Haryana : 100 करोड़ के चर्चित फिटनेस स्टार्टअप 'ग्रैनिमल्स' पर आपराधिक जांच तेज, स्टेट क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट

Edited By Krishan Rana, Updated: 20 Jul, 2026 09:14 PM

criminal investigation into the high profile 100 crore fitness startup granima

ऑनलाइन फिटनेस एवं रिहैबिलिटेशन प्लेटफॉर्म ग्रैनिमल्स एब्सोल्यूट फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवाद ने

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): ऑनलाइन फिटनेस एवं रिहैबिलिटेशन प्लेटफॉर्म ग्रैनिमल्स एब्सोल्यूट फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवाद ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। करोड़ों रुपये की वैल्यू वाले इस स्टार्टअप से संबंधित शिकायत की जांच कर रही हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच, पंचकूला ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी है। जांच में कंपनी के कुछ पदाधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ फंड डायवर्जन, आपराधिक विश्वासघात, धमकी तथा आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई है।

एडवोकेट विनायक बंसल ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि कंपनी के सह-संस्थापक रोचन कक्कड़ ने 14 जून 2025 को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि वर्ष 2021 में उन्होंने आमीन गोयल और सिद्धार्थ उनियाल के साथ मिलकर ग्रैनिमल्स की स्थापना की थी तथा तीनों की कंपनी में समान हिस्सेदारी थी। शिकायत के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का टर्नओवर लगभग 9.47 करोड़ रुपये रहा।

शिकायत में कहा गया कि वर्ष 2025 में संस्थापकों के बीच मतभेद बढ़ने के बाद रोचन कक्कड़ पर अपने शेयर बेचने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि इनकार करने पर कंपनी के ई-मेल, आंतरिक सिस्टम और अन्य कारोबारी संचार माध्यमों तक उनकी पहुंच समाप्त कर दी गई।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि हीलपेन रिकवरी केयर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नई कंपनी बनाकर ग्रैनिमल्स के ग्राहकों, कर्मचारियों तथा गोपनीय कारोबारी डेटा को वहां स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई। साथ ही फर्जी इनवॉइस और थर्ड-पार्टी खातों के माध्यम से कंपनी के धन के कथित डायवर्जन के आरोप भी लगाए गए हैं।

मामला प्रारंभ में साइबर क्राइम प्रकोष्ठ को भेजा गया था, लेकिन राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में विवाद लंबित होने और मामले को सिविल प्रकृति का मानते हुए उस स्तर पर विस्तृत जांच नहीं की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अन्य कानूनी विकल्प अपनाए और अंततः मामला हरियाणा स्टेट क्राइम ब्रांच को जांच के लिए सौंपा गया।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता रोचन कक्कड़ के अलावा कंपनी की पूर्व एचआर मैनेजर एवं फाइनेंस हेड निधि शर्मा के बयान दर्ज किए गए। जांच एजेंसी ने व्हाट्सऐप चैट, कंपनी ई-मेल, प्रस्तुतीकरण (पीपीटी), वर्कशीट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का भी परीक्षण किया।

कानूनी राय में प्रथम दृष्टया अपराध बनने की बात
जांच के आधार पर प्राप्त कानूनी राय में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 316(2), 351(2) और 61(2) के तहत आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक धमकी और आपराधिक साजिश के प्रथम दृष्टया तत्व पाए जाने का उल्लेख किया गया है। राय में यह भी कहा गया कि किसी मामले के एनसीएलटी में लंबित होने मात्र से आपराधिक जांच स्वतः समाप्त नहीं होती, यदि उपलब्ध तथ्यों से स्वतंत्र आपराधिक अपराध के संकेत मिलते हों।

जांच के दायरे में सह-संस्थापक सिद्धार्थ उनियाल, आमीन गोयल, जयपाल शर्मा, कृष्ण वर्मा, संजीव कुमार गर्ग, तनवीश इनानी, करण शर्मा, विकास पंवार और हर्षित द्विवेदी के नाम शामिल बताए गए हैं। हालांकि, यह मामला फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपों की सत्यता और किसी भी व्यक्ति की दोषसिद्धि अथवा निर्दोषता का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।


 

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