Edited By Isha, Updated: 15 Aug, 2026 02:27 PM

हरियाणा में नशे के खिलाफ अभियान अब जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने नशे की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्य, जिला, उपमंडल और ग्राम पंचायत/शहरी वार्ड स्तर पर चार-स्तरीय कमेटियां
चंडीगढ़: हरियाणा में नशे के खिलाफ अभियान अब जिला स्तर तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने नशे की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के लिए राज्य, जिला, उपमंडल और ग्राम पंचायत/शहरी वार्ड स्तर पर चार-स्तरीय कमेटियां गठित करने का फैसला लिया है। किसी व्यक्ति में नशे की लत के लक्षण सामने आने पर उसे 72 घंटे के भीतर सरकारी स्तर पर अनुमोदित उपचार, परामर्श और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
गांवों में ग्राम स्तरीय नशा मुक्ति टास्क फोर्स और शहरों में वार्ड स्तरीय टास्क फोर्स बनाई जाएंगी। इनमें प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा युवा, वरिष्ठ नागरिक और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। ये टीमें नशे के संभावित सेवन और तस्करी वाले स्थानों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों को सूचना देंगी।
राज्य स्तरीय संचालन एवं निगरानी समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी होंगे। समिति नशा मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश की कार्ययोजना, जागरूकता, उपचार, परामर्श और पुनर्वास के लक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इसकी बैठक हर तीन महीने में होगी। जिला समितियों की अध्यक्षता उपायुक्त करेंगे। वे संवेदनशील इलाकों और जोखिम वाले समूहों की पहचान के साथ जागरूकता कार्यक्रमों और नशा मुक्ति केंद्रों की निगरानी करेंगे। स्कूलों और संबंधित केंद्रों का हर तीन महीने में निरीक्षण किया जाएगा।
उपमंडल स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में समिति काम करेगी। यह समिति नशा मुक्ति और उपचार केंद्रों का हर महीने निरीक्षण करेगी। ग्राम और वार्ड स्तर की टास्क फोर्स ग्राम सभा और वार्ड सभा के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाएंगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि उपचार के दौरान नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति की गोपनीयता और सम्मान का विशेष ध्यान रखा जाएगा।