बच्ची से दुष्कर्म मामला: महिला आयोग अध्यक्ष ने पीड़ित नाबालिग से की मुलाकात, प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

Edited By Isha, Updated: 07 Jun, 2026 06:57 PM

women s commission chairperson meets the minor victim

जिला कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में आज महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया पीड़ित लड़की से मिलने के लिए पहुंची। सरकारी अस्पताल में 15 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले को लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने गहरा दुख और रोष व्यक्त किया...

कुरुक्षेत्र(रणदीप): जिला कुरुक्षेत्र के एलएनजेपी अस्पताल में आज महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया पीड़ित लड़की से मिलने के लिए पहुंची। सरकारी अस्पताल में 15 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले को लेकर हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने गहरा दुख और रोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है तथा समाज का विश्वास जीतने वाले चिकित्सा पेशे पर गंभीर सवाल खड़े करती है। वही रेनू भाटिया ने अस्पताल प्रशासन को जमकर फटकार भी लगाई है।

महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें 29 मई को ही घटना की जानकारी मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तत्काल मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रशासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची पहली बार 27 अप्रैल को पेट दर्द की शिकायत लेकर अपनी दादी के साथ अस्पताल पहुंची थी। बाद में चिकित्सक द्वारा उसे बार-बार बुलाने और कथित रूप से अनुचित व्यवहार करने की शिकायत सामने आई। बच्ची के बयान के अनुसार उसके साथ गंभीर आपत्तिजनक हरकतें की गईं, जिससे वह मानसिक आघात में है।

महिला आयोग अध्यक्ष ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी नाबालिग या महिला मरीज की जांच के दौरान महिला स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच के दौरान कोई महिला नर्स मौजूद नहीं थी तो यह अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही है।

उन्होंने अस्पताल की पीएमओ और ड्यूटी पर मौजूद नर्सिंग स्टाफ की भूमिका की भी जांच की मांग करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीत होता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने की बात कही।

महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि पीड़ित बच्ची अभी भी मानसिक सदमे में है और उसकी नियमित काउंसलिंग आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि बच्ची को कुछ दिनों तक चिकित्सकीय निगरानी और मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जाए ताकि वह इस आघात से उबर सके।

उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी को किसी प्रकार की विशेष सुविधा या वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलना चाहिए। कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महिला आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों में महिला मरीजों की जांच संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने की मांग की।यह संस्करण समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य, संतुलित और कानूनी दृष्टि से सुरक्षित शैली में तैयार किया गया है।

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