Edited By Manisha rana, Updated: 16 Apr, 2026 03:59 PM

हरियाणा के नवनिर्वाचित सांसद संजय भाटिया ने आज गुरुवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली।
नई दिल्ली : हरियाणा के नवनिर्वाचित सांसद संजय भाटिया ने आज गुरुवार को राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। उन्होंने हिंदी में शपथ ली।
2019 में चुने गए थे लोकसभा सांसद
पानीपत में 29 जुलाई 1967 को जन्मे संजय भाटिया ने छात्र जीवन से ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़कर संगठनात्मक कार्य शुरू किया। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जब वे 1987 में मंडल महासचिव बने और 1989 में मंडल अध्यक्ष का पद संभाला। 2001 में उन्हें नगर परिषद का अध्यक्ष बनाया गया। 2015 से 2021 तक वे भाजपा हरियाणा के राज्य महासचिव रहे और हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के रूप में ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने में योगदान दिया। उनकी सबसे बड़ा राजनीतिक उपलब्धि 2019 लोकसभा चुनाव में आई, जब वे पहली बार चुनाव लड़ते हुए करनाल लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर भारी बहुमत से विजयी हुए। उन्होंने हरियाणा के 53 साल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत दर्ज की, जो उनके कड़ी मेहनत, जनसंपर्क और पार्टी के प्रति समर्पण का परिणाम था। वे जनता के बीच काफी सुलभ और सक्रिय रहे, जिससे करनाल क्षेत्र में उनकी अच्छी छवि बनी। 2024 में उन्होंने पार्टी के फैसले का सम्मान करते हुए सीट छोड़ी और संगठनात्मक जिम्मेदारियाँ निभाईं, जिसमें हरियाणा विधानसभा चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका शामिल थी।
बेटे की शादी के 1 दिन पहले तक पश्चिम बंगाल चुनाव में कर रहे थे प्रचार
पार्टी के प्रति समर्पण भाव सांसद संजय भाटिया की सबसे बड़ी खासियत है। बेटे की शादी के एक दिन पहले तक वह पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार में लगे हुए थे। 15 फरवरी, 2026 को उनके बेटे की शादी थी। 14 फरवरी को घर में रिंग सैरेमनी रखी गई थी और 13 फरवरी की रात को वह पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार से घर लौटे। इसके बाद 15 अप्रैल को शादी में शामिल हुए और 16 अप्रैल को दोबारा पश्चिम बंगाल चले गए। राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने के लिए भी पश्चिम बंगाल से ही आए थे और शपथग्रहण के बाद वापिस पश्चिम बंगाल चले गए। इससे पता चलता है कि पार्टी के प्रति उनका कितना समर्पण भाव है।
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