कंपनी की सीज प्रॉपर्टी की फर्जी रजिस्ट्री कराने के केस में आरोपी गिरफ्तार

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 14 May, 2026 09:27 PM

one arrested in case of fraud in gurgaon

आर्थिक अपराध शाखा-1 ने पीजीएफ कंपनी की अटैच/सीज संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों से बेचने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली कागजों के आधार पर सुशांत लोक-3 का प्लॉट बेचकर धोखाधड़ी की थी।

गुड़गांव, (ब्‍यूरो): आर्थिक अपराध शाखा-1 ने पीजीएफ कंपनी की अटैच/सीज संपत्ति को फर्जी दस्तावेजों से बेचने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन और जाली कागजों के आधार पर सुशांत लोक-3 का प्लॉट बेचकर धोखाधड़ी की थी।

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दरअसल, 14 मार्च 2024 को नायब तहसीलदार की शिकायत पर सेक्टर-56 थाना में केस दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार पीजीएफ लिमिटेड की सुशांत लोक स्थित एक प्रॉपर्टी को फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन और गलत घोषणा के जरिए बेचकर सेल डीड रजिस्टर कराई गई। यह संपत्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति के नियंत्रण में थी।

 

मामले में ईओडब्ल्यू-1 की टीम ने पहले आरोपी राजेंद्र सिंह को बेंगलुरु से गिरफ्तार कर लिया। वह नेपाल के कैलाली जिले का रहने वाला है। उसने फर्जी नाम रविंदर प्रसाद रखकर आधार-पैन बनवाए और पीजीएफ कंपनी के नाम से करंट अकाउंट खुलवाकर खुद को प्रोपराइटर दर्शाया। फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन बनाकर प्लॉट बेचा और रकम का हिस्सा खाते में लेकर चेक से निकाल लिया। पूछताछ में बताया कि दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड था और ठगी में उसे 5 लाख रुपये मिले। इसके बाद आर्थिक अपराध शाखा-1, गुरुग्राम की पुलिस टीम ने कार्यवाही करते हुए एक और आरोपी को नेहरू स्टेडियम सिविल लाइन्स, गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान आसिफ (37) (फर्जी रविंदर मनराल) निवासी कैलाश विहार (दिल्ली) के रूप में हुई है।

 

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी दिल्ली में इलैक्ट्रिशियन के रूप में काम करता है। आरोपी द्वारा अन्य साथियों के साथ मिलकर फर्जी रविंदर मनराल (पीजीएफ कम्पनी का प्रतिनिधि) बनकर फर्जी दस्तावेज तैयार करके कम्पनी की संपति(प्लॉट) की रजिस्ट्री करवाई थी। आरोपी को इस ठगी के केस में पांच लाख रुपये मिलने वाले थे। लेकिन आरोपी को केवल 50 हजार रुपये मिले थे। पुलिस इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस अन्य आरोपियों की पहचान, फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।

 

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