कर्मचारियों के राहत की खबर... इस पेंशन स्कीम पर HC का बड़ा आदेश, हरियाणा सरकार को दिए 3 महीने के निर्देश

Edited By Isha, Updated: 07 Aug, 2026 08:35 PM

high court s major order on this pension scheme

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुकंपा आधार पर नियुक्त कर्मचारी की पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पैंशन स्कीम ओ.पी.एस.) का लाभ देने संबंधी मांग पर हरियाणा सरकार को 3 महीने के भीतर कारण युक्त (स्पीकिंग)

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुकंपा आधार पर नियुक्त कर्मचारी की पुरानी पेंशन योजना (ओल्ड पैंशन स्कीम ओ.पी.एस.) का लाभ देने संबंधी मांग पर हरियाणा सरकार को 3 महीने के भीतर कारण युक्त (स्पीकिंग) आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देने के बाद उसके कानूनी नोटिस पर तय समय सीमा में निर्णय ले और यदि वह राहत का पात्र पाया जाता है तो उसे तत्काल लाभ प्रदान किया जाए। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने यह आदेश राजेश कुमार की याचिका का निपटारा करते हुए पारित किया। याचिका में राजेश कुमार ने मांग की थी कि उसे नई पेंशन योजना (एन.पी.एस.) के बजाय पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाए। उसका कहना था कि उसने मई-जून 2005 में, यानी नई पेंशन योजना लागू होने से पहले, अनुकंपा विचिन के लिए आवेदन कर दिया था। नियुक्ति मिलने में हुई उसकी वजह से नहीं हुई, इसलिए पेंशन योजना तय करने के लिए नियुक्ति की तारीख नहीं बल्कि आवेदन की तारीख को आधार बनाया जाना चाहिए।

याची ने अदालत को बताया कि पंजाब सरकार ने 22 मई 2025 की अधिसूचना तथा केंद्र सरकार ने 22 जून 2026 की अधिसूचना जारी कर अनुकंपा आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को आवेदन की तारीख के आधार पर पुरानी पेंशन योजना का लाभदेने का प्रावधान किया है। उसने इसी आधार पर हरियाणा सरकार से भी समान नीति अपनाने की मांग की थी। इस संबंध में उसने 26 फरवरी 2026 और 30 जून 2026 को कानूनी नोटिस भी भेजे, लेकिन उन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के

बाद हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के 30 जून 2026 के कानूनी नोटिस पर विचार करे, उसे व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दे और प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 3 महीने के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करे। अदालत ने यह भी कहा कि लिए गए निर्णय की सूचना याचिकाकर्ता को दी जाए। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि विचार के बाद याचिकाकर्ता को मांगी गई राहत का पात्र पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकारी उसे बिना किसी विलंब के तत्काल लाभ प्रदान करे। इसी निर्देश के साथ अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया।

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