3 दिन में सैनी-कुलदीप की दो बार हुई ‘मुलाकात’ से रिश्तों की हुई नई ‘शुरूआत’! तमाम अटकलों पर लगा विराम

Edited By Krishan Rana, Updated: 03 Jun, 2026 07:49 PM

saini and kuldeep met twice in three days marking a new beginning in their rela

हरियाणा की राजनीति में कुछ नाम केवल व्यक्तित्व ही नहीं होते बल्कि एक राजनीतिक युग का प्रतीक

चंडीगढ़ (संजय अरोड़ा): हरियाणा की राजनीति में कुछ नाम केवल व्यक्तित्व ही नहीं होते बल्कि एक राजनीतिक युग का प्रतीक बन जाते हैं। चौधरी भजनलाल ऐसा ही एक नाम रहे जिन्होंने प्रदेश की राजनीति को गांव-गांव तक प्रभावित किया। उनकी राजनीतिक शैली, सामाजिक संतुलन और जनसंपर्क की कला आज भी हरियाणा की राजनीति में मिसाल मानी जाती है। यही कारण है कि उनके नाम और सम्मान से जुड़ा कोई भी मुद्दा केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता बल्कि सामूहिक मुद्दा बन जाता है।

पिछले कई दिनों तक हरियाणा की राजनीति में ऐसा ही एक घटनाक्रम देखने को मिला जब भाजपा की राज्यसभा सदस्य रेखा शर्मा द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय चौधरी भजनलाल पर की गई कथित टिप्पणी ने प्रदेश का राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। मामला केवल एक बयान तक सीमित नहीं रहा। इस बयान के बाद चौधरी भजनलाल के पुत्र एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद कुलदीप बिश्नोई जिस प्रकार खुलकर सामने आए उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी।

कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं थी बल्कि उसमें अपने पिता की राजनीतिक विरासत और सम्मान के प्रति गहरी संवेदनशीलता साफ दिखाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जिस तीखे अंदाज में अपनी प्रतिक्रिया दी उससे यह संकेत मिलने लगे थे कि मामला अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा।

इसके अलावा राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ये भी अनुमान था कि जिस प्रकार कुलदीप बिश्नोई ने सांसद रेखा शर्मा और पार्टी के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है, संभवत: वे 3 जून को अपने पिता स्वर्गीय चौधरी भजन लाल की पुण्यतिथि पर कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं मगर तीन दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी दिल्ली स्थित बिश्नोई के आवास पर पहुंच गए और कई देर तक बातचीत की। इसके बाद आज फिर मुख्यमंत्री सैनी स्वर्गीय भजन लाल को श्रद्धांजलि देने के लिए आदमपुर पहुंचे।

ऐसे में अब पर्यवेक्षकों का मानना है कि तीन दिन में मुख्यमंत्री और कुलदीप की दूसरी मुलाकात को बिश्नोई की भाजपा में जहां रिश्तों की फिर से एक नई शुरूआत के रूप में देखा रहा है तो वहीं अब स्वयं कुलदीप व उनके समर्थक भाजपा द्वारा उनके परिवार को दिए जा रहे सम्मान से संतुष्ट नजर आते हैं। 

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श्रद्धांजलि सभा में उमड़े जनसैलाब ने बढ़ाई कुलदीप की ताकत
गौरतलब है कि हरियाणा की राजनीति में चौधरी भजनलाल को केवल एक नेता नहीं बल्कि एक राजनीतिक संस्था माना जाता रहा है। गांव की चौपाल से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक उनकी पकड़ थी। उन्होंने जिस सामाजिक समीकरण को खड़ा किया, उसने वर्षों तक हरियाणा की राजनीति की दिशा तय की। ऐसे में उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की टिप्पणी को उनके समर्थक व्यक्तिगत अपमान के रूप में देखते हैं। यही वजह रही कि रेखा शर्मा के कथित बयान के बाद आदमपुर से लेकर चंडीगढ़ तक राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया था।

राजनीतिक घटनाक्रम ने उस समय और दिलचस्प मोड़ ले लिया था जब भाजपा के तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ोली रेखा शर्मा के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। यह घटनाक्रम कुलदीप बिश्नोई के समर्थकों को और अधिक अखर गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कुलदीप बिश्नोई को यह उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व उनके पिता के सम्मान से जुड़े इस मुद्दे पर अधिक संवेदनशीलता दिखाएगा। लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उनकी नाराजगी सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी। सोशल मीडिया पर कुलदीप बिश्नोई के संदेशों ने अटकलों को और हवा दे दी। हरियाणा की राजनीति में यह चर्चा जोर पकडऩे लगी कि संभवत: वे कोई बड़ा राजनीतिक फैसला ले सकते हैं। खासतौर पर 3 जून यानी चौधरी भजनलाल की पुण्यतिथि को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं चलने लगीं।

राजनीतिक पर्यवेक्षक मानने लगे थे कि आदमपुर की श्रद्धांजलि सभा केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच भी बन सकती है। इसी बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सक्रियता ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। मुख्यमंत्री ने पिछले तीन दिनों में कुलदीप बिश्नोई से दो बार मुलाकात की और इन मुलाकातों को केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं माना गया बल्कि इसे भाजपा नेतृत्व द्वारा रिश्तों को संभालने की रणनीति के रूप में देखा गया। हरियाणा भाजपा भलीभांति जानती है कि हिसार और आदमपुर के अलावा हरियाणा के कई जिलों के साथ साथ पड़ोसी राज्यों पंजाब व राजस्थान में आज भी बिश्नोई परिवार का बड़ा जनाधार है। ऐसे में पार्टी किसी भी स्थिति में कुलदीप बिश्नोई की नाराजगी को लंबा नहीं खींचना चाहती थी। राजनीति में कई बार मुलाकातें शब्दों से अधिक संदेश देती हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का आदमपुर पहुंचना और श्रद्धांजलि सभा में शामिल होना भी राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना गया। इस कार्यक्रम में भारी संख्या में बिश्नोई समर्थकों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि चौधरी भजनलाल की राजनीतिक विरासत आज भी मजबूत है। गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की बड़ी भागीदारी ने यह संदेश दिया कि भजनलाल के उत्तराधिकारी के रूप में कुलदीप बिश्नोई की पकड़ आज भी मजबूत है। खास बात ये है कि इस सभा के लिए किसी प्रकार का कोई निमंत्रण नहीं दिया गया था मगर हरियाणा के साथ साथ राजस्थान से भी सभा में पहुंचे समर्थकों ने कुलदीप की ताकत को और बढ़ा दिया।

भाजपा की सियासत में इसलिए दिखाई दे रहे नए समीकरण
खास बात ये है कि हरियाणा की राजनीति में कुलदीप बिश्नोई हमेशा अपने स्पष्ट और बेबाक रवैये के लिए जाने जाते रहे हैं। चाहे कांग्रेस में उनका दौर रहा हो या बाद में भाजपा में शामिल होने का फैसला, उन्होंने कई बार यह साबित किया कि वे अपनी राजनीतिक पहचान को लेकर बेहद सजग हैं। यही कारण है कि जब भी उनके परिवार या राजनीतिक विरासत पर कोई सवाल खड़ा होता है तो वे मुखर होकर सामने आते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब कुलदीप बिश्नोई को लेकर नई रणनीति पर काम कर सकती है। पार्टी यह अच्छी तरह समझती है कि बिश्नोई समुदाय सहित कई सामाजिक वर्गों में कुलदीप बिश्नोई की मजबूत पकड़ है। ऐसे में आने वाले समय में उन्हें संगठन या सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। आदमपुर की श्रद्धांजलि सभा के बाद अब यह लगभग स्पष्ट माना जा रहा है कि भाजपा और कुलदीप बिश्नोई के रिश्तों में आई तल्खी धीरे-धीरे कम होगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी किसी भी कीमत पर इस विवाद को लंबा नहीं खींचना चाहती। वहीं कुलदीप बिश्नोई ने भी अपने समर्थकों के बीच संयमित संदेश देकर यह जताया है कि फिलहाल वे टकराव की राजनीति से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। हरियाणा की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में कई नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

यदि भाजपा कुलदीप बिश्नोई को नई जिम्मेदारी देती है तो यह केवल एक नेता को सम्मान देने का मामला नहीं होगा बल्कि यह हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में राजनीतिक समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति का हिस्सा भी माना जाएगा। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि चौधरी भजनलाल की विरासत आज भी हरियाणा की राजनीति में उतनी ही प्रभावशाली है, जितनी उनके जीवनकाल में हुआ करती थी।

सैनी की शालीनता से शांत हुआ विवाद
अहम बात ये है कि सांसद रेखा शर्मा व मोहन लाल बड़ोली के बयान को लेकर जहां कुलदीप बिश्नोई काफी मुखर हो गए थे और राजनीतिक गलियारों में भी कई तरह की चर्चाओं ने जन्म ले लिया तो इसी बीच पिछले माह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहल करते हुए न केवल चौधरी भजन लाल को सम्मानित नेता बताया बल्कि मामले को शांत करने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए। इसी की बानगी है कि हमेशा मुस्कुराते हुए दिखने वाले सी.एम. सैनी ने शालीनता का परिचय देते हुए इस सारे मामले का पटाक्षेप करने की मंशा से कुलदीप बिश्नोई से मिलने का निर्णय ले लिया और वे सोमवार को सांय कुलदीप बिश्नोई के दिल्ली स्थित आवास पर मिलने पहुंच गए।

इस दौरान दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बातचीत हुई। तीन दिन के अंतराल में ही नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर बड़प्पन दिखाया और बुधवार को आदमपुर में स्वर्गीय चौधरी भजन लाल की पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में पहुंच गए। काफी देर तक सभा में रहे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने स्वर्गीय चौधरी भजन लाल को श्रद्धासुमन अर्पित करने के साथ साथ कुलदीप बिश्नोई के पारिवारिक सदस्यों व उनके समर्थकों से भी मुलाकात की। ऐसे में कहा जा सकता है कि सी.एम. सैनी की शालीनता से ये विवाद अब शांत हो गया है। 

मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले ही होते हैं अपने: कुलदीप बिश्नोई।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान कुलदीप बिश्नोई का भावुक अंदाज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चौधरी भजनलाल आज भी लोगों के जहन में जीवित हैं। यह बयान केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति नहीं था, बल्कि उसमें राजनीतिक संदेश भी छिपा था।

कुलदीप बिश्नोई ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि उनके पिता की राजनीतिक विरासत केवल इतिहास नहीं बल्कि वर्तमान राजनीति में भी प्रभावशाली शक्ति है। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में साथ खड़े रहने वाले लोग ही असली अपने होते हैं। जब परिवार जुड़ा रहता है, तब कोई ताकत उसे कमजोर नहीं कर सकती। हमारे विरोधियों की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि मुश्किल समय में भी हमारा परिवार बिखरता नहीं। यह रिश्ता किसी राजनीतिक लाभ या स्वार्थ का नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और वर्षों की आत्मीयता का रिश्ता है।

सुख में साथ चलने वाले बहुत मिल जाते हैं, लेकिन जो लोग कठिन समय में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं, वही परिवार कहलाते हैं। यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। स्वर्गीय चौधरी भजनलाल की पुण्यतिथि पर हजारों की संख्या में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि चौधरी साहब आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं। लोगों का यह स्नेह, सम्मान और आशीर्वाद हमारे लिए अमूल्य धरोहर है। आज उनकी समाधि जन प्रेरणा स्थल पर अपना साथ, अपना सहयोग और अपना आशीर्वाद देने आप सबका इस तरह उमडक़र आना मेरे लिए सिर्फ समर्थन नहीं है, यह मेरे लिए भावनाओं का सागर है।

उन्होंने कहा कि मैं दिल की गहराइयों से हर उस व्यक्ति का आभार व्यक्त करता हूं जो इस अवसर पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां पहुंचा है। विशेष रूप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से इस आयोजन को सम्मान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आप सभी का यह प्रेम और विश्वास हमें और अधिक जिम्मेदारी, समर्पण और सेवा के भाव से आगे बढऩे की प्रेरणा देता है।

 

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