हरियाणा की नई औद्योगिक रणनीति: “फैक्ट्री लाओ, प्रोत्साहन पाओ” मॉडल से निवेश का बड़ा केंद्र बनने की तैयारी

Edited By Manisha rana, Updated: 21 May, 2026 12:29 PM

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हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए आक्रामक और बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है।

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा सरकार ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में औद्योगिक विकास को नई दिशा देने के लिए आक्रामक और बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है। राज्य अब केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि देश और विदेश से बड़े निवेश आकर्षित कर खुद को राष्ट्रीय औद्योगिक, तकनीकी और रोजगार केंद्र के रूप में स्थापित करने की तैयारी में है।

नई औद्योगिक नीतियों का सबसे बड़ा संदेश साफ है—“दूसरे राज्यों से फैक्ट्री लाओ, करोड़ों की सहायता पाओ।” सरकार का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर के आसपास तेजी से बढ़ती सप्लाई चेन और औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा हिस्सा हरियाणा की ओर आकर्षित किया जा सकता है।

घरेलू और विदेशी उद्योगों के लिए बड़ा प्रोत्साहन

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई घरेलू औद्योगिक इकाई अपना प्लांट हरियाणा में स्थानांतरित करती है तो उसे 5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलेगी। वहीं विदेशों से आने वाली औद्योगिक इकाइयों को 10 करोड़ रुपये तक का समर्थन दिया जाएगा। सरकार की यह नीति स्पष्ट संकेत देती है कि हरियाणा अब केवल निवेश आमंत्रित नहीं कर रहा, बल्कि उद्योगों को आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धी राज्यों से आगे निकलने की रणनीति पर काम कर रहा है।

निजी औद्योगिक पार्कों को भी विशेष पैकेज

हरियाणा सरकार ने निजी औद्योगिक पार्क विकसित करने वाले डेवलपर्स के लिए भी बड़ा पैकेज तैयार किया है। डेवलपर्स को पूंजीगत सब्सिडी या शुद्ध एसजीएसटी प्रतिपूर्ति में से किसी एक विकल्प को चुनने की सुविधा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त प्रति पार्क 45 करोड़ रुपये तक की 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे छोटे और मध्यम शहरों में नए औद्योगिक क्लस्टर विकसित होंगे और औद्योगिक गतिविधियों का दायरा बड़े शहरों से बाहर भी फैलेगा।

‘वन कॉमन बेनिफिट मॉडल’ बना नई नीति की पहचान

हरियाणा की नई औद्योगिक रणनीति की सबसे बड़ी विशेषता “वन कॉमन बेनिफिट मॉडल” है। कैबिनेट द्वारा मंजूर की गई विभिन्न सेक्टर आधारित नीतियों में से 9 नीतियों के लिए एक साझा इंसेंटिव सिस्टम तैयार किया गया है। इस मॉडल के तहत अलग-अलग उद्योगों को अलग प्रक्रियाओं में उलझने के बजाय एक समान लाभ ढांचे के तहत सुविधाएं मिलेंगी। सरकार का उद्देश्य उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, फार्मा, टॉयज, गेमिंग, एग्री-बिजनेस और ई-वेस्ट जैसे हाई-टेक क्षेत्रों के लिए अलग नीतियां तैयार की गई हैं, लेकिन इन सभी का साझा लक्ष्य रोजगार, निवेश और तेज मंजूरी व्यवस्था है।

स्थानीय युवाओं के रोजगार पर सबसे बड़ा फोकस

नई नीति में सबसे अधिक जोर हरियाणा के युवाओं को रोजगार दिलाने पर दिया गया है। राज्य के स्थानीय युवाओं को नौकरी देने वाली कंपनियों को प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक रोजगार सृजन सब्सिडी मिलेगी। यह सहायता लगातार 10 वर्षों तक जारी रहेगी। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों को रोजगार देने वाली कंपनियों को प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1.20 लाख रुपये तक सहायता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निजी क्षेत्र में स्थानीय भर्ती बढ़ेगी और उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध होगा।

ईपीएफ प्रतिपूर्ति से उद्योगों का खर्च घटेगा

नई व्यवस्था में उद्योगों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण ईपीएफ प्रतिपूर्ति योजना को माना जा रहा है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) पोर्टल के माध्यम से भर्ती करने वाली कंपनियों को पांच वर्षों तक नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति मिलेगी। उद्योग जगत इसे “डायरेक्ट कॉस्ट कटिंग मॉडल” के रूप में देख रहा है, क्योंकि इससे शुरुआती परिचालन खर्च में भारी कमी आएगी। विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को इससे बड़ी राहत मिलने की संभावना है।

ग्रीन इंडस्ट्री और पर्यावरण आधारित विकास पर जोर

हरियाणा सरकार ने नई नीतियों में हरित उद्योगों को भी प्राथमिकता दी है। ग्रीन एनर्जी, कार्बन क्रेडिट, शून्य द्रव अपशिष्ट प्रणाली और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे। सरकार की कोशिश है कि हरियाणा केवल औद्योगिक विस्तार का मॉडल न बने, बल्कि “ग्रीन इंडस्ट्रियल स्टेट” के रूप में भी राष्ट्रीय पहचान बनाए।

पेटेंट और इनोवेशन को मिलेगा सीधा आर्थिक समर्थन

नई नीति में रिसर्च और इनोवेशन को आर्थिक प्रोत्साहन से जोड़ा गया है। घरेलू पेटेंट के व्यावसायीकरण पर 50 लाख रुपये तक और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर 1 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसका उद्देश्य स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी कंपनियों और रिसर्च आधारित उद्योगों को हरियाणा में निवेश के लिए आकर्षित करना है। सरकार मानती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था केवल उत्पादन आधारित नहीं, बल्कि इनोवेशन आधारित होगी।

समयबद्ध मंजूरी और भुगतान की गारंटी

नई औद्योगिक व्यवस्था में निवेशकों को समयबद्ध सेवाओं का भरोसा भी दिया गया है। भूमि व्यवहार्यता प्रमाण पत्र 45 कार्य दिवसों में जारी किया जाएगा। वहीं प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा 7 कार्य दिवसों में और शेष राशि 45 दिनों में जारी करने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने यह भी तय किया है कि यदि सरकारी एजेंसियों की ओर से भुगतान में देरी होती है तो 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा। यह प्रावधान निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

हरियाणा को हाई-टेक निवेश केंद्र बनाने की तैयारी

सरकार का दावा है कि नई औद्योगिक नीतियां केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका लक्ष्य हरियाणा को रोजगार, निर्यात, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का राष्ट्रीय केंद्र बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह “वन पैकेज, मल्टी बेनिफिट” मॉडल प्रभावी ढंग से लागू होता है तो आने वाले वर्षों में हरियाणा देश के सबसे प्रतिस्पर्धी औद्योगिक राज्यों में शामिल हो सकता है।

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