सरकारी आवासों में सबलेटिंग पर हरियाणा सरकार की सख्ती, अब देना होगा सेल्फ-सर्टिफिकेशन; नियम तोड़ने वालों पर कसेगा शिकंजा

Edited By Harman, Updated: 07 Aug, 2026 01:53 PM

haryana government cracks down on subletting in government housing

हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ में आवंटित सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब यूटी चंडीगढ़ प्रशासन अथवा हरियाणा सरकार द्वारा आवंटित सरकारी मकानों में रहने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को यह स्व-प्रमाणन...

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : हरियाणा सरकार ने चंडीगढ़ में आवंटित सरकारी आवासों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब यूटी चंडीगढ़ प्रशासन अथवा हरियाणा सरकार द्वारा आवंटित सरकारी मकानों में रहने वाले सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को यह स्व-प्रमाणन (सेल्फ-सर्टिफिकेशन) देना होगा कि उन्होंने सरकारी आवास किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं दिया है और वे स्वयं उसी मकान में निवास कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य सरकारी संपत्तियों का पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित करना है।

मुख्य सचिव ने जारी किए सख्त निर्देश

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सभी विभागों, बोर्डों, निगमों तथा अन्य सरकारी संस्थानों को अपने-अपने अधीन कार्यरत उन अधिकारियों और कर्मचारियों से निर्धारित प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए हैं, जिन्हें चंडीगढ़ में सरकारी आवास आवंटित किए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी मकानों का उपयोग केवल अधिकृत आवंटी ही कर रहे हैं।

लगातार मिल रही थीं शिकायतें

सरकार के अनुसार यूटी चंडीगढ़ की हाउस अलॉटमेंट कमेटी के सचिव ने जानकारी दी थी कि जनरल पूल से आवंटित सरकारी आवासों में सबलेटिंग, अनधिकृत कब्जे, व्यावसायिक उपयोग, दुरुपयोग तथा बिना अनुमति निर्माण जैसी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन शिकायतों में पंजाब एवं हरियाणा सरकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तथा चंडीगढ़ प्रशासन के कर्मचारियों से जुड़े आवास भी शामिल बताए गए हैं। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने व्यापक स्तर पर सत्यापन अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है।

सेल्फ-सर्टिफिकेशन से होगी जवाबदेही तय

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक आवंटी को लिखित रूप से यह प्रमाणित करना होगा कि वह स्वयं सरकारी आवास में रह रहा है और उसने मकान किसी अन्य व्यक्ति को किराये पर नहीं दिया है। यदि भविष्य में जांच के दौरान प्रमाण-पत्र में दी गई जानकारी गलत पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से सरकारी आवासों में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी रोक लगेगी।

सभी विभागों को पालन सुनिश्चित करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, हरियाणा लोक सेवा आयोग, हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग, हरियाणा विधानसभा सचिवालय, पुलिस महानिदेशक, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (सीआईडी) तथा लोक निर्माण विभाग (भवन एवं सड़कें) के इंजीनियर-इन-चीफ सहित सभी संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने प्रशासनिक नियंत्रण वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से निर्धारित प्रारूप में प्रमाण-पत्र प्राप्त करना सुनिश्चित करें।

सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर जीरो टॉलरेंस

सरकार का यह कदम सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे सरकारी आवासों की अवैध सबलेटिंग, अनधिकृत कब्जे और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी अंकुश लगने की उम्मीद है। साथ ही पात्र कर्मचारियों को सरकारी आवासों का लाभ नियमों के अनुरूप उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

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