हरियाणवियों के लिए खुशखबरी ; पुराने VIP नंबर बदलवाने पर नहीं लगेगा चार्ज...हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Edited By Krishan Rana, Updated: 01 Jun, 2026 02:44 PM

good news for haryanvis no charge will be levied for changing old vip numbers

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत

चंडीगढ़ : पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने पुराने और पसंदीदा वाहन नंबर रखने वाले हजारों वाहन मालिकों को बड़ी राहत प्रदान की है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दशकों पुरानी नंबर सीरीज को नई सीरीज में बदलने पर वाहन मालिकों से किसी भी प्रकार की प्रेफरेंशियल (पसंदीदा) नंबर फीस नहीं वसूली जा सकती। अदालत ने कहा कि पुराने पंजीकरण नंबरों को नई सीरीज में परिवर्तित किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त शुल्क लेना कानूनन उचित नहीं है, चाहे वह नंबर वीआईपी श्रेणी का हो या पसंदीदा नंबर हो। 

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के जस्टिस जगमोहन बंसल ने 14 से अधिक याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला तीसरी बार न्यायालय के समक्ष आया है। विवाद उन वाहनों के पंजीकरण नंबरों को लेकर है जो मोटर वाहन अधिनियम 1988 लागू होने से पहले जारी किए गए थे और जिनकी शुरुआत एचआर के बजाय पुराने अक्षरों से होती थी। 

याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि सरकार पहले भी कई बार न्यायालय में यह आश्वासन दे चुकी है कि पुराने नंबरों को नई सीरीज में बिना किसी शुल्क के बदला जाएगा। इसके बावजूद 8 नवंबर 2019 को जारी एक आदेश के माध्यम से सरकार ने अपना रुख बदल लिया और पसंदीदा नंबर रखने वाले वाहन मालिकों से शुल्क वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि वाहन पंजीकरण चिह्नों की वैधता और उनके नवीनीकरण से जुड़े नियम बनाने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकार को इस विषय में नियम बनाने या ऐसे आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है। हरियाणा सरकार ने केवल मेमो और सर्कुलर जारी कर नीति लागू करने का प्रयास किया जबकि इसके इसके लिए कानून में कोई अधिकार नहीं दिया गया था। इसी आधार पर विवादित आदेश अवैध है।

हाई कोर्ट के इस फैसले से हरियाणा के उन हजारों वाहन मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा, जो वर्षों पुराने पंजीकरण नंबरों को नई सीरीज में बदलवाना चाहते हैं। अब उन्हें अपने पसंदीदा या वीआईपी नंबर को बरकरार रखने के लिए अतिरिक्त प्रेफरेंशियल फीस नहीं देनी होगी।

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