है, क्योंकि उनकी धमनियां बहुत महीन होती हैं। कुत्तों के हमले में इस तरह से मांसपेशियों और धमनियों के कट जाने से दोतरफा खतरा रहता है। एक तरफ कुत्ते की लार के कारण बहुत ज्यादा संक्रमण होता है और उस जगह को रिपेयर करना मुश्किल रहता है। ऐसे मामलों में इलाज के अलग तरीके खोजने होते हैं, जैसे कि इस बच्ची में धमनी को माइक्रोवस्कुलर तकनीक से फिर से बनाया गया। संक्रमित एवं खुले घाव से दूर रखने के लिए इसे जांघ के सामने के बजाय जांघ के किनारे पर बनाया गया।’

 

हमारे यहां आवारा कुत्ते दुनिया में सबसे ज्यादा हैं, कुत्तों के काटने की घटनाएं भी दुनिया में सबसे ज्यादा होती हैं और रेबीज से होने वाली मौतें भी दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। लेकिन मौजूदा हालात में इस समस्या का समाधान जल्द नहीं निकल पाएगा। हम सब जानते हैं कि आवारा कुत्तों के झुंडों के हमले पूरे भारत में आम हैं। ये कुत्ते अक्सर बच्चों और बुज़ुर्गों पर हमला करते हैं। ऐसे मामलों में इलाज की प्रक्रिया लंबी होती है, संक्रमित घावों को भरने में लंबा समय लगता है, दर्द लंबे समय तक बना रहता है और भावनात्मक आघात शायद जीवन भर रहता है। इसलिए स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के रूप में हमें ऐसे मामलों में घायलों को इलाज की इस लंबी प्रक्रिया में सहायता देने के तरीके खोजने होंगे।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!