मनी लॉन्ड्रिंग में ईडी की रहेजा डेवलपर्स पर बड़ी कार्रवाई, 782 करोड़ की संपत्तियां कुर्क

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 01 Aug, 2026 09:23 PM

ed seazed 783 crore property of raheja builder

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड की 782.36 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रियल एस्टेट कंपनी रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड की 782.36 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य बढक़र 2,399.65 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इसे देश में होमबायर्स के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े सबसे बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है।

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ईडी की दिल्ली जोनल कार्यालय ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की है। जांच रहेजा डेवलपर्स लिमिटेड, उसके निदेशक नवीन एम. रहेजा और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ चल रही है। यह जांच आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई, जिन्हें विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में निवेश करने वाले होमबायर्स ने दर्ज कराया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी ने अपनी विभिन्न हाउसिंग परियोजनाओं के लिए करीब 4,600 खरीदारों से लगभग 2,425.99 करोड़ रुपये जुटाए थे। आरोप है कि परियोजनाओं के निर्माण और उन्हें समय पर पूरा करने के बजाय इस राशि का बड़ा हिस्सा अन्य कार्यों में इस्तेमाल किया गया। इसके चलते हजारों खरीदार वर्षों बाद भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं।

 

वर्ष 2026 में यह इस मामले में ईडी की तीसरी बड़ी अटैचमेंट है। इससे पहले अप्रैल में 1,113.81 करोड़ रुपये और जून में 503.48 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की गई थीं। हालांकि, ईडी ने फिलहाल यह नहीं बताया है कि इस बार किन संपत्तियों को कुर्क किया गया है। पीएमएलए के तहत की गई यह अस्थायी कुर्की जांच पूरी होने तक संबंधित संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण रोकने के उद्देश्य से की जाती है। ईडी का कहना है कि जांच अभी जारी है और मामले में आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। लंबे समय से अपने घर का इंतजार कर रहे हजारों खरीदारों की नजर अब जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है। उन्हें उम्मीद है कि इस कार्रवाई से उनके हितों की रक्षा होगी और वर्षों से अटकी परियोजनाओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।

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