Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 23 Jun, 2026 08:01 PM

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की विवादित वीडियो के मामले में गुड़गांव पुलिस की डीएलएफ सेक्टर-29 थाना पुलिस ने पंजाब सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
गुड़गांव (ब्यूरो): पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की विवादित वीडियो के मामले में गुड़गांव पुलिस की डीएलएफ सेक्टर-29 थाना पुलिस ने पंजाब सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। एक व्यक्ति ने शिकायत देकर आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उन पर दबाव देकर फर्जी रिपोर्ट तैयार कराई। इसका ड्राफ्ट भी उन्हीं अधिकारियों के द्वारा तैयार करके दिया गया था। उनके कहे मुताबिक रिपोर्ट तैयार न करने पर शिकायतकर्ता व उसके परिवार को जान से मारने की धमकी तक दी गई। इतना ही नहीं इस कार्य के लिए उन्हें जबरन 10 लाख रुपए भी दिए गए। शिकायत के आधार पर एसीपी क्राइम-1 की जांच के बाद डीएलएफ सेक्टर-29 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318, 319(2), 336(2), 336(3), 340(1), 340(2), 111 व IT एक्ट की धारा 65, 66D के तहत अरुण महेंद्रू व अंकित के खिलाफ केस दर्ज किया है। मामले की जांच अपराध शाखा सेक्टर-40 को सौंपी गई है।
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पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता जसप्रीत उर्फ जस्सी ने शिकायत में बताया कि वह डिजिटल फोरेंसिक, साइबर जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य विश्लेषण से जुड़ा हुआ है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने स्वयं को पंजाब सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बताकर उससे संपर्क किया। आरोप है कि वायरल वीडियो के संबंध में ऐसी फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने का दबाव बनाया गया, जिसमें पहले से तय निष्कर्ष के आधार पर वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान से इनकार किया जा सके। इसके लिए 15 जून को होटल क्राउन प्लाजा में कथित बड़े साहब ने उनके साथ बैठक की। इसमें दबाव देकर कहा गया कि उन्हें वीडियो के संदर्भ में यह रिपोर्ट देनी है कि यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाई गई है और इसमें दिखाई दे रहा व्यक्ति पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि मना करने के बाद उनके साथ जबरन 16 जून को दोबारा मीटिंग की गई और यह रिपोर्ट तैयार न करने पर उनके व परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस बारे में उन्होंने अपने परिचित अरुण महेंद्रू से बात की और उनके बताने के बाद उन्होंने जींद के रहने वाले अंकित से बात की और उन्हें कहा गया कि दो रिपोर्ट तैयार की जाएं और दोनों ही रिपोर्ट को अलग-अलग पैन ड्राइव में डालकर निजी तौर पर उनके सहयोगियों ने उन तक पहुंचाया। इन रिपोर्ट का ड्राफ्ट भी इन्हीं लोगों के द्वारा तैयार कर उन्हें भेजा गया। शिकायत में यह भी आरोप है कि इस कार्य के लिए भारी धनराशि का प्रलोभन दिया गया तथा कथित रूप से 10 लाख रुपये नकद उपलब्ध कराए गए। यह रुपयों उन्होंने जबरन उनकी गाड़ी में रखवा दिए।
पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता को रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्थाओं और दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर संदेह हुआ। आरोप है कि आपत्ति जताने पर उसे धमकियां दी गईं और मामला सार्वजनिक न करने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद प्रारंभिक जांच, तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस उपायुक्त अपराध के मार्गदर्शन में उप-निरीक्षक ललित, प्रभारी अपराध शाखा सेक्टर-40 के नेतृत्व में गठित टीम ने कार्रवाई करते हुए अरुण महेंदरु (25), निवासी अग्रसेन कॉलोनी, सिरसा और अंकित (25), निवासी खरक गागर, जींद को गिरफ्तार किया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर कथित फर्जी रिपोर्ट तैयार करने में शामिल अन्य लोगों, रिपोर्ट जारी करने वाली संस्थाओं की वैधता, धनराशि के स्रोत एवं लेन-देन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तथा डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों और संभावित लाभार्थियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आपको बता दें कि कि मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े 39 सेकंड के कथित वीडियो को लेकर पंजाब में राजनीतिक और धार्मिक विवाद जारी है। पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी ने पहले दो फोरेंसिक लैब की रिपोर्ट के आधार पर दावा किया था कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं है। दूसरी ओर, अकाल तख्त ने पूर्व में दो केंद्रीय फोरेंसिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए वीडियो को वास्तविक और एआई से तैयार नहीं बताया था। गुरुग्राम पुलिस ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्यों या फोरेंसिक जांच को प्रभावित करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है।