मनी लॉन्ड्रिंग केस में अपोलो इंटरनेशनल के पूर्व  CFO को ED ने किया गिरफ्तार

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 08 Jul, 2026 10:05 AM

former cfo of apollo international arrested by ed in case of money laundering

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (पूर्व नाम मेसर्स अपोलो इंटरनेशनल लिमिटेड) के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) राकेश गुप्ता को गिरफ्तार कर...

गुड़गांव, (ब्यूरो): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हाई-प्रोफाइल मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मेसर्स अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (पूर्व नाम मेसर्स अपोलो इंटरनेशनल लिमिटेड) के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) राकेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी इंदरजीत सिंह और अन्य के खिलाफ चल रही वित्तीय धोखाधड़ी व रंगदारी की जांच के सिलसिले में की गई है।

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ईडी के अनुसार गुरुग्राम स्थित विशेष पीएमएलए कोर्ट द्वारा जारी चार समनों का लगातार उल्लंघन करने और अदालत द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे पांच दिनों की ईडी रिमांड पर भेज दिया है।

 

इस पूरे मामले की जड़ें हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा कुख्यात अपराधी इंदरजीत सिंह और उसके गुर्गों के खिलाफ दर्ज की गई 15 से अधिक एफआईआर और चार्जशीट से जुड़ी हैं। इन मामलों में शस्त्र अधिनियम, आईपीसी और बीएनएस की कई गंभीर धाराएं शामिल हैं। ईडी की जांच में सामने आया है कि इंदरजीत सिंह हरियाणा पुलिस के कई संगीन मामलों में मुख्य वांछित अपराधी है और वर्तमान में वह कानून से बचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात में छिपा हुआ है, जहां से वह अपना सिंडिकेट चला रहा है।

 

ईडी के वित्तीय अनुसंधान में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अपोलो ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और कुछ अन्य बड़े कॉर्पोरेट घरानों ने हरियाणा के डीघल और झज्जर स्थित निजी फाइनेंसरों से करीब 200 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज लिया था। इस लोन की एवज में सिक्योरिटी के तौर पर पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे। बाद में कॉर्पोरेट कंपनियों ने मूलधन और ब्याज, दोनों का ही भुगतान करने में चूक कर दी। जब फाइनेंसरों ने पैसे वापस मांगे, तो पूर्व सीएफओ राकेश गुप्ता ने इस विवाद को सुलझाने के लिए कुख्यात अपराधी इंदरजीत सिंह को अपोलो समूह से मिलवाया और उसकी आपराधिक सेवाओं का इस्तेमाल किया।

 

जांच में यह साफ हुआ है कि इंदरजीत सिंह विदेशों से संचालित होने वाले संगठित अपराध गिरोहों और स्थानीय शूटरों के दम पर करोड़ों रुपये के इन हाई-वैल्यू लोन विवादों का जबरन निपटारा करवाता था। वह कर्ज देने वाले फाइनेंसरों को हथियारों के बल पर डराता-धमकाता था ताकि वे अपना पैसा भूल जाएं। इसी सिलसिले में डीघल के एक बड़े निजी फाइनेंसर की कथित तौर पर हत्या भी कर दी गई थी, जिसमें इंदरजीत सिंह मुख्य आरोपी है और फरार चल रहा है। राकेश गुप्ता पर इस पूरी साजिश को रचने और अपराधी को संरक्षण देने का आरोप है।

 

इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने के लिए ईडी पहले भी कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। इस सर्च ऑपरेशन के दौरान केंद्रीय एजेंसी ने 6.41 करोड़ की भारी नकदी, 17.4 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण और पांच लग्जरी गाड़ियां जब्त की थीं। इसके अलावा निदेशालय अब तक आरोपियों की करीब 90.04 करोड़ की चल-अचल संपत्ति को अटैच कर चुका है।

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