Edited By Krishan Rana, Updated: 15 Aug, 2026 10:41 AM
पलवल के गांव रजोलका के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय बीन वादक हवा सिंह नाथ को 96 साल की उम्र में
पलवल : पलवल के गांव रजोलका के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय बीन वादक हवा सिंह नाथ को 96 साल की उम्र में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार-2024 से सम्मानित किया गया है। दिल्ली राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनको पुरस्कार देकर सम्मानित किया। हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने भी ट्वीट कर बधाई दी है। इससे पहले भी राज्य स्तर पर उनको कई पुरस्कार मिले है।
हवा सिंह नाथ ने बॉलीवुड के मशहूर कलाकार अमरेश पुरी, हेमा मालिनी , गुरूदासमान दैसे कलाकारों के साथ काम किया है। हाल में दादा लख्मीचंद के जीवन पर बनी फिल्म में हवा सिंह और उनके बेटे को काम करने का मौका मिला है। जिसमें बॉप-बेटे ने दादा लख्मीचंद के सहायक कलाकारो का रौल निभाया है।
हवा सिंह अपनी टीम के साथ 5 बार इटली, दुबई, अबू धाबी सहित UAE के अन्य देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके है। अभी वह अपने परिवार के साथ गांव रजोलका में ही रह रहे है। पुरस्कार मिलने पर उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
पुरस्कार में मिला ताम्रपत्र, अंगवस्त्रम और एक लाख रुपये
यह पुरस्कार संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं पारंपरिक कलाओं, कठपुतली कला और प्रदर्शन कला में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है। पुरस्कार की शुरुआत 1952 से हुई थी और इसे देश के प्रदर्शन कला क्षेत्र के प्रमुख राष्ट्रीय सम्मानों में माना जाता है पुरस्कार के माध्यम से भारतीय कला और संस्कृति को समृद्ध करने वाले कलाकारों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाता है। पुरस्कार में ताम्रपत्र, अंगवस्त्रम और 1 लाख नकद राशि प्रदान की जाती है।
10 साल की उम्र में बीन बजाना शुरू किया
96 साल के हवा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वह सपेरा समाज से आते है। मूल रूप से वह करनाल के रहने वाले है और पिछले करीब 40 सालो से वह पलवल के गांव रजोलका में रह रहे है। बीन वादक की ये कला प्राचीन समय से उनके कुल में चली आ रही है। उनसे पहले उनके बड़े भाई बीन वादन का काम करते थे। जब वह 10 साल के थे तो उनके बड़े भाई ने बीन बनाकर उनके हाथ में थमा दी। उसी दिन से उन्होंने अपने भाई को गुरू माना और उन्ही से बीन वादक की शिक्षा लेनी शुरू कर दी।
आर्थिक परेशानियां बनी बाधा
हवा सिंह ने बताया कि 30 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई। शादी के बाद परिवार को चलाना और इस कला के साथ आगे बढ़ना बहुत ही मुश्किल था। लेकिन उन्होंने हिम्मत नही हारी और वो इस कला से जुड़े रहे। वो शादियों , जगह -जगह बीन के प्रोग्राम करते थे। धीरे-धीरे उनकी बीन को लोग पसंद आने लगी और उनको स्टेजों पर अपनी बीन प्रोग्राम करने का मौका मिला।

अमरीश पुरी और हेमा मालिनी के साथ किया काम
उन्होंने कहा कि शादी के बाद उनके पांच बेटे है। जिनमें रणधीर नाथ, राजबीर नाथ , रामबीर नाथ , जयवीर नाथ , संजय नाथ है। उनको बेटो ने भी इसी कला को सीखा और सभी ने मिलकर अपनी टोली बना ली। उनके दो बेटे बीन बजाने का काम करते है बाकि तुम्बा ,चिमटा और ढोलक को संभालते है। उन्होंने हरियाणा के पुराने समय के कई लोक कलाकारों के साथ स्टेज शौ किए है। उनके पिता ने बॉलीवुड के मशहूर कलाकार अमरेश पुरी, हेमा मालिनी , गुरूदासमान दैसे कलाकारों के साथ काम किया है।
विदेशों में बजाया बीन का डंका
हवा सिंह के बेटे रणधीर ने बताया कि उनके पिता ने भारत में ही ब्लकि 5 बार विदेशों में जाकर बीन के प्रोग्राम किए है। टली, दुबई, अबू धाबी सहित UAE के अन्य देशों में अपनी प्रस्तुति दे चुके है। हांलाकि उनको कभी विदेश साथ में जाने का मौका नही मिला है। विदेश में उनके साथ दूसरे कलाकार जाते रहे है।
पांच बेटों ने भी सीखी कला
हवा सिंह का गांव रजोलका में एक बड़ा परिवार है। उनके 5 बेटे है जो गांव में ही उनके साथ रहते है। हवा सिंह के 10 पोते ( बेटे के बच्चे) और 3 पोतियां है। लेकिन उनके बेटों के बाद कोई भी इस कला से जुड़ाना नही चाहता है। जिसका सबसे बड़ा कारण यही है कि इस कला के साथ परिवार चलाना बेहद मुशकिल है। इसलिए वो बच्चों को पढ़ा रहे है। उनके कई पोटे नौकरी भी कर रहे है।
सरकार से पेंशन बनाने की मांग
हवा सिंह के बेटे ने कहा कि सरकार के द्वारा अब से पहले उनकी कोई आर्थिक तौर पर मदद नही की गई है। गांव -गांव में जाकर प्रोग्राम करके उनके पिता ने घर चलाया है। वो चाहते है कि सरकार इस कला को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग करे। उनके पिता की पेंशन सरकार के द्वारा बांधी जाए। ताकि दूसरे लोगों को प्रोत्साहन मिले । उन्होंने कहा कि समय-समय पर इस कला से जुड़े लोगों का सम्मान होना चाहिए। ताकि नए बच्चे इस कला के साथ जुड़ सके।
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