Edited By Krishan Rana, Updated: 12 Aug, 2026 09:24 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने NDPS मामले में 42.8 किलो गांजा बरामदगी के आरोप में
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने NDPS मामले में 42.8 किलो गांजा बरामदगी के आरोप में 26 महीने से जेल में बंद मोहित लाल को नियमित जमानत दे दी। कोर्ट ने माना कि बरामदगी व्यावसायिक मात्रा की है और ऐसे मामले में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 की कड़ी शर्तें लागू होती हैं। हालांकि, लंबे समय तक हिरासत और मुकदमे की धीमी प्रगति को देखते हुए कोर्ट ने जमानत देना उचित माना।
जस्टिस जसजीत सिंह बेदी ने मोहित लाल की याचिका स्वीकार करते हुए उसकी रिहाई के आदेश दिए। मामला पलवल जिले के होडल थाने में 21 जून 2024 को दर्ज एफआईआर से जुड़ा है।
वाहन से बरामद हुआ था 42.8 किलो गांजा
पुलिस के अनुसार, वाहन चालक अभिषेक और मोहित लाल को पकड़ा गया था। तलाशी के दौरान उनके वाहन से 42.8 किलो गांजा बरामद होने का आरोप है। मामले में सहआरोपित अभिषेक को पहले ही जमानत मिल चुकी है। मोहित लाल ने हाई कोर्ट में खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है। उसने एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 42 और 50 के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने का भी दावा किया।
26 महीने से जेल में, 32 गवाह लेकिन गवाही सिर्फ एक की
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वह 21 जून 2024 से लगातार हिरासत में है और उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने कुल 32 गवाह बनाए हैं, लेकिन सुनवाई के दौरान अब तक केवल एक गवाह की गवाही हो सकी है। राज्य सरकार ने व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ बरामद होने का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि मोहित लाल का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
धारा 37 की कठोरता पर संवैधानिक अधिकार भारी
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी वाले मामलों में धारा 37 की शर्तें महत्वपूर्ण हैं। इसके बावजूद किसी आरोपी को लंबे समय तक मुकदमे के बिना हिरासत में रखना उसके त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकार को प्रभावित कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे की धीमी गति और लंबी हिरासत कुछ परिस्थितियों में धारा 37 की कठोरता को कम करने का आधार बन सकती है।
जमानत के साथ लगाईं कड़ी शर्तें
कोर्ट ने मोहित लाल को जमानत देते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं। उसे प्रत्येक महीने संबंधित थाने में उपस्थित होकर यह बताना होगा कि वह किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं है। इसके अलावा उसे एक लाख रुपये की एफडीआर भी जमा करनी होगी। हाई कोर्ट ने इन शर्तों के साथ उसकी रिहाई का आदेश जारी किया।
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