Haryana: 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को बड़ा झटका: केंद्र का साफ जवाब, TET से नहीं मिलेगी कोई छूट

Edited By Isha, Updated: 06 Aug, 2026 08:17 AM

major setback for teachers appointed before 2010

वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट की उम्मीदों पर केंद्र सरकार ने विराम लगा दिया है। लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि टीईटी शिक्षक बनने की न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  वर्ष 2010 से पहले नियुक्त हजारों शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट की उम्मीदों पर केंद्र सरकार ने विराम लगा दिया है। लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट किया कि टीईटी शिक्षक बनने की न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है और इससे छूट देने अथवा पुरानी नियुक्तियों के लिए अलग व्यवस्था बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने अपने रुख के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णयों का भी हवाला दिया।

सांसदों ने उठाया पुरानी नियुक्तियों का मुद्दा
यह मामला सोनीपत के सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और हिसार के सांसद जयप्रकाश ने लोकसभा में उठाया। उन्होंने पूछा कि वर्ष 2010 से पहले तत्कालीन नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों के लिए क्या कोई विशेष प्रावधान किया जाएगा, क्योंकि उनकी नियुक्ति के समय टीईटी लागू नहीं थी।

आरटीई कानून के तहत टीईटी अनिवार्य
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने लिखित उत्तर में कहा कि शिक्षक भर्ती और सेवा शर्तें राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय हैं, लेकिन शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आने वाले विद्यालयों में टीईटी को न्यूनतम अनिवार्य योग्यता घोषित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने भी वैध ठहराया है, इसलिए टीईटी से छूट देने या वैकल्पिक पात्रता लागू करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

राहत केवल समयसीमा में, नियमों में नहीं
सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 के फैसले में टीईटी की अनिवार्यता को बरकरार रखा था। इसके बाद 29 मई 2026 को समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केवल समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया। अब संबंधित शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी उत्तीर्ण करने का अवसर दिया गया है। यानी नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया, केवल समय बढ़ाया गया है।

राज्यों को साल में दो बार परीक्षा कराने की सलाह
केंद्र सरकार ने सदन को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और परीक्षा आयोजित करने वाले प्राधिकरणों को सलाह दी है कि टीईटी नियमित रूप से आयोजित की जाए और संभव हो तो प्रत्येक वर्ष दो बार परीक्षा कराई जाए। इससे कार्यरत शिक्षकों और अभ्यर्थियों को समय रहते पात्रता प्राप्त करने का पर्याप्त अवसर मिल सकेगा।

हजारों शिक्षकों की उम्मीदों को झटका
लोकसभा में सरकार के जवाब से स्पष्ट हो गया है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अलग श्रेणी बनाकर टीईटी से छूट देने की मांग फिलहाल स्वीकार नहीं की गई है। ऐसे में जिन शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू होती है, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। वर्तमान में यही उनके लिए उपलब्ध एकमात्र वैधानिक विकल्प है।

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