1,289 शिकायतें अब भी लंबित, हरियाणा लोकायुक्त की रिपोर्ट ने खोली प्रशासनिक जवाबदेही की पोल, पुलिस और राजस्व विभाग भी सवालों के घेरे में

Edited By Krishan Rana, Updated: 28 Aug, 2026 07:20 PM

1 289 complaints remain pending haryana lokayukta report exposes the state of a

हरियाणा में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था को लेकर हरियाणा लोकायुक्त की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा में भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था को लेकर हरियाणा लोकायुक्त की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट ने गंभीर तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट के अनुसार 31 मार्च 2026 तक लोकायुक्त के समक्ष 1,289 शिकायतें लंबित थीं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें विकास एवं पंचायत, पुलिस और राजस्व विभाग से संबंधित हैं।

 ये आंकड़े इस बात की ओर संकेत करते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों के समाधान और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

विकास एवं पंचायत विभाग की 450 शिकायतें लंबित
लोकायुक्त के समक्ष लंबित कुल 1,289 शिकायतों में 450 शिकायतें विकास एवं पंचायत विभाग से संबंधित हैं। यह कुल लंबित मामलों का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके बाद पुलिस विभाग की 250 और राजस्व विभाग की 189 शिकायतें लंबित पाई गईं।
इसके अलावा शिक्षा विभाग से संबंधित 100 शिकायतें, जबकि शहरी स्थानीय निकाय विभाग से जुड़ी 66 शिकायतें भी लंबित थीं। आंकड़े बताते हैं कि जिन विभागों का आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन और स्थानीय प्रशासन से सीधा संबंध है, उन्हीं के खिलाफ बड़ी संख्या में शिकायतें लोकायुक्त के समक्ष पहुंच रही हैं।

FIR से लेकर रिश्वत तक, पुलिस पर गंभीर आरोप
लोकायुक्त की रिपोर्ट में पुलिस विभाग के खिलाफ आने वाली शिकायतों की प्रकृति भी चिंता पैदा करती है। शिकायतों में एफआईआर दर्ज नहीं करने, जांच में पक्षपात, रिश्वत मांगने और प्रभावशाली विरोधियों के इशारे पर झूठे मामलों में फंसाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

पुलिस व्यवस्था को कानून-व्यवस्था और नागरिकों को न्याय दिलाने की पहली कड़ी माना जाता है। ऐसे में एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी या जांच में पक्षपात के आरोप सीधे तौर पर पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर सवाल खड़े करते हैं। लोकायुक्त ने अधिक शिकायतों वाले विभागों पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत बताई है।

राजस्व विभाग में जमीन के रिकॉर्ड और देरी बनी समस्या
राजस्व विभाग से संबंधित शिकायतों में भी कई गंभीर मुद्दे सामने आए हैं। इनमें भूमि रिकॉर्ड में अनियमितता, राजस्व कार्यालयों में अनधिकृत व्यक्तियों के काम करने, रिश्वत की मांग, उत्पीड़न और मामलों के निपटारे में अत्यधिक देरी जैसे आरोप शामिल हैं।
जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में राजस्व विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में लंबे समय तक निर्णय नहीं होने से लोगों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लोकायुक्त की रिपोर्ट ने इस व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

170 मामलों में सरकार से एक्शन टेकन रिपोर्ट का इंतजार
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर पहलू लोकायुक्त की सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2017 से 2025 के बीच सरकार को सिफारिश भेजे गए 170 मामलों में अब तक Action Taken Report यानी कार्रवाई की रिपोर्ट लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई थी।

नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी को लोकायुक्त की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की जानकारी निर्धारित अवधि में उपलब्ध करानी होती है। इसके बावजूद अनेक मामलों में रिपोर्ट समय पर नहीं दी गई। कुछ मामलों में कार्रवाई की रिपोर्ट अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे यह सवाल उठता है कि लोकायुक्त जैसी संवैधानिक संस्था की सिफारिशों पर प्रशासनिक स्तर पर कितनी गंभीरता से अमल हो रहा है।

एक साल में 539 नई शिकायतें पहुंचीं
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच लोकायुक्त को कुल 539 नई शिकायतें प्राप्त हुईं। इसी अवधि में लोकायुक्त के प्रयासों से सरकारी धन के दुरुपयोग और गबन से संबंधित मामलों में 28,17,065 रुपये की वसूली भी कराई गई।
यह पहलू बताता है कि लोकायुक्त की संस्था शिकायतों की जांच के साथ-साथ सरकारी धन की सुरक्षा और उसकी वसूली में भी भूमिका निभा रही है।

भिवानी में सबसे ज्यादा नई शिकायतें
जिलेवार आंकड़ों में भिवानी 73 नई शिकायतों के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद पानीपत में 43 और रेवाड़ी में 39 नई शिकायतें दर्ज हुईं। इससे स्पष्ट है कि शिकायतों का दबाव केवल प्रदेश के किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न जिलों में नागरिक प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर लोकायुक्त का दरवाजा खटखटा रहे हैं।

दक्षिण हरियाणा के सात जिलों की 312 शिकायतें लंबित
लोकायुक्त की रिपोर्ट में शिकायतकर्ताओं की पहुंच से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया गया है। फरीदाबाद, गुरुग्राम, रेवाड़ी, पलवल, नूंह, महेंद्रगढ़ और झज्जर से संबंधित कुल 312 शिकायतें लंबित थीं।
इन जिलों के शिकायतकर्ताओं और संबंधित अधिकारियों को सुनवाई के लिए चंडीगढ़ आना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त लागत आती है। इस समस्या को देखते हुए लोकायुक्त ने गुरुग्राम में क्षेत्रीय लोकायुक्त कैंप कोर्ट अथवा कार्यालय स्थापित करने की सिफारिश की है।

सिर्फ शिकायतों का निपटारा नहीं, जवाबदेही तय करना भी जरूरी
लोकायुक्त की वार्षिक रिपोर्ट का व्यापक संदेश यही है कि प्रशासनिक व्यवस्था में शिकायतों का केवल निपटारा पर्याप्त नहीं है, बल्कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान और उनके खिलाफ उचित विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

रिपोर्ट में अधिक शिकायतों वाले विभागों पर विशेष निगरानी की जरूरत बताई गई है। साथ ही लोकायुक्त की सिफारिशों पर समयबद्ध कार्रवाई और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने की व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
1,289 लंबित शिकायतें और 170 मामलों में कार्रवाई रिपोर्ट का अभाव प्रशासनिक जवाबदेही के सामने दो अलग लेकिन जुड़े हुए सवाल खड़े करता है।

एक तरफ आम नागरिक शिकायतों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर लोकायुक्त की सिफारिशों पर सरकारी तंत्र की प्रतिक्रिया में देरी दिखाई दे रही है। ऐसे में रिपोर्ट हरियाणा में पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में गंभीर आत्ममंथन की जरूरत को सामने रखती है।
 

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