HSSC भर्ती पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जीवित मां वाले अभ्यर्थी को नहीं मिलेगा अनाथ श्रेणी का लाभ

Edited By Krishan Rana, Updated: 29 Jul, 2026 09:17 PM

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पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) की भर्ती प्रक्रिया में अनाथ अभ्यर्थियों को

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) की भर्ती प्रक्रिया में अनाथ अभ्यर्थियों को मिलने वाले पांच अंकों के वेटेज को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल पिता की मृत्यु होने से कोई अभ्यर्थी अनाथ नहीं माना जाएगा। अनाथ की श्रेणी में वही अभ्यर्थी आएगा जिसके दोनों माता-पिता का निधन हो चुका हो और विज्ञापन में निर्धारित अन्य शर्तें भी पूरी होती हों।

न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी और न्यायमूर्ति अमरिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ ने एचएसएससी की 51 लेटर पेटेंट अपीलें स्वीकार करते हुए 16 मई 2023 के सिंगल बेंच के फैसले को रद्द कर दिया। इसके साथ ही इस मुद्दे पर लंबित सभी रिट याचिकाएं भी खारिज कर दीं।

यह मामला वर्ष 2018 की हरियाणा पुलिस भर्ती से जुड़ा था, जिसमें विभिन्न श्रेणियों के पात्र अभ्यर्थियों को अतिरिक्त वेटेज देने का प्रावधान था। अनाथ और विधवा श्रेणी के अभ्यर्थियों को पांच अतिरिक्त अंक दिए जाने थे। कुछ अभ्यर्थियों ने तर्क दिया था कि यदि पिता का निधन हो चुका है और मां जीवित है, तब भी उन्हें अनाथ श्रेणी का लाभ मिलना चाहिए। सिंगल बेंच ने इस दलील को स्वीकार कर मेरिट सूची दोबारा तैयार करने का आदेश दिया था।

डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी नियम की व्याख्या वही मान्य होगी जो उसे बनाने वाले प्राधिकरण की मंशा के अनुरूप हो। अदालत अपने स्तर पर नई व्याख्या कर न्यायिक विधिनिर्माण नहीं कर सकती। खंडपीठ ने इस सिद्धांत के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया।

हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि ग्रुप-डी भर्ती के दौरान कुछ जिला चयन समितियों ने गलत व्याख्या करते हुए जीवित मां वाले अभ्यर्थियों को भी अनाथ मानकर पांच अंक दिए थे, लेकिन इसे राज्य सरकार की आधिकारिक नीति नहीं माना जा सकता।

अदालत ने हरियाणा डीसिज्ड गवर्नमेंट एम्प्लॉइज रूल्स, 2003 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें भी अनाथ की परिभाषा दोनों माता-पिता के निधन से जुड़ी है। इसलिए भर्ती विज्ञापन में प्रयुक्त 'अनाथ' शब्द का अर्थ भी इसी नीति के अनुरूप माना जाएगा।
खंडपीठ ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि भर्ती प्रक्रिया के दौरान किसी अपात्र अभ्यर्थी को पांच अंकों का लाभ दिया गया है तो एचएसएससी उसकी समीक्षा कर लाभ वापस लेने तथा वास्तविक पात्र अनाथ अभ्यर्थियों को उसका लाभ देने के लिए स्वतंत्र होगा।

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