अनिल विज की वर्षों की मेहनत रंग लाई, अंबाला का 700 करोड़ का शहीद स्मारक तैयार; अब PM मोदी के उद्घाटन का इंतजार

Edited By Krishan Rana, Updated: 22 Aug, 2026 07:51 PM

anil vij s years of hard work have paid off ambala s 700 crore martyrs  memori

हरियाणा में 1857 के विद्रोह के वीरों को समर्पित भव्य स्मारक बनकर तैयार है, लेकिन इसके दरवाजे

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा में 1857 के विद्रोह के वीरों को समर्पित भव्य स्मारक बनकर तैयार है, लेकिन इसके दरवाजे अभी आम जनता के लिए नहीं खुले हैं। राज्य सरकार अब इस परियोजना के उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंतजार कर रही है।
हरियाणा सरकार द्वारा ‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ को अपनी तरह का एशिया का सबसे बड़ा स्मारक बताया गया है। यह परियोजना राज्य के ऊर्जा मंत्री अनिल विज से भी गहराई से जुड़ी हुई है। विज लंबे समय से इस परियोजना को आगे बढ़ाने की पैरवी करते रहे हैं। यह स्मारक अंबाला कैंट में बनाया गया है, जो विज का विधानसभा क्षेत्र है। विज हरियाणा विधानसभा में अंबाला कैंट का सातवीं बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और राज्य भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल हैं।
अनिल विज ने कहा, “हम चाहते हैं कि शहीद स्मारक का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करें। इतने बड़े स्तर की परियोजना का उद्घाटन उनके जैसे बड़े नेता के हाथों होना चाहिए। उद्घाटन के बाद यह एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक होगा।”
अंबाला-दिल्ली जीटी रोड के किनारे करीब 22 एकड़ क्षेत्र में फैला यह स्मारक 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम को समर्पित है। मई में हरियाणा सरकार ने इसकी लागत करीब 700 करोड़ रुपये बताई थी। परिसर में बड़े स्तर की गैलरियां, आधुनिक तकनीक और ऐसे दृश्यात्मक इंस्टॉलेशन लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से 1857 के विद्रोह की घटनाओं, युद्धों और प्रमुख व्यक्तित्वों को प्रदर्शित किया गया है।
आधुनिक तकनीक के जरिए दिखाई जाएगी 1857 की कहानी
स्मारक के भीतर कहानी पारंपरिक प्रदर्शनियों से आगे बढ़ती है। यहां अंबाला, मेरठ, झांसी, कश्मीरी गेट सहित उन स्थानों से जुड़ी गैलरियां बनाई गई हैं, जिनका 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण योगदान रहा। रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे जैसे वीरों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।
एक विशेष श्रद्धांजलि क्षेत्र उन स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को समर्पित है, जिन्हें अधिकारियों के अनुसार पारंपरिक ऐतिहासिक विवरणों में पर्याप्त पहचान नहीं मिल सकी।
स्मारक में बाजारों, युद्धक्षेत्रों और जेल की कोठरियों के दृश्य दिखाए जाएंगे। इसके अलावा प्रोजेक्शन, जल एवं प्रकाश आधारित प्रस्तुतियां भी होंगी। हरियाणा सरकार के अनुसार परिसर में 210 फुट ऊंचा राष्ट्रीय ध्वज लगाने की योजना है, जो 206 फुट ऊंचे स्मारक टावर से भी अधिक ऊंचा होगा।
स्मारक की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार परिसर में 23 गैलरियां, 360 डिग्री इमर्सिव प्रोजेक्शन और ड्युअल-स्क्रीन वाटर शो मौजूद हैं। हालांकि, इससे पहले सरकार की ओर से जारी विवरणों में 22 थीम आधारित गैलरियों का उल्लेख किया गया था।अधिकारियों के अनुसार अब स्मारक औपचारिक उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।

कई मौकों पर टला उद्घाटन
अनिल विज को उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री मोदी नवंबर 2025 में कुरुक्षेत्र दौरे के दौरान इस स्मारक का उद्घाटन कर सकते हैं। उस समय प्रधानमंत्री गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस से जुड़े कार्यक्रम में शामिल हुए थे, लेकिन उस दौरान उद्घाटन नहीं हो सका।इसके बाद प्रधानमंत्री के 17 जुलाई 2026 को जींद दौरे के दौरान उद्घाटन की संभावना बनी। प्रधानमंत्री ने इस दौरे में देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी।

एक अधिकारी के अनुसार, “जून में ही हमें प्रधानमंत्री के 17 जुलाई को जींद दौरे के दौरान अंबाला आने की संभावना को देखते हुए तैयार रहने के लिए कहा गया था।” हालांकि इस अवसर पर भी स्मारक का उद्घाटन नहीं हुआ।
शहीद स्मारक के निदेशक डॉ. कुलदीप सैनी ने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के माध्यम से प्रधानमंत्री को स्मारक के उद्घाटन के लिए अनुरोध भेजा जा चुका है।

अनिल विज ने कहा कि मुख्यमंत्री विधानसभा में पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री जल्द ही स्मारक का उद्घाटन करेंगे।21 मई को डॉ. कुलदीप सैनी ने स्मारक का निरीक्षण किया था और अधिकारियों को बचे हुए कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए थे।

अनिल विज के लिए राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व
अनिल विज के लिए यह स्मारक केवल एक सरकारी निर्माण परियोजना नहीं है। वह पिछले कई दशकों से हरियाणा विधानसभा में अंबाला के 1857 के विद्रोह से जुड़े योगदान को उठाते रहे हैं और अंबाला कैंट में एक बड़े स्मारक की स्थापना की मांग करते रहे हैं।
इसी वजह से यह परियोजना उनके राजनीतिक गढ़ में उनकी सबसे प्रमुख पहलों में शामिल हो गई है।
परियोजना का आकार और लागत भी निर्माण के दौरान काफी बढ़ी। वर्ष 2022 में इसके निर्माण की अनुमानित लागत करीब 261 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि मौजूदा सरकारी अनुमान के अनुसार इसकी लागत बढ़कर 700 करोड़ रुपये हो गई है।
स्मारक के उद्घाटन में हो रही देरी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा है। अनिल विज भाजपा के वरिष्ठ निर्वाचित नेताओं में शामिल हैं और अंबाला कैंट से सात बार विधायक रह चुके हैं। स्मारक से उनके लंबे जुड़ाव के कारण यह परियोजना उनके नाम के साथ मजबूती से जुड़ी हुई है। सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस परियोजना का उद्घाटन होने से विज का पार्टी में राजनीतिक कद और मजबूत हो सकता है।

1857 की पहली चिंगारी अंबाला से उठने का दावा
स्मारक में यह दावा प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है कि 1857 के विद्रोह की पहली चिंगारी मेरठ में विद्रोह शुरू होने से कुछ घंटे पहले अंबाला कैंट में भड़की थी। हरियाणा के राजनीतिक नेता इस दावे को कई बार उठा चुके हैं और स्मारक की पूरी कथा में भी इसे प्रमुख स्थान दिया गया है।
9 जून 2026 को स्मारक के दौरे के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने प्रदर्शित दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि अब तक वह इतिहास की पुस्तकों में लिखी बातों को ही सही मानते थे, लेकिन यहां प्रदर्शित ब्रिटिश दस्तावेजों और टेलीग्राम को देखने के बाद यह स्पष्ट होता है कि 10 मई 1857 की सुबह 9 बजे अंबाला कैंट में विद्रोह की चिंगारी भड़की थी।वर्मा ने कहा कि ऐसे साक्ष्यों को इतिहास में उचित स्थान मिलना चाहिए और इन्हें ऐतिहासिक अभिलेखों में शामिल किया जाना चाहिए।
प्रदर्शित दस्तावेजों में 10 मई 1857 का एक इलेक्ट्रिक टेलीग्राफ संदेश भी शामिल है। इसमें तत्कालीन अंबाला उपायुक्त ने पंजाब के मुख्य आयुक्त सर जॉन लॉरेंस को सूचना दी थी कि 60वीं और 5वीं रेजिमेंट के सैनिक “उत्तेजित अवस्था में हैं और अपने परेड ग्राउंड में हथियारों के साथ मौजूद हैं।”
हालांकि, 1857 की पहली चिंगारी अंबाला से उठने का दावा सर्वमान्य ऐतिहासिक तथ्य नहीं है। पारंपरिक इतिहास में 10 मई 1857 को मेरठ से विद्रोह की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद विद्रोह तेजी से दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में फैल गया था।
 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!