1 जून को गुरुग्राम से हरियाणा में विकास का नायाब अध्याय लिखेंगे मुख्यमंत्री सैनी, विकास मॉडल को देंगे नई दिशा

Edited By Krishan Rana, Updated: 26 May, 2026 05:00 PM

on june 1 chief minister saini will write a unique chapter of development in ha

हरियाणा एक जून को औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाने

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा एक जून को औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी गुरुग्राम में आयोजित दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश के विकास मॉडल को नई दिशा देंगे। एक ओर जहां मुख्यमंत्री “मेक इन हरियाणा” औद्योगिक नीति एवं नौ नई क्षेत्रीय नीतियों का शुभारंभ करेंगे, वहीं दूसरी ओर “हरियाणा एआई सैंडबॉक्स” का उद्घाटन कर राज्य को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित प्रशासन और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की शुरुआत करेंगे।

राज्य सरकार इन पहलों को “विकसित हरियाणा-विकसित भारत” के विजन से जोड़कर देख रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा केवल पारंपरिक उद्योगों के आधार पर नहीं, बल्कि तकनीक, नवाचार, अनुसंधान और उच्च कौशल आधारित अर्थव्यवस्था के आधार पर तय होगी। इसी सोच के साथ हरियाणा को भविष्य के उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने की तैयारी की जा रही है।

'मेक इन हरियाणा” नीति बनेगी औद्योगिक विकास का नया आधार
गुरुग्राम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी “मेक इन हरियाणा” औद्योगिक नीति का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत इस नीति को प्रदेश के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है।

राज्य सरकार ने इस नीति के माध्यम से लगभग 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने तथा लगभग 20 लाख रोजगार अवसर सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार का उद्देश्य हरियाणा को देश के सबसे प्रतिस्पर्धी औद्योगिक राज्यों में शामिल करना है, जहां उद्योगों को विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचा, तेज प्रशासनिक स्वीकृतियां, कुशल मानव संसाधन और निवेश अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस नीति को अंतिम रूप देने से पहले उद्योग जगत के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया। नई दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में 22 और 23 अप्रैल 2026 को आयोजित उच्चस्तरीय परामर्श बैठकों में देश के बड़े औद्योगिक समूहों तथा प्रमुख उद्योग संगठनों ने भाग लिया था। इन बैठकों में उद्योग जगत द्वारा दिए गए सुझावों को नीति निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया गया।

सरकार का मानना है कि “मेक इन हरियाणा” नीति केवल औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह प्रदेश में विनिर्माण, निर्यात, कौशल विकास, रोजगार और तकनीकी नवाचार को नई गति देगी।

नौ नई क्षेत्रीय नीतियों से उभरते क्षेत्रों को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री इस अवसर पर नौ नई क्षेत्रीय नीतियों का भी शुभारंभ करेंगे। इन नीतियों के माध्यम से राज्य सरकार भविष्य की अर्थव्यवस्था आधारित क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
जिन नीतियों का शुभारंभ किया जाएगा, उनमें इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन नीति, फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसिज़ मैन्युफैक्चरिंग नीति , ग्लोबल कैपबिलिटी सेंटर नीति, नई डाटा सेंटर नीति, आई टी एवं आई टी ई एस नीति, टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति, इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति, एवीजीसी-एक्सआर नीति तथा अग्रि बिज़नेस नीति शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़ते वैश्विक निवेश को देखते हुए हरियाणा के पास बड़ा अवसर मौजूद है। विशेष रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, सोनीपत और पंचकूला जैसे क्षेत्रों को तकनीक एवं नवाचार आधारित औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

सूचना प्रौद्योगिकी, डाटा सेंटर, ग्लोबल कैपबिलिटी सेंटर तथा डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नई नीतियों से प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कृषि व्यवसाय नीति और टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग नीति जैसे कदम पारंपरिक और उभरते उद्योगों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

गुरुग्राम विश्वविद्यालय में होगा “हरियाणा एआई सैंडबॉक्स” का शुभारंभ
एक जून को ही गुरुग्राम विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी “हरियाणा एआई सैंडबॉक्स” का भी उद्घाटन करेंगे। यह पहल हरियाणा एआई विकास परियोजना के अंतर्गत विकसित की गई है और इसमें विश्व बैंक सहयोगी भागीदार के रूप में जुड़ा हुआ है।
“सैंडबॉक्स” एक नियंत्रित परीक्षण मंच होता है, जहां नई तकनीकों और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों को वास्तविक परिस्थितियों में परखा जाता है। इसका उद्देश्य नई तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले उनकी उपयोगिता, प्रभावशीलता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना है।
इस मंच के माध्यम से नवउद्यमों, शोध संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थाओं को राज्य सरकार की वास्तविक समस्याओं के समाधान विकसित करने का अवसर मिलेगा। प्रारंभिक चरण में शिकायत निवारण, सड़क एवं शहरी आधारभूत ढांचा, विद्यालय शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और जल आपूर्ति जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

हरियाणा एआई विकास परियोजना : तकनीक आधारित भविष्य की तैयारी
हरियाणा एआई विकास परियोजना को राज्य सरकार की भविष्य उन्मुख तकनीकी पहल माना जा रहा है। लगभग 474 करोड़ रुपये की इस परियोजना को राज्य सरकार और विश्व बैंक के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
परियोजना के अंतर्गत एक लाख से अधिक युवाओं को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ-साथ नवउद्यमों को प्रोत्साहन, डाटा संसाधनों की उपलब्धता, संगणना क्षमता, डिजिटल नवाचार और एआई आधारित प्रशासनिक समाधान विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

राज्य सरकार का मानना है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आने वाले समय में प्रशासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, जल प्रबंधन और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन का आधार बनेगी। इसी कारण हरियाणा इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की दिशा में सक्रिय रूप से आगे बढ़ रहा है।

निवेश, नवाचार और रोजगार आधारित विकास मॉडल की ओर बढ़ता हरियाणा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि हरियाणा केवल पारंपरिक औद्योगिक राज्य बनकर नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य की तकनीकों और वैश्विक उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनेगा। राज्य सरकार द्वारा डाटा सेंटर, ग्लोबल कैपबिलिटी सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित नीतियों और तकनीकी पहलों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो हरियाणा आने वाले वर्षों में निवेश, नवाचार, निर्यात, रोजगार और उन्नत विनिर्माण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। एक जून को गुरुग्राम में होने वाले ये दोनों कार्यक्रम हरियाणा की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखे जा रहे हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन पहलों के माध्यम से हरियाणा केवल औद्योगिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार और भविष्य की अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी नई पहचान स्थापित करेगा।

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