जिस अंबाला छावनी ने सूरजभान और सुषमा स्वराज दिए, मगर अंबाला को विकास की नई पहचान केवल अनिल विज ने दी

Edited By Isha, Updated: 22 May, 2026 07:41 PM

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हरियाणा का प्रवेश द्वार कहलाने वाला अंबाला छावनी केवल भौगोलिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं रहा, बल्कि देश की राजनीति को भी इस धरती ने कई बड़े चेहरे दिए हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्त

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा का प्रवेश द्वार कहलाने वाला अंबाला छावनी केवल भौगोलिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं रहा, बल्कि देश की राजनीति को भी इस धरती ने कई बड़े चेहरे दिए हैं। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए रणनीतिक महत्व रखने वाली इस धरती ने भारतीय राजनीति को स्वर्गीय सूरजभान, स्वर्गीय सुषमा स्वराज और वर्तमान में सात बार के विधायक तथा हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री अनिल विज जैसे बड़े नेता दिए।

अंबाला छावनी ने सूरजभान और सुषमा स्वराज को राजनीति के फर्श से उठाकर राष्ट्रीय राजनीति के शिखर तक पहुंचाया। दोनों नेताओं ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई और बड़े संवैधानिक पदों तक पहुंचे। लेकिन अंबाला छावनी के विकास को जिस स्तर की निरंतरता और दिशा मिलनी चाहिए थी, वह लंबे समय तक दिखाई नहीं दी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब अंबाला को बड़े विकास की आवश्यकता थी, उस समय सूरजभान राष्ट्रीय राजनीति और राज्यपाल पद की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो चुके थे, जबकि सुषमा स्वराज अंबाला की राजनीति से आगे बढ़कर दिल्ली की राजनीति में स्थापित हो गईं और बाद में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। ऐसे में अंबाला छावनी को एक ऐसे स्थानीय नेतृत्व की जरूरत थी जो पूरी तरह क्षेत्र के विकास को समर्पित होकर कार्य करे।

2014 के बाद बदली अंबाला छावनी की तस्वी
हरियाणा में वर्ष 2014 में भाजपा पहली बार अपने दम पर सत्ता में आई और अनिल विज कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद अंबाला छावनी में विकास की जो रफ्तार शुरू हुई, उसने पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। अपनी ईमानदार, बेबाक और निष्पक्ष छवि के कारण विज ने जनता के बीच अलग पहचान बनाई और उसी भरोसे के साथ विकास कार्यों को गति दी।
राजनीतिक विरोधी भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि अनिल विज की सबसे बड़ी ताकत उनका व्यक्तिगत स्वार्थ से दूर रहना है। न तो परिवारवाद का दबाव और न ही निजी हितों की राजनीति—यही कारण रहा कि उन्होंने स्वयं को पूरी तरह जनता और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रखा।

भाजपा सरकार बनने के बाद अनिल विज ने जिस प्रकार लगातार जनता के बीच रहकर काम किया, उसने उन्हें आम लोगों का नेता बना दिया। लोगों के सुख-दुख में शामिल होना, समस्याओं को व्यक्तिगत रूप से सुनना और सार्वजनिक हित के कार्यों को प्राथमिकता देना उनकी कार्यशैली की पहचान बन गया।
आज यदि कोई व्यक्ति 10-12 वर्ष पुराने अंबाला छावनी की तुलना वर्तमान अंबाला से करे तो उसे बदलाव साफ दिखाई देता है। सड़कें, सौंदर्यीकरण, पार्क, स्वागत द्वार और ऐतिहासिक प्रतीकों के संरक्षण ने अंबाला को नई पहचान दी है।

कभी साइंस सिटी और सैन्य छावनी के रूप में पहचाने जाने वाले अंबाला को अब विकासशील शहर के रूप में देखा जाने लगा है। शहर में प्रवेश करते ही भव्य स्वागत द्वार लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं और आधुनिक सौंदर्यीकरण अंबाला की नई पहचान बन चुका है। इतिहास और राष्ट्रभक्ति को सम्मान देने की दिशा में भी अनिल विज ने कई पहल कीं। अंबाला छावनी में आजादी के महानायक सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं स्थापित करवाई गईं। अब राजगुरु और सुखदेव की प्रतिमाएं लगाने की तैयारी भी चर्चा में है।
अंबाला छावनी स्थित सुभाष पार्क आज शहर की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाला प्रमुख स्थान बन चुका है। यहां विकसित हरित क्षेत्र, आधुनिक संरचना और साफ-सफाई लोगों को आकर्षित करती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल एक पार्क नहीं, बल्कि बदलते अंबाला की पहचान का प्रतीक बन चुका है।

लोगों के दिलों को छू रहे विज के शब्द
इन दिनों अनिल विज के कुछ शब्द अंबाला छावनी की जनता के बीच विशेष चर्चा का विषय बने हुए हैं। विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनके हालिया वक्तव्य में साफ दिखाई देती है। विज ने कहा—
“अम्बाला छावनी का विकास करने के लिए मैंने जी-जान लगाई है। मैं विश्वास दिलाता हूं कि आखिरी सांस तक विकास कराने के लिए कार्य करता रहूंगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और कार्यशैली का प्रतिबिंब है। पिछले एक दशक में जिस प्रकार उन्होंने अंबाला छावनी के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया, उससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र के प्रति उनका जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं बल्कि भावनात्मक भी है।

विकास की राजनीति का अलग मॉडल
हरियाणा की राजनीति में लंबे समय तक जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का प्रभाव देखने को मिला, लेकिन अनिल विज ने विकास आधारित राजनीति को अपनी पहचान बनाया। यही कारण है कि सात बार विधायक बनने के बावजूद उनकी लोकप्रियता लगातार बनी हुई है। अंबाला छावनी की बदलती तस्वीर को देखकर आज यह चर्चा आम है कि जिस धरती ने राष्ट्रीय राजनीति को बड़े चेहरे दिए, उसी अंबाला को वास्तविक विकास की तेज रफ्तार और नई पहचान देने का श्रेय सबसे अधिक यदि किसी एक नेता को जाता है, तो वह नाम अनिल विज का है।अंबाला में दर्जनों प्रोजेक्ट कंप्लीट हो चुके हैं व दर्जनों लगातार जारी भी है।

 

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