Edited By Isha, Updated: 25 Jul, 2026 07:23 PM
भारतीय जनता पार्टी ने अनुसूचित जाति समाज के बीच अपनी सामाजिक और राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान की घोषणा की है। गुरुग्राम में आयोजित बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय
चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी): भारतीय जनता पार्टी ने अनुसूचित जाति समाज के बीच अपनी सामाजिक और राजनीतिक पहुंच मजबूत करने के उद्देश्य से एक व्यापक अभियान की घोषणा की है। गुरुग्राम में आयोजित बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता, कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार, कृष्ण कुमार बेदी सहित वरिष्ठ नेताओं ने श्री गुरु रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व के अवसर पर राज्यव्यापी "समरसता यात्रा" निकालने का निर्णय लिया।
इस अभियान के तहत वाराणसी स्थित सीर गोवर्धनपुर में गुरु रविदास महाराज की जन्मस्थली से पावन मिट्टी वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार कलशों में लेकर हरियाणा के गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाई जाएगी। अभियान की शुरुआत 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से होगी और पहले चरण के कार्यक्रम 6 अगस्त तक चलेंगे। इसके बाद अगले वर्ष तक विभिन्न चरणों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अनुसूचित जाति समाज के बड़े वर्ग पर भाजपा की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने केंद्र और हरियाणा में लगातार चुनावी सफलता हासिल की है, लेकिन अनुसूचित जाति की प्रमुख जातियों—चमार, रविदासिया और जाटव—में अभी भी उसकी स्वीकार्यता सीमित मानी जाती है। इन्हीं वर्गों तक प्रभावी पहुंच बनाने के लिए पार्टी सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से संवाद बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री कृष्ण लाल पंवार, जो चमार समाज से आते हैं, लंबे समय से गुरु रविदास की शिक्षाओं को सामाजिक समरसता का आधार बताते रहे हैं। वहीं शाहाबाद से जुड़े भाजपा नेता सुभाष कलसाना को भी संगठन ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर अनुसूचित समाज में नेतृत्व को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।
'वंचित अनुसूचित वर्ग' के फैसले के बाद नया सामाजिक अभियान
हरियाणा सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के आरक्षण को दो वर्गों में विभाजित कर 'वंचित अनुसूचित वर्ग' को अलग हिस्सेदारी देने के फैसले को भी भाजपा इसी सामाजिक विस्तार की रणनीति का हिस्सा मान रही है। सरकार का तर्क है कि इससे वाल्मीकि, धानक, मजहबी सिख, खटीक, बाजीगर सहित 36 जातियों को आरक्षण का बेहतर लाभ मिलेगा।
इस पूरे अभियान का संयोजन कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी को सौंपा गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अब भाजपा संत रविदास की शिक्षाओं के माध्यम से अनुसूचित समाज के विभिन्न वर्गों के बीच व्यापक संवाद स्थापित करने का प्रयास करेगी।
हरियाणा में बड़ा चुनावी महत्व रखता है अनुसूचित वर्ग
2011 की जनगणना के अनुसार हरियाणा में अनुसूचित जाति की आबादी 20 प्रतिशत से अधिक है, जबकि चमार, रविदासिया और जाटव समुदाय मिलाकर लगभग 11–12 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखते हैं। प्रदेश की अंबाला और सिरसा लोकसभा सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हैं, जिससे इस वर्ग का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
पंजाब से वाराणसी तक निकलेगी समरसता यात्रा
समरसता यात्रा की शुरुआत पंजाब के डेरा सचखंड बल्ला (जालंधर) से होगी। यह यात्रा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से गुजरते हुए वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर पहुंचेगी।यात्रा के दौरान संत गुरु रविदास महाराज के जीवन, विचार और सामाजिक समरसता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा 26 नवंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक देशभर के छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों में समरसता कार्यक्रम आयोजित करने की भी योजना है, जहां विद्यार्थियों को गुरु रविदास के जीवन-दर्शन से परिचित कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री बोले—गुरु रविदास का संदेश आज भी प्रासंगिक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्री गुरु रविदास महाराज का 650वां प्रकाश पर्व हरियाणा के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास महान समाज सुधारक, मानवता के उपासक और सामाजिक न्याय के अग्रदूत थे। उनकी शिक्षाएं समानता, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश देती हैं तथा आज भी समाज को सही दिशा प्रदान करती हैं।
पंजाब की राजनीति में भी अहम है रविदासिया समाज
राजनीतिक दृष्टि से पंजाब में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 32 प्रतिशत मानी जाती है और रविदासिया समाज वहां महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का मुख्यमंत्री बनना भी इस सामाजिक समीकरण का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी डेरा सचखंड बल्ला का दौरा कर चुके हैं तथा गुरु रविदास जन्मस्थली के लिए विशेष रेल सेवा शुरू किए जाने जैसे कदम भी इस समाज के प्रति विशेष महत्व दर्शाते हैं।
गुरु रविदास का संदेश: समानता और मानवता का दर्शन
गुरु रविदास महाराज ने सामाजिक भेदभाव के दौर में समानता, श्रम, ईमानदारी और मानवता का संदेश दिया। उनका प्रसिद्ध संदेश—
"ऐसा चाहूं राज में, जहां मिले सबन को अन्न।
छोटे-बड़े सब सम बसें, रैदास रहे प्रसन्न।।"
और "मन चंगा तो कठौती में गंगा" आज भी सामाजिक समरसता, समान अवसर और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा के रूप में व्यापक रूप से उद्धृत किए जाते हैं।