हिसार बनेगा उत्तर भारत का सबसे बड़ा 'औद्योगिक हब'. 32,000 करोड़ का मेगा प्रोजेक्ट शुरू...रजिस्ट्री फीस 100% माफ

Edited By Isha, Updated: 04 Jun, 2026 01:41 PM

hisar to become north india s largest  industrial hub

राज्य सरकार ने हिसार में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (एकेआईसी) के तहत विकसित होने जा रहे एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने परियोजना के लिए

चंडीगढ़:  राज्य सरकार ने हिसार में अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (एकेआईसी) के तहत विकसित होने जा रहे एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर प्रोजेक्ट को लेकर बड़ा फैसला किया है। सरकार ने परियोजना के लिए ट्रांसफर की गई कुल 2,988 एकड़ भूमि पर लगने वाले पूरे स्टाम्प शुल्क, रजिस्ट्री फीस को माफ कर दिया है।

इस संबंध में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा द्वारा आदेश जारी किए हैं। इस कदम से प्रोजेक्ट की लागत में बड़ी कमी आएगी, विकास कार्यों में तेजी देखने को मिलेगी। यह जमीन राज्य नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा विशेष कार्य यानी राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम लिमिटेड के पक्ष में ट्रांसफर की गई है। कुल 2988 एकड़ जमीन का ट्रांसफर दो अलग-अलग चरणों में किया गया है। इस औद्योगिक क्लस्टर के बनने से हिसार और आसपास के इलाकों में न केवल उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर लग भी पैदा होंगे। प्रोजेक्ट कागजों से निकलकर अब जमीन पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भूमि अधिग्रहण, विभागों के बीच जमीन का ट्रांसफर, टैक्स माफी व पर्यावरण संबंधी सभी का जरूरी क्लीयरेंस पूरे हो चुके हैं। अब अगले चरण में सड़क, ही है। बिजली, पानी सुविधाएं के लिए काम होना बाकी है। इसके बाद उद्योगपतियों को प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

प्रोजेक्ट से हरियाणा को ऐसे होगा फायदा
हिसार एयरपोर्ट के पास बनने वाले इस एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर से हरियाणा को आर्थिक, औद्योगिक और रोजगार क्षेत्र में फायदा होगा। इस प्रोजेक्ट से हरियाणा, उत्तर भारत का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बन सकता सकता है।

एक अनुमान के अनुसार इससे करीब सवा लाख रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। यहां 32 हजार करोड़ से अधिक का निवेश संभावित है। यह क्लस्टर महाराजा अग्रसेन एयरपोर्ट के बिल्कुल पास स्थित है। इसके अलावा यह ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच है। इस प्रोजेक्ट से एयरोस्पेस, डिफेंस विमानों के रखरखाव और रक्षा उपकरणों के कलपुर्जे बनने से आस-पास छोटे उद्योगों को भी लाभ होगा।

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