Edited By Krishan Rana, Updated: 09 Mar, 2026 03:32 PM

हौसलों के आगे शारीरिक मजबूरी भी छोटी पड़ जाती है। चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद महेंद्रगढ़ जिले के गांव खटोटी कलां निवासी नितीश ने
महेन्द्रगढ़ (प्रदीप बालरोडिया) : हौसलों के आगे शारीरिक मजबूरी भी छोटी पड़ जाती है। चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद महेंद्रगढ़ जिले के गांव खटोटी कलां निवासी नितीश कुमार ने कड़ी मेहनत और मजबूत इरादों के दम पर यूपीएससी परीक्षा में झंडे गाड़ दिए। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर हिम्मत और लगन हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। नितीश कुमार ने अपने 5वें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 847 प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि अगर इंसान के इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकता।
शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद नितीश कुमार ने कभी हार नहीं मानी और लगातार संघर्ष करते हुए यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने बताया कि यह उनका UPSC सिविल सेवा परीक्षा का पांचवां प्रयास था और इस बार उन्हें सफलता मिली।
नितीश कुमार ने बताया कि शुरुआत में उनका रुझान सिविल सेवा की ओर नहीं था। वे पहले लॉ की पढ़ाई करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उन्हें बाहर जाकर पढ़ाई करना संभव नहीं हो पाया। इसी दौरान स्कूल के एक वार्षिक कार्यक्रम में उपायुक्त के आने से उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी करने का निर्णय लिया। उस समय ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधाएं भी उपलब्ध होने लगी थीं, जिससे उन्हें घर से ही तैयारी करने का मौका मिला।
उन्होंने बताया कि वे रोजाना लगभग दस से ग्यारह घंटे पढ़ाई करते थे। रात को दस से ग्यारह बजे के बीच सो जाते थे और सुबह जल्दी उठकर पूरे अनुशासन के साथ अपनी पढ़ाई करते थे। नितीश कुमार ने अपनी स्कूली शिक्षा गांव के राजकीय विद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने सीएल पब्लिक स्कूल से ग्यारहवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कृष्णा नगर के गवर्नमेंट कॉलेज से ग्रेजुएशन किया और बाद में नारनौल पीजी कॉलेज से हिंदी विषय में एमए किया।

पिता बोले- नितीश ने पूरी तैयारी घर से ही ऑनलाइन माध्यम से की
नितीश कुमार के पिता श्रद्धानंद ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी, लेकिन बेटे की पढ़ाई में उन्होंने कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने बताया कि नितीश ने पूरी तैयारी घर से ही ऑनलाइन माध्यम से की और कभी कोचिंग नहीं ली। उन्होंने कहा कि बेटे की दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के कारण आज यह सफलता मिली है।
आज नितीश कुमार की सफलता से पूरे गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। नितीश कुमार की यह उपलब्धि न केवल दिव्यांग युवाओं के लिए बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहता है।
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