इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों को HC का बड़ा तोहफा, आनुपातिक पेंशन को लेकर कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Edited By Isha, Updated: 28 May, 2026 09:56 AM

forced resignation high court orders payment of pension

पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करने को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गलत करार दिया है। अदालत

चंडीगढ़: पारिवारिक मजबूरियों के चलते नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करने को पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गलत करार दिया है। अदालत ने 13 वर्ष की सेवा के अनुपात में पेंशन, डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी तथा सेवानिवृत्ति से जुड़े अन्य लाभ देने के आदेश जारी किए हैं।

जस्टिस कुलदीप तिवारी ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता पंकज मेहता ने अदालत में स्टेनो टाइपिस्ट के तौर पर 13 वर्ष तक सेवा दी और उसके खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्रवाई शुरू नहीं हुई। ऐसे में अदालत अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाने के बजाय व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य है।

मेहता को सितंबर 1999 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश की ओर से नियमित पद पर स्टेनो टाइपिस्ट नियुक्त किया गया था। 2012 में उन्होंने एक माह का वेतन जमा करवाते हुए इस्तीफा दे दिया। इसे 3 अक्तूबर 2012 को स्वीकार कर लिया गया। छह वर्ष बाद अगस्त 2018 में उन्होंने अनुपातिक पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों की मांग करते हुए आवेदन दिया लेकिन उनका दावा खारिज कर दिया गया फिर उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 

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