हरियाणा में गहराया वायु संकट, गुरुग्राम का सैक्टर-51 बना अमोनिया गैस का हॉटस्पॉट

Edited By Manisha rana, Updated: 13 May, 2026 08:20 AM

air crisis deepens in haryana gurugram sector 51 ammonia gas hotspot

हरियाणा में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। रैस्पायर लिविंग साइंसिज की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम का सैक्टर-51 में कूड़े-कचरे के अंबार से बन रही जहरीली अमोनिया गैस का बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है।

गुड़गांव : हरियाणा में वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंचता जा रहा है। रैस्पायर लिविंग साइंसिज की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गुरुग्राम का सैक्टर-51 में कूड़े-कचरे के अंबार से बन रही जहरीली अमोनिया गैस का बड़ा हॉटस्पॉट बन चुका है। राज्य में पी. एम. 2.5 और पीएम 10 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से दोगुने से भी अधिक दर्ज किया गया है जबकि अमोनिया के स्तर में 8 फीसदी बढ़ौतरी सामने आई है। चूंकि सैक्टर 51 में ही कूड़े का डम्पिक सेंटर है।

रिपोर्ट अनुसार कृषि गतिविधियों और पशुधन से निकलने वाली अमोनिया गैस प्रदूषण बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। 2024 से 2026 के बीच 31 निगरानी केंद्रों के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि पीएम 2.5 का सालाना औसत 62.51 से 77.38 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा जबकि राष्ट्रीय मानक 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है। वहीं पीएम 10 का स्तर 123.44 से 141.68 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया जो तय सीमा 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से दोगुना है। 

रिपोर्ट में गुरुग्राम, फरीदाबाद, बहादुरगढ़ और मानेसर की दक्षिणी पट्टी को सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र बताया गया है। हरियाणा में अमोनिया का औसत स्तर 2024 में 35.75 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 2025 में 38.63 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया। गुरुग्राम के सैक्टर-51 में 2025 का सालाना औसत 138.30 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज हुआ जो निर्धारित सीमा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से काफी अधिक है। 

मार्च 2025 में सैक्टर-51 में लगातार 3 दिनों तक अमोनिया का स्तर 24 घंटे की 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर सीमा को पार कर गया। रिपोर्ट में हरियाणा में 10 सैंसर आधारित प्रायोगिक अमोनिया निगरानी तंत्र स्थापित करने की सिफारिश की गई है। इनमें 5 सैंसर गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत जैसे शहरी इलाकों में तथा 5 हिसार, सिरसा और जींद जैसे पशुधन प्रधान जिलों में लगाने का सुझाव दिया गया है। रेस्पायर लिविंग साइंसेज के संस्थापक रोनक सुतारिया ने कहा कि हरियाणा में अलग अमोनिया निगरानी तंत्र की तत्काल जरूरत है, जिसे हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण मंडल, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय और कृषि मंत्रालय मिलकर लागू कर सकते हैं।

(पंजाब केसरी हरियाणा की खबरें अब क्लिक में Whatsapp एवं Telegram पर जुड़ने के लिए लाल रंग पर क्लिक करें)           

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!