Edited By Isha, Updated: 27 May, 2026 02:25 PM

हरियाणा के गेस्ट टीचर्स (अतिथि अध्यापकों) के लिए राजधानी चंडीगढ़ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले करीब दो दशकों (20 साल) से अपने हक और न्याय के लिए अदालत के चक्कर
चंडीगढ़: हरियाणा के गेस्ट टीचर्स (अतिथि अध्यापकों) के लिए राजधानी चंडीगढ़ से एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। पिछले करीब दो दशकों (20 साल) से अपने हक और न्याय के लिए अदालत के चक्कर काट रहे गेस्ट टीचर्स के पक्ष में माननीय कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है।
लंबे समय से चल रहे इस विवाद पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गेस्ट टीचर्स के पक्ष को सही ठहराया। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि "गेस्ट टीचर्स ने शिक्षा व्यवस्था में अपना लंबा और महत्वपूर्ण योगदान दिया है, उन्हें उनके वाजिब हक से महरुम नहीं रखा जा सकता।
आपको बता दें कि हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का यह मुद्दा पिछले 20 सालों से लगातार कानूनी दांव-पेंचों और राजनीतिक वादों के बीच फंसा हुआ था। कई बार हटाए जाने के डर और पक्के होने की मांग को लेकर इन अध्यापकों ने सड़कों से लेकर कोर्ट तक लंबा संघर्ष किया है। आज कोर्ट के इस फैसले ने हजारों गेस्ट टीचर्स और उनके परिवारों के भविष्य को एक नई सुरक्षा और न्याय की उम्मीद दी है।
20 साल का संघर्ष लाया रंग: क्या था पूरा विवाद?
हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का यह कानूनी सफरनामा साल 2005-2006 में शुरू हुआ था। शुरुआत (2005-2006): तत्कालीन सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए करीब 14,000 गेस्ट टीचर्स की भर्ती की थी। इसके बाद नियमित भर्ती होने पर इन गेस्ट टीचर्स को हटाने के आदेश जारी हुए, जिसके खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हुई। साल 2019 में सरकार ने 'अतिथि अध्यापक सेवा सुरक्षित विधेयक' पास कर इन्हें 58 साल की उम्र तक नौकरी की सुरक्षा तो दी, लेकिन पूर्ण नियमितीकरण और समान वित्तीय लाभों (समान काम-समान वेतन) का पेच फंसा रहा। आज के इस ऐतिहासिक फैसले ने इन शिक्षकों के पूर्ण नियमितीकरण और उनके बुनियादी वित्तीय हकों के रास्ते को पूरी तरह साफ कर दिया है।
13,000 से अधिक परिवारों को लाभ
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 13,700 से अधिक गेस्ट टीचर्स (JBT, TGT और PGT) के भविष्य को स्थाई सुरक्षा मिली है।कोर्ट के आदेश के बाद इन शिक्षकों को नियमित अध्यापकों के समान वेतनमान और अन्य सर्विस बेनिफिट्स (सेवा लाभ) मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। अन्य विभागों के लिए मिसाल: यह फैसला हरियाणा के अन्य विभागों में काम कर रहे हजारों कच्चे या अनुबंधित कर्मचारियों के लिए भी एक बड़ी कानूनी नजीर (मिसाल) बनेगा।