रासायनिक खेती को छोड़ गुरनाम सिंह ने अपनाया 'ऑर्गेनिक फॉर्मूला', 3 एकड़ में गेंदा, अरबी और गन्ने से कमा रहे बंपर मुनाफा

Edited By Isha, Updated: 05 Jul, 2026 03:36 PM

moving away from chemical farming gurnam singh has adopted an  organic formula

रासायनिक खेती के बढ़ते दौर में जहां किसान महंगे उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं कुछ किसान अपनी मेहनत और नए प्रयोगों से खेती की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे ही एक प्रगतिशील

यमुनानगर(परेवज खान): रासायनिक खेती के बढ़ते दौर में जहां किसान महंगे उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहीं कुछ किसान अपनी मेहनत और नए प्रयोगों से खेती की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसे ही एक प्रगतिशील किसान हैं गुरनाम सिंह, जिन्होंने पिछले पांच वर्षों से ऑर्गेनिक फार्मिंग अपनाकर न केवल अच्छी आमदनी हासिल की है, बल्कि लोगों को स्वस्थ और सुरक्षित खाद्यान्न उपलब्ध कराने का भी संदेश दिया है। आइए देखते हैं हमारी यह खास रिपोर्ट।

 प्राकृतिक खेती की यह तस्वीर किसी मिसाल से कम नहीं है। खेतों में दूर-दूर तक लहलहाते गेंदे के फूल, हरे-भरे अरबी के पत्ते और शानदार गन्ने की फसल इस बात का प्रमाण हैं कि बिना रासायनिक खाद और जहरीले कीटनाशकों के भी खेती सफल हो सकती है। प्रगतिशील किसान गुरनाम सिंह करीब तीन एकड़ भूमि पर पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले पांच वर्षों से उन्हें इस खेती से लगातार अच्छा मुनाफा मिल रहा है और फसल की गुणवत्ता भी पहले से कहीं बेहतर हुई है। 

गुरनाम सिंह बताते हैं कि वह गाय के गोबर, गोमूत्र और खल जैसी प्राकृतिक सामग्री से स्वयं जैविक खाद तैयार करते हैं। यही खाद उनकी फसलों को पोषण देती है और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत लगभग खत्म हो जाती है। उनका मानना है कि ऑर्गेनिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है, बल्कि लोगों को बीमारियों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

 खास बात यह है कि उनके खेत में खिले गेंदे के फूलों की रंगत और गुणवत्ता देखते ही बनती है। बाजार में भी उनकी ऑर्गेनिक फसल की अच्छी मांग रहती है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है। गुरनाम सिंह का कहना है कि हरियाणा सरकार की ओर से समय-समय पर उन्हें प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सहयोग मिलता रहा है। वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत उन्हें कई फसलों पर सब्सिडी और खेती के लिए आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। 

प्रगतिशील किसान गुरनाम सिंह की यह पहल उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो कम लागत में अधिक मुनाफे के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ समाज की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं। यदि अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं तो खेती लाभकारी होने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

 

 

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