Edited By Isha, Updated: 29 Aug, 2026 06:09 PM
हरियाणा की जेलों में सुरक्षा, बंदियों की निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक स्टाफ की भारी कमी सामने आई है। जेल विभाग में कुल 4,948 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 2,380 पद खाली पड़े हैं।
चंडीगढ़( चंद्र शेखर धरणी): हरियाणा की जेलों में सुरक्षा, बंदियों की निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक स्टाफ की भारी कमी सामने आई है। जेल विभाग में कुल 4,948 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 2,380 पद खाली पड़े हैं। यानी करीब 48 फीसदी पदों पर नियुक्तियां नहीं हुई हैं। वर्तमान में केवल 2,568 कर्मचारी ही विभाग में कार्यरत हैं।
मुलाना विधायक पूजा द्वारा विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विभाग में स्वीकृत और कार्यरत पदों का ब्यौरा दिया। आंकड़े बताते हैं कि जेल विभाग में सबसे गंभीर स्थिति ग्रुप-सी के पदों की है, जहां हजारों पद खाली हैं। इसके अलावा जेलों की सुरक्षा की रीढ़ माने जाने वाले वार्डर और महिला वार्डर के पदों में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं।
ग्रुप-सी में सबसे बड़ा संकट, 2,045 पद खाली
जेल विभाग में ग्रुप-सी के कुल 4,322 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 2,045 पद रिक्त हैं। इस श्रेणी में केवल 2,277 कर्मचारी कार्यरत हैं। ग्रुप-डी में भी 458 स्वीकृत पदों में से 260 खाली हैं और केवल 198 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं ग्रुप-ए के 98 पदों में 67 और ग्रुप-बी के 70 पदों में आठ पद रिक्त हैं। इस तरह विभाग के लगभग हर स्तर पर मानव संसाधन की कमी बनी हुई है।
जेल सुरक्षा की रीढ़ वार्डर कैडर में भी भारी कमी
जेलों की सुरक्षा और बंदियों की निगरानी का सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा वार्डर कैडर पर होता है। लेकिन इसी कैडर में बड़ी संख्या में पद खाली हैं।
विभाग में 3,010 वार्डर के पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 1,583 वार्डर कार्यरत हैं। यानी 1,427 पद खाली हैं। इसी तरह 179 महिला वार्डर के स्वीकृत पदों में सिर्फ 63 कर्मचारी कार्यरत हैं और 116 पद रिक्त हैं।
हेड वार्डर के 366 पदों में 44 और महिला हेड वार्डर के 63 पदों में छह पद खाली हैं। सिर्फ वार्डर और महिला वार्डर के पदों को मिलाकर 1,543 रिक्तियां सामने आती हैं। ऐसे में जेलों में बंदियों की निगरानी, सुरक्षा व्यवस्था और दैनिक संचालन पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ना स्वाभाविक है।
मेडिकल सेवाओं पर भी संकट, 51 में से 49 मेडिकल अफसर पद खाली
जेलों में बंद बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैनात मेडिकल स्टाफ की स्थिति भी चिंताजनक है। विभाग में 37 पुरुष मेडिकल अफसरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल तीन पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं। 34 पद खाली हैं। महिला मेडिकल अफसरों के मामले में स्थिति और गंभीर है। 18 स्वीकृत पदों में केवल एक कर्मचारी कार्यरत है और 17 पद रिक्त हैं। यानी कुल 55 स्वीकृत पुरुष-महिला मेडिकल अफसर पदों में से 51 नहीं, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 51 पद रिक्त हैं? [सुधार: 37+18=55; 3+1=4 कार्यरत, इसलिए 51 पद रिक्त हैं।
इसके अलावा सात डर्मेटोलॉजिस्ट, चार साइकियाट्रिस्ट और दो साइकियाट्रिस्ट/मेडिकल अफसर के स्वीकृत पदों में एक भी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। इससे स्पष्ट है कि जेलों में सामान्य चिकित्सा के साथ विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की भी कमी बनी हुई है।
फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और नर्सों के पद भी खाली
स्वास्थ्य विभाग की कमी केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। जेल विभाग में 42 फार्मासिस्ट के पदों में 35, 20 लैब टेक्नीशियन में 19 और 18 रेडियोग्राफर में 17 पद खाली हैं। इसके अलावा 18 ईसीजी टेक्नीशियन के सभी पद रिक्त हैं। 17 महिला नर्सों के स्वीकृत पदों में से 16 खाली हैं। ऐसे में जेलों में नियमित स्वास्थ्य जांच, जांच रिपोर्ट, दवाओं की उपलब्धता और अन्य चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ने की स्थिति बन रही है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में भी बड़ा खालीपन
बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास से जुड़े पदों की स्थिति भी गंभीर है। विभाग में क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के सभी 21 पद खाली हैं। इसी तरह 20 साइकियाट्रिक सोशल वर्कर के सभी पद रिक्त हैं। सोशल वर्कर/काउंसलर के छह स्वीकृत पदों में भी कोई कर्मचारी कार्यरत नहीं है। इसके अलावा साइकियाट्रिक सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ पद भी खाली हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव, व्यवहार संबंधी समस्याओं और पुनर्वास से जुड़े मामलों में विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।
प्रशासनिक और तकनीकी पदों पर भी रिक्तियां
जेल विभाग में केवल सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ही स्टाफ संकट से नहीं जूझ रही हैं। प्रशासनिक और तकनीकी पदों पर भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं।
क्लर्क के 100 स्वीकृत पदों में 46 खाली हैं। असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 107 पदों में 57 और सब-असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट जेल के 91 पदों में 26 पद रिक्त हैं।
तकनीकी श्रेणी में इलेक्ट्रिशियन के 23 पदों में 16, कारपेंटर मास्टर के 11 में आठ, लेदर मास्टर के छह में पांच और वीविंग मास्टर के आठ में सात पद खाली हैं। टेलर मास्टर के सभी आठ पद भी रिक्त हैं।
ग्रुप-डी में भी 260 पद खाली
ग्रुप-डी के 458 स्वीकृत पदों में केवल 198 कर्मचारी कार्यरत हैं और 260 पद खाली हैं। इस श्रेणी में सफाई व्यवस्था से जुड़े पदों की भी बड़ी कमी है।
स्वीपर के 333 पदों में 230 पद रिक्त हैं। कुक के 56 पदों में 24 खाली हैं, जबकि जमादार का एकमात्र स्वीकृत पद भी खाली पड़ा है। जेलों में साफ-सफाई, भोजन और दैनिक व्यवस्था के लिए इन कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
सरकार ने शुरू की भर्ती प्रक्रिया
जेल मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने विधानसभा में बताया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पहले से जारी है। सरकार की ओर से संबंधित भर्ती एजेंसियों को पदों के लिए मांग-पत्र भेजे जा चुके हैं और रिक्तियों को चरणबद्ध तरीके से जल्द भरने की प्रक्रिया चल रही है।
मंत्री के अनुसार 1,039 पुरुष वार्डर और 112 महिला वार्डर की नई भर्ती के लिए हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को 24 नवंबर 2025 को रिक्विजिशन भेजी गई थी। इन पदों के लिए फिजिकल मेजरमेंट टेस्ट पूरा हो चुका है, जबकि फिजिकल स्क्रीनिंग टेस्ट आगे होना है।
सरकार के इस भर्ती प्रयास से जेल सुरक्षा में खाली पदों को भरने की उम्मीद है। हालांकि विधानसभा में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि जेल विभाग की जरूरत केवल वार्डरों की भर्ती तक सीमित नहीं है। मेडिकल, मानसिक स्वास्थ्य, प्रशासनिक और तकनीकी सेवाओं में भी बड़ी संख्या में पदों को भरना जरूरी है, तभी जेलों में सुरक्षा के साथ बंदियों की निगरानी, स्वास्थ्य और पुनर्वास व्यवस्था को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।