अंबाला बोरवेल हादसा: मासूम निरवैर को बचाने की जंग जारी, देर शाम पहुंचे मंत्री अनिल विज ने परिजनों को बंधाया ढांढस

Edited By Krishan Rana, Updated: 30 Jun, 2026 09:27 PM

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अंबाला जिले के गांव धन्होड़ा में बोरवेल में गिरे चार वर्षीय मासूम निरवैर को सुरक्षित बाहर निकालने के

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): अंबाला जिले के गांव धन्होड़ा में बोरवेल में गिरे चार वर्षीय मासूम निरवैर को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए प्रशासन, सेना और एनडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। इस बीच हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज स्वयं घटना स्थल पर देर शाम पहुंचे और बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और रेस्क्यू टीम से अभियान की पूरी जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

रेस्क्यू अभियान के दौरान अनिल विज ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। उन्होंने बच्चे के दादा को अपने हाथों से पानी पिलाकर ढांढस बंधाया। इस दौरान परिजन भावुक हो गए और रोते-बिलखते हुए अपनी पीड़ा मंत्री के सामने रखी। विज ने परिवार को भरोसा दिलाया कि सरकार और प्रशासन मासूम को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

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घटना के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। उपायुक्त अजय तोमर की निगरानी में सेना और एनडीआरएफ की संयुक्त टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। विशेषज्ञों की मदद से हर संभव तकनीक अपनाई जा रही है ताकि निर्भय तक सुरक्षित पहुंचा जा सके।

खुले बोरवेलों पर फिर खड़े हुए बड़े सवाल
धन्होड़ा की यह घटना एक बार फिर प्रदेश और देश में खुले बोरवेलों की समस्या को उजागर कर रही है। हर वर्ष ऐसे कई हादसे सामने आते हैं, जिनमें मासूम बच्चे खुले या परित्यक्त बोरवेल में गिर जाते हैं। कुछ बच्चों की जान समय रहते बचा ली जाती है, लेकिन कई परिवारों को अपूरणीय क्षति झेलनी पड़ती है।

सरकार की ओर से खुले बोरवेलों को बंद करने और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाए गए हैं, लेकिन उनकी प्रभावी पालना अब भी चुनौती बनी हुई है। सवाल यह है कि जब खेतों की सिंचाई या पेयजल के लिए नया बोरवेल बनाया जाता है तो उपयोग के बाद उसे सुरक्षित ढंग से बंद क्यों नहीं किया जाता? संबंधित लोगों की यह नैतिक जिम्मेदारी भी है कि वे बोरवेल को ढक्कन या मजबूत व्यवस्था से पूरी तरह बंद करें, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी नियम पर्याप्त नहीं हैं। समाज के प्रत्येक नागरिक को भी अपने आसपास खुले पड़े बोरवेलों की जानकारी प्रशासन को देनी चाहिए। समय रहते शिकायत होने पर कई हादसों को रोका जा सकता है। स्थानीय पंचायतों और प्रशासन को भी ऐसे स्थानों का नियमित निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
 

अभिभावकों को भी रहना होगा सतर्क
अधिकांश मामलों में छोटे बच्चे खेलते-खेलते अनजाने में हादसों का शिकार हो जाते हैं। इसलिए अभिभावकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। बच्चों को खुले मैदान, खेत या निर्माण स्थलों पर ले जाते समय उन पर लगातार नजर रखनी चाहिए। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि आसपास खुले गड्ढे, बिजली के तार, जहरीले रसायन या अन्य खतरनाक वस्तुएं उनकी पहुंच में न हों।
 

प्रिंस की यादें हुईं ताजा, निर्भय के लिए दुआओं का दौर
धन्होड़ा की घटना ने करीब दो दशक पहले कुरुक्षेत्र के हलदाहेड़ी गांव में बोरवेल में गिरे मासूम प्रिंस की यादें ताजा कर दी हैं। उस समय प्रशासन और सेना ने कई दिनों तक चले कठिन अभियान के बाद प्रिंस को सकुशल बाहर निकाल लिया था। हालांकि निर्भय का मामला अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जिस बोरवेल में वह गिरा है उसमें पानी भी मौजूद है, जिससे रेस्क्यू अभियान और जटिल हो गया है।
फिलहाल पूरे हरियाणा के साथ-साथ देशभर के लोग मासूम निर्भय की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। सभी की यही कामना है कि रेस्क्यू अभियान सफल हो और निर्भय सुरक्षित अपने परिवार के बीच लौट आए।

 

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