Edited By Harman, Updated: 03 Aug, 2026 03:59 PM
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने 76 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए पहली बार अलग टाउन प्लानिंग नीति लागू की है। नई नीति का उद्देश्य छोटे शहरों में नियोजित, व्यवस्थित और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में...
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा के छोटे शहरों में वर्षों से विकास का एक ऐसा मॉडल चलता रहा, जिसमें पहले खेतों को काटकर प्लॉट बेचे गए, फिर कॉलोनियां बस गईं और उसके बाद सड़क, पेयजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। अनेक कॉलोनियां अवैध घोषित हुईं और समय-समय पर सरकारों को उन्हें नियमित करने के लिए विशेष नीतियां बनानी पड़ीं।
अब प्रदेश सरकार इस पूरी व्यवस्था को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार ने 76 नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के लिए पहली बार अलग टाउन प्लानिंग नीति लागू की है। नई नीति का उद्देश्य छोटे शहरों में नियोजित, व्यवस्थित और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में अवैध कॉलोनियों की समस्या पर शुरुआत में ही रोक लगाई जा सके।
छोटे शहरों के लिए पहली बार अलग प्लानिंग फ्रेमवर्क
अब तक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की लाइसेंस प्रणाली मुख्य रूप से नियंत्रित क्षेत्रों और बड़े शहरों तक सीमित थी। नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में स्पष्ट नियोजन व्यवस्था नहीं होने के कारण अनियोजित कॉलोनियों का तेजी से विस्तार होता रहा। नई नीति इस कमी को दूर करती है। अब इन 76 शहरी निकायों में कोई भी निजी डेवलपर सरकारी लाइसेंस के बिना कॉलोनी विकसित नहीं कर सकेगा। साथ ही, परियोजना को शुरुआत से ही निर्धारित शहरी मानकों के अनुरूप विकसित करना अनिवार्य होगा।
अब केवल प्लॉट बेचने से नहीं चलेगा काम
नई नीति में डेवलपर की जवाबदेही स्पष्ट रूप से तय की गई है। केवल भूमि के प्लॉट काटकर बेच देना पर्याप्त नहीं होगा। नई व्यवस्था के अनुसार, कॉलोनी विकसित करने के लिए कम से कम पांच एकड़ भूमि होना आवश्यक होगा। परियोजना तक 33 फुट चौड़ी सड़क से संपर्क अनिवार्य रहेगा। कॉलोनी के भीतर सभी सड़कें कम से कम 10 मीटर चौड़ी बनाई जाएंगी।पार्क, सार्वजनिक स्थल और अन्य सामुदायिक सुविधाएं स्वीकृत लेआउट के अनुसार पहले विकसित करनी होंगी।
पहले सुविधाएं, फिर आबादी
नई टाउन प्लानिंग नीति की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बुनियादी सुविधाओं को सीधे लाइसेंस प्रक्रिया से जोड़ दिया गया है।डेवलपर को पेयजल, सीवरेज, वर्षा जल निकासी, सड़क और अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं की व्यवस्था स्वयं सुनिश्चित करनी होगी। जहां जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की जलापूर्ति उपलब्ध होगी, वहां उससे कनेक्शन लिया जाएगा, जबकि अन्य स्थानों पर वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी। यदि किसी क्षेत्र में सीवर नेटवर्क उपलब्ध नहीं है तो डेवलपर को आवश्यक क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित करना भी अनिवार्य होगा। इससे अधूरी सुविधाओं वाली कॉलोनियों के विकास पर प्रभावी रोक लगेगी।
किफायती आवास को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति केवल नियोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए भी राहत लेकर आई है। इसके तहत कुल प्लॉटों में कम से कम 50 प्रतिशत प्लॉट 150 वर्गमीटर या उससे कम क्षेत्रफल के होंगे, ताकि आम परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध हो सके।परियोजना क्षेत्र का अधिकतम 65 प्रतिशत भाग आवासीय एवं व्यावसायिक उपयोग के लिए रखा जा सकेगा, जबकि व्यावसायिक गतिविधियों की सीमा पांच प्रतिशत निर्धारित की गई है।
लाइसेंस प्रक्रिया और शुल्क भी हुए स्पष्ट
नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों के लिए पहली बार लाइसेंस प्रक्रिया के साथ शुल्क व्यवस्था भी तय कर दी गई है। डेवलपर को 10 रुपये प्रति वर्गमीटर की स्क्रूटनी फीस,परिवर्तन शुल्क का 50 प्रतिशत,बाह्य विकास शुल्क (ईडीसी) का 25 प्रतिशत तथा टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की मौजूदा लाइसेंस दरों का 25 प्रतिशत शुल्क देना होगा। इससे पूरे प्रदेश में एक समान और पारदर्शी व्यवस्था लागू होगी।
छोटे शहरों के विकास का नया अध्याय
नई टाउन प्लानिंग नीति केवल नियमों में बदलाव नहीं, बल्कि छोटे शहरों के भविष्य के विकास का नया मॉडल है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ तो आने वाले वर्षों में अवैध कॉलोनियों की समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती है। साथ ही नागरिकों को शुरुआत से ही सड़क, पानी, सीवरेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित कॉलोनियां मिल सकेंगी।
क्या बोले मंत्री विपुल गोयल
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल ने कहा, "नई टाउन प्लानिंग नीति नगर परिषद और नगर पालिका क्षेत्रों में अनियोजित शहरी विकास पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम है। अब कॉलोनी विकास को स्पष्ट नियमों, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही से जोड़ा गया है। सड़क, पेयजल, सीवरेज और अन्य मूलभूत सुविधाओं के बिना कॉलोनियों के विकास को बढ़ावा नहीं मिलेगा। इससे किफायती आवास को प्रोत्साहन मिलेगा, अवैध कॉलोनियों की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और छोटे शहरों में नियोजित एवं टिकाऊ शहरी विकास का नया ढांचा तैयार होगा।"