Haryana: हुड्डा की कोठी का पीनल रेंट माफी पर फंसा पेंच, 3 मंत्रियों को आपत्ति...

Edited By Manisha rana, Updated: 16 Apr, 2026 12:27 PM

three ministers object to the waiver of penal rent for hooda bungalow

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकारी कोठी के पीनल रेंट माफी पर फिलहाल पेंच फंस गया है। मंत्रिमंडल की पिछली बैठक में पीनल रेंट माफी का मामला चर्चा में तो आया, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका।

चंडीगढ़ : हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकारी कोठी के पीनल रेंट माफी पर फिलहाल पेंच फंस गया है। मंत्रिमंडल की पिछली बैठक में पीनल रेंट माफी का मामला चर्चा में तो आया, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका।

दरअसल मंत्रिमंडल की बैठक में ये मुद्दा चर्चा के लिए लाया गया तो इस दौरान कैबिनेट के 3 मंत्रियों ने इस प्रस्ताव पर स्पष्ट आपत्ति दर्ज कर दी। जिसके चलते सी.एम. नायब सिंह सैनी ने मामला फिलहाल टाल दिया है। मंत्रियों ने कहा कि पीनल रेंट ही काफी नहीं है इसमें कोठी का संपूर्ण खर्चा जोड़ा जाना चाहिए। जिसमें ओवरस्टे के मैटेनेंस, बिजली, पानी और मैनपावर का खर्च शामिल होना चाहिए।

गौरतलब है कि साल 2019 में कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष का पद मिला था। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट रैंक का दर्जा होता है। ऐसे में उन्हें सैक्टर-7 में 70 नंबर कोठी अलॉट की गई थी। इस कोठी में पिछले 5 वर्षों से कांग्रेस की गतिविधियां संचालित हो रही थी। इससे पहले वर्ष 2014 से 2019 तक हुड्डा चंडीगढ़ के सैक्टर-3 स्थित एम.एल.ए. फ्लैट में रहते थे। 

बीते वर्ष 2024 के चुनाव के बाद कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष का पद देने में करीब 11 महीने का समय लगा दिया। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने अपना सरकारी आवास खाली नहीं किया। जबकि सरकार ने हुड्डा को दिसंबर 2024 में कोठी खाली करने कहा था। हुड्डा ने इसके लिए 15 दिन का टाइम मांगा था, लेकिन आवास नहीं किया गया। लिहाजा लोक निर्माण विभाग के नियमों के तहत उसका पीनल रेंट बढ़कर 16.49 लाख रुपए हो गया। पीनल रेंट माफी की योजना पूर्व की सरकारों में चलती रही है। ऐसे में हुड्डा के आग्रह पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी मंत्रिमंडल बैठक में इस मामले को रखने के आदेश दिए। 

सूत्रों के मुताबिक पिछली बैठक में जैसे ही पीनल रेंट माफी का मुद्दा उठाया तो कुछ मंत्रियों ने कहा कि बिना पूरी वित्तीय जानकारी के इतनी बड़ी राशि माफ करना उचित नहीं होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संबंधित विभाग से कोठी के रखरखाव पर हुए मेंटेनेंस, बिजली, पानी और मैनपावर सहित सभी खचों का विस्तृत ब्यौरा पहले लिया जाए। बताया जा रहा है कि मंत्रियों का तर्क था कि जब तक कुल बकाया और वास्तविक खर्च की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती, तब तक किसी भी तरह की राहत देने का निर्णय जल्दबाजी माना जाएगा। इसी कारण बैठक में इस विषय पर आगे चर्चा रोक दी गई और विभाग को विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

अगली कैबिनेट में फिर उठेगा मुद्दा

बातचीत में एक कैबिनेट मंत्री ने बताया कि अब संभावना जताई जा रही है कि संबंधित विभाग से पूरी जानकारी मिलने के बाद यह मुद्दा अगली कैबिनेट बैठक में फिर से उठाया जाएगा। राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को लेकर हलचल तेज हो गई है, क्योंकि मामला पूर्व मुख्यमंत्री से जुड़ा होने के कारण संर्वेदनशील माना जा रहा है।

400 गुना तक पीनल रेंट वसूलने का प्रावधान

हरियाणा लोक निर्माण विभाग के नियमानुसार सरकार के किसी भी मंत्री या विधायक को नई सरकार बनने के 15 दिन में सरकारी आवास खाली करना होता है। यदि वह तय समय पर नहीं खाली करता है तो उसके खिलाफ पीनल रेंट की कार्रवाई होती है। पहले महीने मकान खाली नहीं होने पर 50 गुना किराया वसूल किया जाता है। वहीं दूसरे महीने में 100 गुना और तीसरे महीने 200 गुना पीनल रेंट वसूला जाता है। इसके बाद भी कोई कोठी खाली नहीं करता है, तो फिर चौथे महीने से 400 गुना पीनल रेंट वसूल किया जाता है।
 

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