Edited By Krishan Rana, Updated: 21 Jul, 2026 07:42 PM

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी मुकदमे के निपटारे के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने के निर्देश देना न तो उचित है और न ही आवश्यक। अदालत ने कहा कि देशभर की अदालतें पहले से ही भारी संख्या में लंबित मामलों का सामना कर रही हैं, ऐसे में प्रत्येक मामले के लिए समय-सीमा निर्धारित करना व्यावहारिक नहीं है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक न्यायालय का दायित्व है कि वह प्राथमिकता वाले और आवश्यक मामलों की सुनवाई यथासंभव शीघ्र पूरी करे, ताकि न्याय मिलने में अनावश्यक विलंब न हो।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम अग्रवाल की एकल पीठ ने गुरुग्राम के सदर थाना में वर्ष 2017 में दर्ज धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66-बी तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द करने संबंधी याचिका की सुनवाई के दौरान की।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित एफआईआर 21 अप्रैल 2017 को दर्ज हुई थी, जबकि मामले की अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2020 में पेश की गई। इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट में कई बार सुनवाई टलती रही, जिससे मुकदमे का निस्तारण लंबित है। याचिकाकर्ता के वकील ने आग्रह किया कि ट्रायल कोर्ट को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया जाए।
मामले पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने समय-सीमा निर्धारित करने से इनकार किया, लेकिन ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह सुनवाई को यथाशीघ्र पूरा करने के लिए गंभीर और ठोस प्रयास करे। अदालत ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते मामलों के दबाव के बावजूद न्यायालयों को लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
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