हरियाणा में बैंकों में जमा सरकारी फंड की अब हर 3 महीने में होगी जांच...जानिए क्या है बड़ी वजह

Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Aug, 2026 09:01 AM

government funds deposited in banks in haryana will now be audited every 3 month

हरियाणा में 661 करोड़ रुपए बैंक घोटाले के बाद सरकार सजग हो गई है। वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए

चंडीगढ़ : हरियाणा में 661 करोड़ रुपए बैंक घोटाले के बाद सरकार सजग हो गई है। वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी सरकारी कंपनियों, बोर्ड-निगमों, सहकारी संस्थाओं और स्वायत्त निकायों को बैंकों में जमा सरकारी फंड की हर 3 महीने में जांच करानी होगी। इस दौरान बचत, चालू, टर्म डिपॉजिट और फ्लेक्सी खातों की भी समीक्षा की जाएगी।

वित्त विभाग ने सभी प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को बैंकों में जमा फंड के सत्यापन और मिलान की व्यवस्था लागू करने के लिए तिमाही प्रमाणपत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। बाकायदा एक प्रोफार्मा जारी किया गया है। संबंधित संस्था के एम.डी. या सी.ई.ओ. को इस प्रोफार्मा को भरकर हस्ताक्षरों के साथ बैंक खातों में जमा धनराशि के सत्यापन एवं खातों के रिकार्ड से मिलान की पुष्टि करनी होगी। यह प्रोफार्मा उन्हें हर तिमाही वित्त विभाग द्वारा नामित संस्था के निदेशक को भेजना होगा।

एम.डी. और सी.ई.ओ. को प्रमाणपत्र में संस्था के विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि को संबंधित तिमाही के खातों की कापी से सत्यापित और मिलान किए जाने की पुष्टि करनी होगी। प्रमाणपत्र में यह भी घोषित करना होगा कि प्रमाणन की तारीख तक खातों में कोई विसंगति नहीं है। इसके अलावा

बैंकों में जमा ब्याज पर भी रहेगी नजर
बैंक द्वारा निवेश के समय खाते या एफ. डी. आर. पर दिए गए ब्याज को संबंधित खाते में सही तरीके से जमा किए जाने और उसके सत्यापन की भी पुष्टि करनी होगी। बैंक रिकंसिलिएशन स्टेटमेंट (बी.आर. एस. तैयार किए जाने तथा उसमें दर्शाए गए बैलेंस का संस्था की लेखा पुस्तकों बैलेंस शीट और संबंधित बैंकों के बैलेंस से मिलान किया जाएगा। संस्था को अपने अंतिम स्टैच्यूटरी ऑडिट, ए.जी. ऑडिट और इंटरनल ऑडिट की स्थिति का भी उल्लेख करना होगा।

ऑडिट संतोषजनक होने की देनी होगी गारंटी
एम.डी. और सी.ई.ओ. को प्रमाणपत्र में यह दर्ज करना होगा कि संबंधित ऑडिट संतोषजनक पाए गए और कोई विसंगति या अनियमितता इंगित नहीं की गई। प्रमाणपत्र को एम.डी./सी.ई.ओ. के हस्ताक्षर, नाम, पदनाम, तारीख और आधिकारिक मुहर के साथ वित विभाग के नामित अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा। संस्थाओं को यह प्रमाणित करना होगा कि बैंक खाते वित्त विभाग की ओर से जारी निर्देशों और दिशा-निर्देशों के अनुसार खोले और संचालित किए जा रहे हैं। 

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