एक अनाथ की दर्दभरी कहानी बनी हजारों बच्चों की उम्मीद...जानिए कैसे हुई ‘हरिहर योजना’ की ‘मनोहर’ शुरुआत

Edited By Krishan Rana, Updated: 07 Jun, 2026 03:57 PM

an orphan s heart wrenching story became a beacon of hope for thousands of child

कई बार एक व्यक्ति की पीड़ा ऐसी कहानी लिख देती है, जो आगे चलकर हजारों लोगों के जीवन में बदलाव का कारण बनती है। हरियाणा की ‘हरिहर योजना’ भी

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): कई बार एक व्यक्ति की पीड़ा ऐसी कहानी लिख देती है, जो आगे चलकर हजारों लोगों के जीवन में बदलाव का कारण बनती है। हरियाणा की ‘हरिहर योजना’ भी ऐसी ही एक संवेदनशील पहल है, जिसकी प्रेरणा किसी सरकारी फाइल या बैठक से नहीं, बल्कि एक अनाथ युवक के दर्दभरे सवाल से मिली थी। आज यह योजना उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है, जो बालगृहों से निकलने के बाद जीवन की चुनौतियों का अकेले सामना करने को मजबूर हो जाते हैं।

एक सवाल जिसने व्यवस्था को सोचने पर मजबूर किया

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस योजना की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में सोनीपत प्रवास के दौरान उनसे देर रात एक युवक मिलने आया। करीब 24 वर्षीय यह युवक बचपन से बालगृह में पला-बढ़ा था और 18 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद नियमों के तहत संस्थान छोड़ चुका था।

युवक ने भावुक शब्दों में अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि उसके पास न परिवार है, न कोई पहचान और न ही भविष्य का कोई सहारा। उसने यह भी बताया कि उसकी तरह अनेक बच्चे बालिग होने के बाद व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं और फिर जीवन की कठिन राहों पर अकेले छोड़ दिए जाते हैं। युवक की यह पीड़ा मनोहर लाल के मन को छू गई और यहीं से एक नई सोच ने आकार लेना शुरू किया।

संरक्षण से आगे बढ़कर पुनर्वास की सोच

इस मुलाकात के बाद यह महसूस किया गया कि बालगृहों में रहने वाले बच्चों की जिम्मेदारी केवल 18 वर्ष की आयु तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यदि उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक स्थापित करना है तो युवावस्था में भी सहयोग की आवश्यकता है। इसी विचार के साथ ‘हरिहर योजना’ की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य बच्चों को केवल संरक्षण देना नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ाना है।

25 वर्ष की आयु तक मिलेगा सहयोग

योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बालगृह छोड़ने के बाद भी पात्र बच्चों को सरकारी सहायता मिलती रहती है। 18 वर्ष की आयु के बाद अगले सात वर्षों तक, यानी 25 वर्ष की आयु तक, उन्हें शिक्षा, आवास, कौशल विकास और पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे युवाओं को जीवन की नई शुरुआत करने के लिए आवश्यक समय और संसाधन मिल पाते हैं।

शिक्षा से रोजगार तक का पूरा मार्ग

हरिहर योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। इसके तहत युवाओं को उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद योग्य युवाओं को उनकी पात्रता के अनुसार ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, ताकि वे सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।

प्रेरणा बने युवक की जिंदगी भी संवरी

इस योजना की सबसे प्रेरक बात यह है कि जिस युवक की कहानी ने इस पहल को जन्म दिया, उसकी अपनी जिंदगी भी सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ी। बाद में उसे रोजगार मिला, उसका विवाह हुआ और आज वह सामान्य पारिवारिक जीवन जी रहा है। उसकी संघर्षगाथा अब अनेक बच्चों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

संवेदनशील शासन का उदाहरण बनी हरिहर योजना

हरिहर योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व की नई सोच का प्रतीक बनकर उभरी है। यह संदेश देती है कि किसी बच्चे को केवल बचपन में संरक्षण देना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे युवावस्था तक अवसर, मार्गदर्शन और सहारा देना भी उतना ही आवश्यक है। सोनीपत की एक रात हुई वह मुलाकात आज हजारों बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने वाली पहल में बदल चुकी है।
 
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