हरियाणा की जेलों में बदली सोच; सुरक्षा के साथ सुधार और पुनर्वास पर जोर...बंदियों को रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन के लिए तैयार करने की कवायद

Edited By Krishan Rana, Updated: 30 Aug, 2026 02:36 PM

a shift in mindset within haryana s prisons emphasis on rehabilitation and refo

हरियाणा की जेल व्यवस्था अब केवल बंदियों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं रह

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा की जेल व्यवस्था अब केवल बंदियों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश में जेल प्रशासन ने सुरक्षा के साथ-साथ सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास को भी अपनी कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बनाया है। आधुनिक निगरानी तकनीक, नई हाई सिक्योरिटी जेलों का निर्माण, ओपन और सेमी-ओपन जेलों की व्यवस्था, तकनीकी प्रशिक्षण, जेल उत्पादों की बिक्री और रिहाई के बाद रोजगार से जोड़ने की पहल के जरिए बंदियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने की कोशिश की जा रही है।

प्रदेश में फिलहाल तीन केंद्रीय जेल, 17 जिला जेल और दो ओपन एयर जेल हैं। इनकी अधिकृत क्षमता 24,280 बंदियों की है, जबकि एक अगस्त 2026 तक जेलों में 26,860 बंदी निरुद्ध थे। यानी जेलों में निर्धारित क्षमता से अधिक बंदी मौजूद हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार नई जेलों के निर्माण के साथ मौजूदा जेलों की क्षमता और सुविधाओं को बढ़ाने पर भी काम कर रही है।

रोहतक में हाई सिक्योरिटी जेल, कई जिलों में नई जेलों की तैयारी
जेलों में बढ़ती क्षमता और सुरक्षा संबंधी जरूरतों को देखते हुए नई जेल परियोजनाओं पर काम तेज किया गया है। रोहतक में करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से 312 बंदियों की क्षमता वाली हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण चल रहा है।
इसके अलावा फतेहाबाद में 1,200 बंदियों की क्षमता वाली नई जिला जेल बनाई जा रही है। चरखी-दादरी में 1,200 और पंचकूला में 954 बंदियों की क्षमता वाली नई जिला जेलों के निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
सरकार का फोकस केवल नई इमारतें खड़ी करने तक नहीं है, बल्कि मौजूदा जेलों की सुरक्षा प्रणाली को भी तकनीकी रूप से मजबूत किया जा रहा है।

कॉल ब्लॉकिंग और डिजिटल निगरानी से सुरक्षा का विस्तार
केंद्रीय जेल अंबाला में अत्याधुनिक कॉल ब्लॉकिंग प्रणाली स्थापित की गई है। इसके अलावा केंद्रीय जेल हिसार के साथ फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल और सिरसा की जेलों में आधुनिक निगरानी तकनीक स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 9.16 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

बंदियों और अपराधियों का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए माप संग्रहण इकाइयां भी स्थापित की जा रही हैं। इनमें फिंगरप्रिंट, चेहरे की पहचान, डीएनए नमूने और रेटिना स्कैन जैसी जानकारियां दर्ज की जा रही हैं। इससे जेलों की निगरानी के साथ आपराधिक मामलों की जांच में भी तकनीक के इस्तेमाल को मजबूती मिलेगी।

ओपन जेल मॉडल से जिम्मेदारी का अभ्यास
जेल सुधार की दिशा में ओपन एयर जेल मॉडल को महत्वपूर्ण प्रयोग माना जा रहा है। फरीदाबाद और करनाल में ओपन एयर जेल स्थापित हैं, जहां बेहतर आचरण वाले बंदियों को परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जा रहा है। वर्तमान में दोनों जेलों में 48 बंदी परिवार के साथ रह रहे हैं।

इसके अलावा पलवल को छोड़कर प्रदेश की सभी जेलों में सेमी-ओपन एयर जेल की व्यवस्था की गई है। इनकी कुल क्षमता 487 बंदियों की है, जबकि 178 बंदियों को इनमें रहने की अनुमति दी गई है।
इस मॉडल के पीछे सोच यह है कि अच्छे आचरण वाले बंदियों को नियंत्रित वातावरण में अधिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का अनुभव कराया जाए, ताकि रिहाई के बाद सामान्य जीवन में लौटना उनके लिए आसान हो।

जेल में प्रशिक्षण, बाहर रोजगार की तैयारी
बंदियों के पुनर्वास का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन्हें रोजगार योग्य बनाना है। इसी उद्देश्य से पांच जेलों में आईटीआई केंद्र स्थापित किए गए हैं। यहां 12 ट्रेडों में औद्योगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है और 255 बंदी प्रशिक्षण के लिए पंजीकृत हैं।
गुरुग्राम जिला जेल में तकनीकी डिप्लोमा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है। प्रशिक्षण के बाद रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है।

अब तक 117 प्रशिक्षित बंदियों का एचकेआरएनएल पोर्टल पर पंजीकरण किया जा चुका है। इसका उद्देश्य जेल से बाहर निकलने के बाद बंदियों के सामने रोजगार का संकट कम करना और उन्हें दोबारा अपराध की दुनिया में जाने से रोकने के लिए आर्थिक आधार उपलब्ध कराना है।

जेल में बना सामान अब बाजार में, बढ़ रही बिक्री
जेलों की कार्यशालाएं भी सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया का हिस्सा बन गई हैं। बंदियों द्वारा तैयार फर्नीचर, हस्तशिल्प, कपड़े, खाद्य सामग्री और सजावटी सामान को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले और गीता जयंती महोत्सव जैसे बड़े आयोजनों में जेल उत्पादों के स्टॉल लगाए गए हैं। पिछले वर्ष जेलों में तैयार उत्पादों की 1.76 करोड़ रुपये की बिक्री हुई थी। चालू वर्ष में अब तक 1.52 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की जा चुकी है।
काम के बदले मिलने वाला अनुभव और आय बंदियों में आत्मविश्वास पैदा करने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद कर रही है।

जेलों के पेट्रोल पंप भी बने आय और प्रशिक्षण का माध्यम
जेल प्रशासन ने पेट्रोल पंप और सीएनजी फिलिंग स्टेशन के संचालन को भी सुधारात्मक गतिविधियों से जोड़ा है। कुरुक्षेत्र जिला जेल में स्थापित पेट्रोल पंप की सफलता के बाद अंबाला, हिसार, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, फरीदाबाद, नूंह और सिरसा सहित अन्य जेलों में भी पेट्रोल पंप संचालित किए जा रहे हैं।
कुरुक्षेत्र जेल के पेट्रोल पंप ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 54 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की। इस तरह जेल परिसर में संचालित व्यावसायिक गतिविधियां एक तरफ विभाग को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ बंदियों के लिए काम सीखने और जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी उपलब्ध करा रही हैं।

85 फीसदी पेशियां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से
न्यायिक प्रक्रिया को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का नेटवर्क भी मजबूत किया गया है। प्रदेश की जेलों में 453 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्रणालियां स्थापित की गई हैं।
वर्तमान में करीब 85 प्रतिशत बंदियों की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई जा रही है। इससे बंदियों को अदालतों तक ले जाने के दौरान सुरक्षा जोखिम कम होते हैं। साथ ही पुलिस बल, वाहन और समय की बचत भी होती है।

14 जेलों में जेल रेडियो से सकारात्मक माहौल
बंदियों के मानसिक और सामाजिक सुधार के लिए प्रदेश की 14 जेलों में जेल रेडियो स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं। रेडियो के जरिए बंदियों को सकारात्मक, रचनात्मक और जागरूकता आधारित कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कैथल, भिवानी, सिरसा, झज्जर, नारनौल और रेवाड़ी की जेलों में भी जेल रेडियो स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है। इसका उद्देश्य जेल के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ाने के साथ बंदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है।

जेल मंत्री बोले- सजा के साथ सुधार भी जरूरी
जेल मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा के मुताबिक सरकार की प्राथमिकता जेलों को केवल दंड देने वाली व्यवस्था के रूप में संचालित करना नहीं, बल्कि बंदियों को सुधारकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाना है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन में प्रदेश की जेलों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ सुधार, कौशल विकास और पुनर्वास पर भी लगातार काम किया जा रहा है। बंदियों को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने और रिहाई के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आर्थिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रयास जारी हैं।

सुरक्षा से आगे बढ़कर पुनर्वास की नीति
हरियाणा की जेल व्यवस्था में हो रहे बदलाव का सबसे बड़ा पहलू यह है कि अब जेल प्रशासन की सफलता को केवल सुरक्षा और बंदियों की निगरानी के पैमाने पर नहीं देखा जा रहा। नई जेलों और तकनीकी सुरक्षा के साथ ओपन जेल, कौशल प्रशिक्षण, जेल उत्पादों की बिक्री, रोजगार से जुड़ाव, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और जेल रेडियो जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि सरकार बंदियों को सुधारकर दोबारा समाज का हिस्सा बनाने की दिशा में व्यापक मॉडल विकसित कर रही है।

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