स्वच्छता माह में हरियाणा का सबसे अमीर नगर निगम बना 'डंपिंग यार्ड' सफाई कर्मचारियों का हल्ला बोल

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 12 May, 2026 04:55 PM

haryana richest municipal corporation became a dumping yard

शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही नगर निगम की तरफ से मई माह को स्वच्छता माह के रूप में मनाया जा रहा हो, लेकिन हरियाणा का 'मिलेनियम सिटी' कहा जाने वाला गुरूग्राम, जो अपने आलीशान दफ्तरों और चमक-धमक के लिए जाना जाता है, आज बदहाली के आंसू रो रहा है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): शहर को स्वच्छ रखने के लिए भले ही नगर निगम की तरफ से मई माह को स्वच्छता माह के रूप में मनाया जा रहा हो, लेकिन हरियाणा का 'मिलेनियम सिटी' कहा जाने वाला गुरूग्राम, जो अपने आलीशान दफ्तरों और चमक-धमक के लिए जाना जाता है, आज बदहाली के आंसू रो रहा है। प्रदेश का सबसे अमीर नगर निगम आज खुद कूड़े के ढेर में तब्दील हो चुका है। सिविल लाइन स्थित नगर निगम दफ्तर का मुख्य गेट, जहां से शहर के विकास की फाइलें गुजरती थीं, आज वहां कूड़े के ऊंचे ऊंचे ढेर लगे हुए हैं। ये तस्वीरें किसी डंपिंग स्टेशन की नहीं, बल्कि गुरूग्राम नगर निगम के मुख्य दफ्तर की हैं। शहर को स्वच्छ रखने का दावा करने वाले इस दफ्तर के गेट पर आज गंदगी का अंबार लगा है। अपनी मांगों को लेकर नाराज सफाई कर्मचारियों ने विरोध जताते हुए निगम दफ्तर के बाहर ही ट्रॉलियां भरकर कूड़ा पलट दिया है।

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बाइट- बसंत कुमार,  इकाई प्रधान,  नगर निगम कर्मचारी संघ गुरुग्राम के इकाई प्रधान बसंत कुमार का कहना है कि नगर निगम के सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 12 दिन से हड़ताल पर हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते गली-मोहल्लों में कूड़े के अंबार लग गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों का जीना दूभर हो गया है। सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। सफाई कर्मचारियों ने कहा कि हम 2014 से अपनी जायज मांगों के लिए सरकार से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही। सरकार हमें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित कर रही है। हम चाहते हैं कि ठेकेदारी प्रथा खत्म हो, कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए और हमारा वेतन बढ़ाया जाए। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होंगी, यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

 

नगर निगम कर्मचारी संघ गुरुग्राम के पूर्व प्रधान कैलाश कुमार का कहना है कि जिस शहर का बजट करोड़ों में है, उस शहर की सफाई व्यवस्था आज वेंटिलेटर पर है। सफाई कर्मचारियों का साफ कहना है कि सरकार सिर्फ आश्वासन देती है, धरातल पर काम नहीं करती। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इन कर्मचारियों की सुध लेती है या फिर इसी तरह मिलेनियम सिटी गुरूग्राम गंदगी की चपेट में सिसकता रहेगा।

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