Edited By Isha, Updated: 06 Jun, 2026 08:40 PM

सैनिकों के पेंशन अधिकारों से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था, सेवा के दौरान उसमें कोई बीमारी
चंडीगढ़: सैनिकों के पेंशन अधिकारों से जुड़े एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी सैनिक को भर्ती के समय पूरी तरह चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया था, सेवा के दौरान उसमें कोई बीमारी या दिव्यांगता विकसित होती है तो सामान्यतः उसे सैन्य सेवा से संबंधित माना जाएगा। कोर्ट ने कहा कि केवल मेडिकल
बोर्ड की राय के आधार पर सैनिक को उसके वैधानिक लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त सार्जेंट जोगेंद्र सिंह के पक्ष में फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही दिव्यांगता पेंशन देने संबंधी सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के आदेश को बरकरार रखा गया।
सैनिकों के हक में क्यों बड़ा है यह फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से उन हजारों सेवानिवृत्त सैनिकों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी दिव्यांगता पेंशन को तकनीकी कारणों या मेडिकल बोर्ड की सख्त व्याख्याओं के चलते रोक दिया जाता था। यह निर्णय यह स्थापित करता है कि देश की रक्षा में तैनात जवानों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी और उनके सेवानिवृत्ति के बाद के अधिकार सर्वोपरि हैं।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि सशस्त्र बलों में सेवा के दौरान आने वाली चिकित्सीय दिक्कतों के लिए सैनिकों को कानूनी लाभ मिलना उनका वैधानिक अधिकार है, जिसे केवल प्रशासनिक या तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।0