श्रमिक हित सर्वोपरि : श्रम मंत्री के रूप में अनिल विज के सुधारों ने बदली श्रम विभाग की कार्यशैली

Edited By Krishan Rana, Updated: 04 Jul, 2026 05:09 PM

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हरियाणा सरकार में श्रम मंत्री के रूप में अनिल विज ने श्रम विभाग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा सरकार में श्रम मंत्री के रूप में अनिल विज ने श्रम विभाग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और श्रमिक हितैषी बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रम विभाग का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सरकार द्वारा संचालित प्रत्येक कल्याणकारी योजना का लाभ वास्तविक श्रमिक तक पहुंचे। इसी सोच के साथ उन्होंने विभाग में व्याप्त अनियमितताओं पर सख्ती दिखाई और व्यापक सुधारों की शुरुआत की।

फर्जीवाड़े पर सबसे बड़ी कार्रवाई
श्रम मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद अनिल विज ने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा कराई। जांच के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी वर्क स्लिप और फर्जी पंजीकरण के मामले सामने आए। विज ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि श्रमिकों के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकारी धन केवल वास्तविक पात्र श्रमिकों तक ही पहुंचेगा।

श्रम विभाग में पारदर्शिता की नई शुरुआत
अनिल विज ने श्रम विभाग में डिजिटल और तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने विभागीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने, ऑनलाइन निगरानी बढ़ाने तथा प्रत्येक आवेदन और भुगतान की जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस पहल का उद्देश्य भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करना तथा श्रमिकों को बिना किसी बिचौलिये के सरकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। 

नई श्रमिक कल्याण योजनाओं की तैयारी
श्रम मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बदलते औद्योगिक परिवेश के अनुरूप नई श्रमिक कल्याण योजनाएं तैयार की जाएं। उन्होंने श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा कवच को मजबूत करने, कौशल विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण पर आधारित नई योजनाओं का खाका तैयार करने पर जोर दिया।

न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी
अनिल विज के कार्यकाल में विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि की गई। सरकार का मानना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में श्रमिकों की आय बढ़ाना आवश्यक है ताकि उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।
इस निर्णय से राज्य के लाखों श्रमिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिला और उनके परिवारों की आय में वृद्धि हुई।

नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
केंद्र सरकार द्वारा लागू नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी अनिल विज ने सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने राज्यों के बीच समान व्यवस्था विकसित करने तथा श्रमिकों एवं उद्योगों दोनों के हितों को संतुलित रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों का उद्देश्य उद्योगों को प्रोत्साहन देना जितना आवश्यक है, उतना ही श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी है।

श्रमिक संगठनों से लगातार संवाद
अनिल विज ने श्रमिक संगठनों के साथ नियमित संवाद की परंपरा को मजबूत किया। विभिन्न बैठकों और मजदूर दिवस जैसे आयोजनों में उन्होंने श्रमिक प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके समाधान का भरोसा दिलाया।
उन्होंने स्वयं को "श्रमिकों का प्रतिनिधि" बताते हुए कहा कि सरकार श्रमिकों की हर जायज मांग पर गंभीरता से विचार करेगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
श्रम विभाग में वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी लाभार्थियों और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में विज ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रमिकों के कल्याण के लिए आवंटित एक-एक रुपये का सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रशासनिक जवाबदेही पर विशेष जोर
विभागीय अधिकारियों की नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से अनिल विज ने कार्य संस्कृति में जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया। लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण, शिकायतों के समयबद्ध समाधान तथा योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए।

निष्कर्ष
श्रम मंत्री के रूप में अनिल विज का कार्यकाल पारदर्शिता, भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्ती, तकनीकी सुधार, श्रमिक कल्याण और प्रशासनिक जवाबदेही पर केंद्रित रहा। विभाग में फर्जीवाड़े के खिलाफ कठोर कार्रवाई, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि, डिजिटल सुधारों की पहल और श्रमिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने जैसे कदमों ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया।

उनके प्रयासों का उद्देश्य एक ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है, जिसमें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के सीधे वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचे तथा हरियाणा का श्रमिक वर्ग सामाजिक और आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सके।


 

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