Haryana Agriculture: खेतों के पानी में खारापन बर्बाद कर सकता है फसल, जानें सैंपल लेने का सही तरीका

Edited By Isha, Updated: 29 Jul, 2026 03:11 PM

haryana agriculture salinity in irrigation water can ruin crops

हरियाणा सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों के ट्यूबवेल के पानी की नियमित रूप से जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि अगर पानी की जांच नहीं करवा

चंडीगढ़:  हरियाणा सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों के ट्यूबवेल के पानी की नियमित रूप से जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि अगर पानी की जांच नहीं करवाई गई, तो फसल का उत्पादन नहीं होगा बल्कि नुकसान ही होगा।

 राणा ने कहा कि सिंचाई के पानी की गुणवत्ता का सीधा असर फसल के उत्पादन और पैदावार पर पड़ता है। पानी में खारापन (नमक की मात्रा) अधिक होने से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। ट्यूबवेल के पानी की समय पर जांच करवाकर किसान सही फसल का चुनाव कर सकते हैं और खाद व उर्वरकों का सही और संतुलित तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।

कृषि मंत्री ने किसानों को ट्यूबवेल से पानी का सैंपल लेने का सही तरीका बताते हुए कहा कि ट्यूबवेल को कम से कम 30 मिनट तक लगातार चलाने के बाद ही पानी का सैंपल लेना चाहिए। इसके लिए, एक साफ प्लास्टिक की बोतल में लगभग 500 मिलीलीटर (या 1 लीटर) पानी भरें। बोतल पर किसान को अपना नाम, MFMB (मेरी फसल-मेरा ब्योरा) ID, गांव का नाम, खेत/खसरा नंबर, मोबाइल नंबर और बोरवेल की गहराई (फीट में) साफ-साफ लिखनी चाहिए। किसान इस तैयार सैंपल को अपनी नजदीकी मिट्टी स्वास्थ्य जांच प्रयोगशाला (Soil Testing Lab) में जमा कर सकते हैं।

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे जांच रिपोर्ट के आधार पर ही फसलों का चुनाव करें और सिंचाई के पानी का सही प्रबंधन अपनाएं। योजना और प्रयोगशालाओं के बारे में अधिक जानकारी के लिए, किसान टोल-फ्री नंबर 1800-180-2117 पर संपर्क कर सकते हैं या अपने जिले के उप-निदेशक (कृषि) से संपर्क कर सकते हैं।


 

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