Edited By Krishan Rana, Updated: 06 Aug, 2026 08:12 PM

IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े बहुचर्चित सरकारी धन गबन मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): IDFC फर्स्ट बैंक से जुड़े बहुचर्चित सरकारी धन गबन मामले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य जांच एजेंसियों के सामने कई सनसनीखेज तथ्य सामने आए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी विभागों के खातों से कथित रूप से गबन की गई रकम का इस्तेमाल आलीशान पार्टियों, कॉल गर्ल्स, विदेश यात्राओं, लग्जरी वाहनों और चंडीगढ़ ट्राइसिटी में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदने में किया गया।
जांच के अनुसार, हरियाणा सरकार के आठ विभागों, चंडीगढ़ प्रशासन के दो विभागों तथा दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से अनियमित तरीके से धन निकाला गया। एजेंसियों का दावा है कि घोटाले के कथित मास्टरमाइंड और सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व शाखा प्रबंधक रिभव ऋषि अपने सहयोगियों और अन्य आरोपियों के लिए जीरकपुर स्थित 'जेड मैनर' में भव्य पार्टियों का आयोजन करते थे।
ईडी के मुताबिक, इन पार्टियों के लिए प्रतिदिन लगभग एक लाख रुपये किराये पर स्थल लिया जाता था। पूछताछ में रिभव ऋषि ने कथित रूप से स्वीकार किया कि इन आयोजनों में डांसर्स, मनोरंजन कार्यक्रम और कॉल गर्ल्स की व्यवस्था की जाती थी, जिन पर एक-एक कार्यक्रम में 20 से 25 लाख रुपये तक खर्च किए जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि घोटाले से जुड़े लोगों के लिए दुबई, थाईलैंड और गोवा की कई विदेश एवं घरेलू यात्राओं का खर्च भी इसी रकम से उठाया गया। फ्लाइट टिकट, लग्जरी होटल, पार्टियां और अन्य सुविधाओं पर पांच किश्तों में कुल 2.01 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
ईडी के अनुसार, करीब 4.92 करोड़ रुपये से छह लग्जरी वाहन खरीदे गए। इनमें मर्सिडीज, रेंज रोवर, टोयोटा फॉर्च्यूनर और इनोवा हाईक्रॉस जैसी महंगी गाड़ियां शामिल हैं। आरोप है कि इन वाहनों का लाभ घोटाले से जुड़े बैंक अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य सहयोगियों को मिला।
जांच एजेंसी ने अब तक 200.84 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियां जब्त की हैं। इनमें 179.84 करोड़ रुपये मूल्य की 21 अचल संपत्तियां तथा 21 करोड़ रुपये मूल्य की 23 चल संपत्तियां शामिल हैं।
ईडी की जांच में 62 बैंक खातों की पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि विभिन्न सरकारी विभागों को कथित तौर पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें, जाली आरटीजीएस अनुरोध पत्र और नकली बैंक दस्तावेज जारी कर अनधिकृत वित्तीय लेन-देन किए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने चंडीगढ़, पंचकूला, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में करोड़ों रुपये की आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां खरीदीं। इनमें औद्योगिक प्लॉट, आलीशान मकान, फार्महाउस प्लॉट और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की सदस्यताएं भी शामिल हैं।
ED का कहना है कि घोटाले के कथित प्रमुख लाभार्थियों में शामिल रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को बैंक खातों और नकद के माध्यम से भारी रकम प्राप्त हुई, जिसका उपयोग ट्राइसिटी क्षेत्र में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया। मामले की जांच जारी है और एजेंसियां धन के पूरे नेटवर्क तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
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