Edited By Isha, Updated: 06 Aug, 2026 01:45 PM

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली में तकनीक का उपयोग करते हुए एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब अदालती फैसलों में उद्धृत सभी न्यायिक नजीरों के साथ सक्रिय हाइपरलिंक जोड़े जाएंगे। इससे वकी
चंडीगढ़: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली में तकनीक का उपयोग करते हुए एक नई व्यवस्था शुरू की है। अब अदालती फैसलों में उद्धृत सभी न्यायिक नजीरों के साथ सक्रिय हाइपरलिंक जोड़े जाएंगे। इससे वकील, न्यायिक अधिकारी, शोधार्थी और आम नागरिक एक क्लिक पर सुप्रीम कोर्ट के संबंधित निर्णय पढ़ सकेंगे।
यह पहल पहली बार 32 पृष्ठों के एक फैसले में अपनाई गई। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 35 से अधिक फैसलों का हवाला दिया गया था। यह व्यवस्था न्यायिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाएगी। न्यायपालिका कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से तैयार फर्जी फैसलों पर चिंता जता चुकी है। यह पहल इसी पृष्ठभूमि में आई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिना सत्यापन के एआई से प्राप्त कानूनी नजीर के उपयोग को लापरवाही बताया था। जिस फैसले में यह नई व्यवस्था लागू हुई, वह झज्जर जिले की एक आपराधिक अपील से संबंधित है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दो दोषियों को दी गई मृत्युदंड की सजा रद्द की।
फर्जी AI फैसलों पर कड़ा प्रहार
यह कदम न्यायिक पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाल ही में न्यायपालिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फर्जी और अप्रमाणिक अदालती फैसलों के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई थी।