Edited By Krishan Rana, Updated: 31 Aug, 2026 09:28 PM
हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे पर
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस दिए जाने के मुद्दे पर सरकार का रुख सदन में पूरी तरह स्पष्ट कर दिया। बिजली विभाग के इंजीनियरों, कर्मचारियों और संयुक्त मोर्चा से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार खड़े रहने का भरोसा देते रहे विज ने विधानसभा में भी उसी रुख को दोहराया।
उन्होंने साफ कहा कि राज्य सरकार पहले भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का विरोध कर चुकी है और अब विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद भी विरोध कर रही है तथा आगे भी करती रहेगी।
विज का यह बयान ऐसे समय आया है जब गुरुग्राम-नूंह क्षेत्र में बिजली वितरण को लेकर निजी क्षेत्र की संभावित भूमिका को लेकर बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर संगठनों में चिंता बनी हुई है। विधानसभा में सवाल के दौरान उठे इस मुद्दे पर ऊर्जा मंत्री ने सरकार की स्थिति को विस्तार से सामने रखते हुए यह भी संकेत दिया कि मामला जरूरत पड़ने पर उच्चतर न्यायालयों तक ले जाने में सरकार पीछे नहीं हटेगी।
कर्मचारियों से किए वादे को सदन में भी निभाया
ऊर्जा मंत्री अनिल विज पिछले दिनों बिजली विभाग के इंजीनियरों और कर्मचारी संगठनों से बातचीत के दौरान यह भरोसा देते रहे हैं कि गुरुग्राम-नूंह में बिजली वितरण को निजी हाथों में देने से जुड़े हर पहलू पर वह उनके साथ खड़े हैं। विधानसभा में उनका ताजा बयान इसी भरोसे की राजनीतिक और प्रशासनिक निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
विज ने केवल राजनीतिक बयान देने के बजाय यह स्पष्ट किया कि जब हरियाणा बिजली नियामक आयोग ने राज्य सरकार से अपना पक्ष मांगा था, तब उन्होंने और उनके पूरे स्टाफ ने हर बिंदु पर समानांतर लाइसेंस का विरोध किया। यानी सरकार की आपत्ति किसी एक स्तर तक सीमित नहीं रही, बल्कि नियामकीय प्रक्रिया के दौरान भी सरकार ने अपना पक्ष लगातार रखा।
यह पहलू बिजली कर्मचारियों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि समानांतर लाइसेंस को लेकर उनका मुख्य सवाल बिजली वितरण व्यवस्था, मौजूदा सरकारी बिजली कंपनियों की भूमिका और कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में ऊर्जा मंत्री का सदन में खुलकर विरोध दर्ज कराना कर्मचारियों के बीच सरकार के रुख को लेकर स्पष्ट संदेश देता है।
HERC स्वायत्त संस्था, लेकिन सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से रखा
अनिल विज ने सदन में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और नियामकीय पहलू भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा बिजली नियामक आयोग यानी एचईआरसी केंद्र सरकार के कानून के तहत गठित एक स्वायत्त संस्था है। बिजली वितरण के संबंध में लाइसेंस जारी करने का अधिकार आयोग के पास है।
यही वजह है कि इस पूरे मामले में सरकार की भूमिका सीधे लाइसेंस जारी करने या रोकने वाली संस्था की नहीं है। लेकिन राज्य सरकार को जब आयोग की ओर से इस संबंध में जवाब देने के लिए कहा गया तो ऊर्जा विभाग ने अपना विरोध दर्ज कराया।
विज ने स्पष्ट किया कि उन्होंने और उनके पूरे स्टाफ ने हर बिंदु पर सरकार की आपत्ति आयोग के सामने रखी। इससे यह संदेश गया कि सरकार नियामकीय प्रक्रिया का सम्मान करते हुए अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर समानांतर वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव का विरोध कर रही है।
ओपन हियरिंग में भी सरकार ने रखा विरोध
ऊर्जा मंत्री ने सदन को बताया कि इस मामले में ओपन हियरिंग भी आयोजित की गई थी। इसमें विभिन्न हितधारकों को अपनी बात रखने का अवसर मिला। राज्य सरकार ने भी इस प्रक्रिया में भाग लेते हुए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने का विरोध किया।
इसके बाद आयोग ने इस पूरे विषय पर विचार के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया। विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में बिजली वितरण को समानांतर रूप से किए जाने की संभावना के पक्ष में सिफारिश की।
यहीं से मामला सरकार के लिए एक नए चरण में पहुंच गया। विशेषज्ञ समिति की सिफारिश सामने आने के बाद भी ऊर्जा मंत्री ने सरकार के रुख में बदलाव नहीं किया।
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के हर बिंदु पर आपत्ति
अनिल विज ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने रिपोर्ट के प्रत्येक बिंदु पर अपना विरोध दर्ज कराया है। सरकार की ओर से अपना जवाब भी भेज दिया गया है। यह स्थिति बताती है कि सरकार ने विशेषज्ञ समिति की सिफारिश को अंतिम निर्णय के रूप में स्वीकार नहीं किया है। सरकार ने नियामकीय प्रक्रिया के भीतर रहते हुए अपनी आपत्तियों को रिकॉर्ड पर रखा है।
विज के इस रुख का राजनीतिक महत्व भी है। एक ओर नियामक आयोग को कानून के तहत स्वायत्त संस्था बताते हुए उसकी प्रक्रिया का सम्मान किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार अपने प्रशासनिक और नीतिगत मत को स्पष्ट रूप से उसके सामने रख रही है।
3 सितंबर की सुनवाई पर टिकी निगाहें
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि 3 सितंबर को इस मामले में सुनवाई निर्धारित है। इससे पहले उन्होंने एक महत्वपूर्ण मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि इस विषय से जुड़े सभी हितधारक रिपोर्ट का अध्ययन कर अपनी राय रख सकें।
रिपोर्ट सार्वजनिक होने की मांग का सीधा संबंध पारदर्शिता से है। बिजली विभाग के कर्मचारी संगठन, इंजीनियर, उपभोक्ता और अन्य हितधारक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को जानना चाहते हैं। ऐसे में रिपोर्ट सार्वजनिक होने से बहस का आधार अधिक स्पष्ट हो सकता है। विज का जोर इस बात पर है कि संबंधित पक्षों को अपनी राय रखने का अवसर मिलना चाहिए। इससे सरकार के विरोध को भी व्यापक सार्वजनिक और तकनीकी विमर्श का आधार मिल सकता है।
जरूरत पड़ी तो अदालत का दरवाजा खटखटाएगी सरकार
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश अनिल विज का यह बयान है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो सरकार उच्चतर अदालतों में भी जाएगी।
यानी सरकार ने फिलहाल अपना विरोध नियामक प्रक्रिया के स्तर पर रखा है, लेकिन यदि निर्णय उसके पक्ष में नहीं आता तो कानूनी विकल्प खुले रखने के संकेत भी ऊर्जा मंत्री ने दिए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि गुरुग्राम-नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का मुद्दा सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों के बीच महज विभागीय विषय नहीं रह गया है, बल्कि अब यह नियामकीय और संभावित न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच चुका है।
विज की भूमिका पर कर्मचारियों की नजर
बिजली विभाग के कर्मचारी और इंजीनियर संगठन लंबे समय से इस मुद्दे को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखते रहे हैं। ऐसे में ऊर्जा मंत्री अनिल विज का लगातार उनके पक्ष में खड़ा होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खास तौर पर विधानसभा में दिया गया बयान कर्मचारियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि उन्होंने सदन के पटल पर सरकार की स्थिति को रिकॉर्ड पर रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार पहले भी विरोध कर चुकी है, अब भी विरोध कर रही है और आगे भी विरोध करेगी।
राजनीतिक तौर पर देखें तो विज ने इस मुद्दे को सरकार बनाम कर्मचारी के टकराव के रूप में सामने आने देने के बजाय इसे नियामकीय प्रक्रिया के भीतर सरकार के पक्ष की लड़ाई के तौर पर प्रस्तुत किया है। इससे कर्मचारियों को भी यह संदेश गया है कि उनकी आपत्तियों को सरकार ने नजरअंदाज नहीं किया है।
आगे की लड़ाई नियामक मंच से अदालत तक संभव
अब 3 सितंबर की सुनवाई इस मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट, सरकार की आपत्तियां और अन्य हितधारकों के तर्क इस सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अनिल विज ने जिस तरह विधानसभा में सरकार की स्थिति स्पष्ट की है, उससे यह साफ है कि गुरुग्राम-नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकार विशेषज्ञ समिति की सिफारिश से सहमत नहीं है और अपने विरोध को आगे भी जारी रखने के लिए तैयार है।
इस पूरे मामले में विज की भूमिका इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि उन्होंने बिजली इंजीनियरों और कर्मचारी संगठनों के साथ खड़े रहने का जो भरोसा दिया था, उसे सदन में भी सार्वजनिक रूप से दोहराया है। अब निगाहें 3 सितंबर की सुनवाई और उसके बाद होने वाली नियामकीय कार्रवाई पर रहेंगी। यदि विवाद आगे बढ़ता है तो ऊर्जा मंत्री के संकेत के अनुसार न्यायिक मंच भी अगला पड़ाव बन सकता है।