Haryana: 100% दिव्यांग कर्मचारी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, इलाज का खर्च, पूरा वेतन और विशेष पद देने के आदेश

Edited By Isha, Updated: 30 Jul, 2026 08:15 AM

major relief for 100 differently abled employee from high court

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए उसके इलाज पर खर्च हुई 3.95 लाख रुपये की राशि का भुगतान, पूरा वेतन, सेवा लाभ

चंडीगढ़( चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग कर्मचारी को बड़ी राहत देते हुए उसके इलाज पर खर्च हुई 3.95 लाख रुपये की राशि का भुगतान, पूरा वेतन, सेवा लाभ और सुपरन्यूमैरेरी (विशेष अतिरिक्त) पद उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि एएलएस (एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) जैसी लाइलाज और तेजी से बढ़ने वाली बीमारी के मामलों में 'इमरजेंसी' की संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती।

क्या है पूरा मामला 
जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने अपने फैसले में कहा कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए 'इमरजेंसी' की अवधारणा को गरिमा, समानता और जीवन के संवैधानिक अधिकार के अनुरूप व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। याचिकाकर्ता सुनील कुमार वर्ष 2018 में क्लर्क और 2022 में सहायक के पद पर नियुक्त हुए थे। बाद में उन्हें मोटर न्यूरॉन डिजीज (एएलएस) होने का पता चला, जिससे उनके दोनों हाथ-पैरों ने काम करना बंद कर दिया और उन्हें 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित किया गया। उपचार के लिए उन्होंने बेंगलुरु के एक विशेष चिकित्सा केंद्र में स्टेम सेल थेरेपी सहित इलाज कराया, जिस पर 3.95 लाख रुपये खर्च हुए।

इलाज किसी आपातकालीन स्थिति में नहीं कराया गया
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने यह कहते हुए चिकित्सा प्रतिपूर्ति देने से इनकार कर दिया कि इलाज किसी आपातकालीन स्थिति में नहीं कराया गया था। हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एएलएस जैसी लगातार बढ़ने वाली बीमारी में शारीरिक क्षमता का तेजी से खत्म होना स्वयं गंभीर आपात स्थिति है और इसे केवल पारंपरिक मानकों से नहीं आंका जा सकता।

जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। केवल इस आधार पर किसी कर्मचारी को चिकित्सा प्रतिपूर्ति से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसने उपचार ऐसे अस्पताल में कराया जो सरकार के पैनल में शामिल नहीं था। 


हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि दिव्यांग कर्मचारी को उपयुक्त पद उपलब्ध कराने संबंधी उसके आवेदन पर लंबे समय तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। अदालत ने कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 20 के तहत सेवा के दौरान दिव्यांग हुए कर्मचारी को समान वेतन और सेवा लाभ के साथ उपयुक्त पद उपलब्ध कराना या आवश्यकता होने पर सुपरन्यूमैरेरी पद सृजित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति चार सप्ताह के भीतर जारी करने के आदेश
अदालत ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड को निर्देश दिया कि कर्मचारी के लिए सुपरन्यूमैरेरी पद सृजित किया जाए, 13 अगस्त 2025 के बाद की बिना वेतन अवधि को मेडिकल अवकाश माना जाए तथा पूरा वेतन, सेवा की निरंतरता और सभी संबंधित लाभ छह सप्ताह के भीतर दिए जाएं। इसके अलावा 3.95 लाख रुपये की चिकित्सा प्रतिपूर्ति चार सप्ताह के भीतर जारी करने के भी आदेश दिए गए।

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