अब डेटा बताएगा कहां बनेगी सड़क और कहां चाहिए शिक्षक, हरियाणा ने शुरू किया ‘एआई गवर्नेंस’ का नया मॉडल

Edited By Manisha rana, Updated: 07 Jun, 2026 03:55 PM

now the data will tell where the road will be built and where teachers needed

हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक निर्णयों को अधिक सटीक, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरुग्राम में ‘एआई सैंडबॉक्स’ की शुरुआत की है।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा सरकार ने प्रशासनिक निर्णयों को अधिक सटीक, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गुरुग्राम में ‘एआई सैंडबॉक्स’ की शुरुआत की है। यह पहल सरकारी कामकाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ विभागों की वास्तविक समस्याओं का तकनीकी समाधान खोजने का मंच बनेगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि नागरिकों की जरूरतों को केंद्र में रखकर शासन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की पहल बताया है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में फैसले केवल पारंपरिक प्रक्रियाओं पर नहीं, बल्कि वास्तविक आंकड़ों और विश्लेषण आधारित मॉडल पर लिए जाएं।

सरकारी समस्याओं के समाधान की ‘डिजिटल प्रयोगशाला’

एआई सैंडबॉक्स को एक ऐसे नियंत्रित प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है, जहां विभिन्न सरकारी विभाग अपनी चुनौतियां साझा करेंगे। इन समस्याओं के समाधान के लिए स्टार्टअप, शोध संस्थान, तकनीकी विशेषज्ञ और नवाचार क्षेत्र से जुड़े संगठन एआई आधारित मॉडल तैयार करेंगे। इन समाधानों को पहले सीमित स्तर पर परखा जाएगा और सफल साबित होने पर व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। यही वजह है कि इसे “टेस्ट बिफोर इन्वेस्ट” मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है, जहां बड़े निवेश से पहले तकनीक की प्रभावशीलता की जांच होगी।

पांच प्रमुख क्षेत्रों से हुई शुरुआत

राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत पांच महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों से की है। इनमें सड़कों की निगरानी, स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती, स्वास्थ्य सेवाओं का प्रबंधन, जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों का समाधान तथा जन शिकायत निवारण व्यवस्था शामिल हैं। आने वाले समय में कृषि, राजस्व, शहरी विकास, परिवहन, सामाजिक कल्याण और अन्य विभागों को भी इस मंच से जोड़ने की योजना है।

सड़क, स्कूल और अस्पतालों में दिखेगा असर

सरकार का मानना है कि एआई आधारित विश्लेषण से विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करना आसान होगा। यदि किसी क्षेत्र से लगातार सड़क खराब होने की शिकायतें आ रही हैं तो एआई उपलब्ध डेटा, तस्वीरों और लोकेशन जानकारी का विश्लेषण कर मरम्मत की प्राथमिकता तय करने में मदद करेगा। इसी तरह शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध शिक्षकों के आंकड़ों का अध्ययन कर यह पता लगाया जा सकेगा कि किस स्कूल में अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों के दबाव, संसाधनों की उपलब्धता और सेवा जरूरतों का विश्लेषण कर बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नागरिकों को मिलेंगी तेज और बेहतर सेवाएं

सरकार का दावा है कि इस तकनीक के माध्यम से योजनाओं और सेवाओं की डिलीवरी को अधिक तेज, पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकेगा। शिकायतों के निपटारे से लेकर संसाधनों के वितरण तक, हर स्तर पर निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेटा की गुणवत्ता और विभागों के बीच समन्वय बेहतर रहा तो यह मॉडल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकता है।

विश्व बैंक के सहयोग से आगे बढ़ रहा एआई मिशन

एआई सैंडबॉक्स राज्य के व्यापक कृत्रिम बुद्धिमत्ता विकास कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे विश्व बैंक के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। हरियाणा पहले से ही कौशल विकास, स्टार्टअप प्रोत्साहन और प्रशासनिक सुधारों में एआई के उपयोग को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है।

राव नरबीर सिंह बोले— तकनीक आधारित सुशासन की ओर बढ़ रहा हरियाणा

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि ‘एआई सैंडबॉक्स’ प्रशासन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उनके अनुसार यह मंच सरकारी विभागों की वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करेगा, जिससे योजनाओं का क्रियान्वयन बेहतर होगा और नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच अधिक तेज और प्रभावी बन सकेगी। हरियाणा की यह पहल संकेत देती है कि शासन व्यवस्था अब केवल डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि डेटा आधारित निर्णयों के माध्यम से नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक दक्षता को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है।
 

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